April 10, 2011

पिछले दिनों

फ्रांस में बुर्का पहनना अपराध
फ्रांस में 11 अप्रैल 2011 से एक नया कानून बन गया है। जिसके अनुसार किसी भी महिला द्वारा बुर्का पहनना एक दंडनीय अपराध होगा। सार्वजनिक स्थल पर बुर्का पहनने पर 150 यूरो यानी 9,000 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। इस कानून के साथ ही फ्रांस, यूरोप का पहला ऐसा देश बन गया है जहां बुर्के पर रोक लगी है। ज्ञात हो कि यूरोप में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी फ्रांस में है।

महिलाओं ने तोड़ी परम्परा
महाराष्ट्र के कोल्हापुर के प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर में 2000 वर्षो की पुरानी परम्परा को तोड़ते हुए महिलाओं ने मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश किया और देवी की पूजा की।
भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा की अध्यक्ष नीता केलकर के नेतृत्व में महिलाओं ने मंदिर में दाखिल होकर देवी अम्बाबाई की पूजा अर्चना की। अब तक महिलाओं को पूजा के लिए मंदिर के एक निर्धारित स्थान तक जाने की अनुमति थी। यह पाबंदी केवल आम घरों की महिलाओं पर लागू थी जबकि शाही परिवारों और लोकप्रिय महिला हस्तियों और पुजारी की पत्नियों के ऊपर यह प्रतिबंध लागू नहीं था!

यूं ली जम्हाई कि खुला ही रह गया मुंह!
ब्रिटेन में 17 साल की एक छात्रा होली थॉम्पसन ने जम्हाई लेते समय अपना मुंह इतना ज्यादा खोल लिया कि फिर वह बंद नहीं हो सका। होली कक्षा में पढ़ते समय इतनी ऊब गई कि उसने बहुत ताकत लगाकर जम्हाई ली, इससे उसका मुंह खुला का खुला रह गया। जम्हाई लेने से उसके जबड़े अपने स्थान पर हट गए। और उसे डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाना पड़ा।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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