May 10, 2016

व्यंग्य

पिछवाड़े

बुढ्ढा

खाँसता

- सुशील यादव

बुढ्ढे को जिंदगी भर कभी बीमार नहीं देखा। हट्टा-कट्टा, चलता-फिरता, दौड़ता-भागता मस्त तंदरूस्त रहा। कभी छीक, सर्दी-जुकाम, निमोनिया-खाँसी का मरी नहीं रहा।
अभी भी वो सत्तरवे बसंत की ओर पैदल चल रहा है। उसकी सेहत का राज है कि वो, घर की सुखी दाल-रोटी में मगन रहता है। दो बच्चे थे, शादियाँ हो गई। इस शादी के बाद पत्नी की सीख पर कि बहू-बेटियों का घर हैं, समधन पसरी रहती हैं, आते-जाते खाँस तो लिया करो।
इस प्रायोजित खाँसी की प्रेक्टिस करते-करते उन्हें लगा कि ग्लाइकोडीन का ब्रांड एम्बेसडर बनना ज्यादा आसान था, कारण कि टू बी. एच. के. वाले मकान में जहाँ पिचावाड़ा ही नहीं होता, आदमी कहाँ जा के खासे?
हमारे पड़ौस में दो दमे के बुजुर्ग मरीज रहते हैं, उनके परिवार वाले बाकायदा उनको पिछवाड़ा अलाट कर रखे हैं जब चाहों इत्मीनान से रात भर खाँसते रहो।
एक हमारे चिलमची दादा भी हुआ करते थे, एक दिन इतनी नानस्टाप, दमदार, खासने की प्रैक्टिस की कि पाँच-दस ओव्हर पहले खाँसते-खाँसते, उनकी पारी सिमट गई, वे अस्सी पार न कर सके।
आजकल हमारे चेलारामानी को पालिटिकली खाँसने का शौक चर्राया है।
वे लोग लोकल पालिटिकल फील्ड में हंगामेदार माने जाते हैं, जो समय पे खासने का तजुर्बा रखते हैं मसलन, सामने वाले ने प्रस्ताव रखा महापौर को घेरने का सही वक्त यही है वे कहेंगे नहीं अभी थोड़ी गलती और कर लेने दो, वे खाँस कर वीटो कर देते हैं उनकी उस समय, मन मार के, सुन ली जाती है।
आप कैसे भी प्रस्ताव, कहीं भी चार लोगों की बैठक में ले आओ वे विरोध किए बिना रह ही नहीं सकते।
लोग अगर कह रहे हैं कि देखिये, हम लोग मोहल्ले में पानी की कमी के बाबत मेयर से मिल के समस्या से अवगत करावे। वे खाँस दिए मतलब उन्हें इस विषय में कहना है। जोर से खाँसी हुई तो मतलब उनकी बात तत्काल सुनी जावे। वे सुझाव देने वाले पर पलटवार करके पूछते हैं। आपके घर में पानी कब से नहीं आ रहा? घर के कितने लोग हैं, हमारे घर में चौदह लोग रहते हैं, सफिशियेंट पानी आता है। इतना आता है कि नालियाँ ओव्हर फ्लो हो रहती हैं। मेयर से हमारी तरफ नाली बनवाने का रिक्वेस्ट किया जावे। अभी गरमी आने में तो काफी वक्त है। आपकी समस्या तब देख ली जावेगी। मीटिंग उनके एक लगातार खाँसने से, अपने अंत की तरफ चली जाती है, न पानी और न ही नाली की बात, मेयर तक पहुँच पाती है।
हम मोहल्ले वाले चेलारमानी के न्यूसेंस- वैल्यू को भुनाने के चक्कर में उनको एक बार मोहल्ला सुधार समिति का अध्यक्ष बना दिए। उनने साल भर का एजेंडा यूँ बनाया। भादों में सार्वजनिक गणेश उत्सव, कलोनी वालों से चन्दा, फिर नवरात्रि में कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन, चंदा। मोहल्ला सुधार समिति की तरफ से विधायक-मन्त्री का स्वागत, जिसमे मोहल्ले के विकास के लिए राशि की माँग, सड़क-नाली सुधार पर ध्यानकर्षण। हरेक माह समिति के सदस्यों की बैठक।
वे बैठक में एकमेव वक्ता होते, आए दिन, चंदा उगाही में मुस्तैदी के चलते मोहल्ले वाले तंग आ गए। किसी भी दरवाजे पर खटखटाने की बजाय वे केवल खाँस दिया करते तो लोग समझ जाते चेलारमानी आ गए। एक सौ, चंदे की चपत लग गई समझो। आदमी सौ तो बर्दास्त कर लेता, मगर बिना चाय के न टलने की आदत को बर्दाश्त न कर पाते।
जिस गरमी में उसे चुना गया था उसी मुस्तैदी से उसे हटाने का अभियान चलाना पड़ा। लोग चंदा दे-दे के हलाकान हो गए थे।
चेलारमानी के सब्सिट्यू, ताकतवर खासने वाले की तलाश मोहल्ले में जारी है।
अगर आपके पिछवाड़े में कोई  बुढ्ढा खाँसता हुआ मिले तो इस मुहल्ले में भिजवा दे।
सम्पर्क: न्यू आदर्श नगर दुर्ग (छत्तीसगढ़), मो. 9426764552, Email- sushil.yadav151@gmail.com

0 Comments:

लेखकों से अनुरोध...

उदंती. com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी,कविता, गीत,गजल, व्यंग्य,निबंध,लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है।आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही साथी समाज सेवी संस्थाद्वारा संचालित स्कूलसाथी राऊंड टेबल गुरूकुल में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है।
शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से साथी राऊंड टेबल गुरूकुलके बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है।
अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर,तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में),क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर,पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर,जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ।
सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी,रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबाइल नं.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष