January 29, 2011

अनुभवों का शंखनाद

- रश्मि प्रभा

तुम एक वटवृक्ष हो
इसकी शाखाओं में
ऋतुओं के गीत हैं ...
पत्ते गिरते हैं
तो पत्ते आते भी हैं
वर्षों में
समय दर सय बने घोंसलों में
अनगिनत लम्हों के कलरव हैं ...
चलो गिनते हैं अपनी उँगलियों पर
उन सालों को
जब इसके हरे पत्तों पर
हम अपना नाम लिखा करते थे
देखो न
अब इन हरे पत्तों पर
हमारे बच्चों के नाम हैं...
तुम्हारे घनत्व में
कितने राहगीर सुकून पाते हैं
परत दर परत तुम्हारे तने में
जाने कितनी कहानियाँ हैं
कुछ इनकी कुछ उनकी
कुछ हमारी ...

एक नया सा
नई उम्मीदों के संग
लिपटा है तेरी टहनियों से
नए सपनों की सरसराहट है पत्तों में
तुम्हारे जड़ों की मजबूती
सपनों का हौसला ...
ईश्वर का प्रतिनिधित्व करो
कहो किसी मंत्र की तरह
मस्जिद के अजान की तरह
नया वर्ष,
सपनों से हकीकत तक का
स्वर्णिम सफऱ तय करे
हर दिन तुम्हारा हो

अपने अनुभवों का शंखनाद करो
2011 का जयघोष करो ....
मेरे बारे में...
सौभाग्य मेरा कि मैं कवि पन्त की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की बेटी हूं और मेरा नामकरण स्वर्गीय सुमित्रा नंदन पन्त ने किया और मेरे नाम के साथ अपनी स्व रचित पंक्तियां मेरे नाम की... 'सुन्दर जीवन का क्रम रे, सुन्दर- सुन्दर जग-जीवन'। शब्दों की पांडुलिपि मुझे विरासत में मिली है। अगर शब्दों की धनी मैं ना होती तो मेरा मन, मेरे विचार मेरे अन्दर दम तोड़ देते... मेरा मन जहां तक जाता है, मेरे शब्द उसके अभिव्यक्ति बन जाते हैं, यकीनन, ये शब्द ही मेरा सुकून हैं...
मेरा पता: NECO NX flat no- 42 near dutt mandir chauk viman nagar pune -14
मो। 09371022446, Email- rasprabha@gmail.com, www.urvija.parikalpnaa.com
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भोर की पहली किरण
- आशा भाटी
कोहरे की चादर ओढ़कर सोये हैं पेड़ सभी
नहीं है याद इन्हें मौसम की कोई
भोर की पहली किरण इन्हें जगाती है
तो नया वर्ष आता है।

मौसम का भरोसा क्या, ये तो आते जाते हैं
कभी- कभी कई बार ये बदलते भी हंै
कोई क्षण जीवन में ठहर जाता है।
तो नया वर्ष आता है।

कुछ दिन पहले बाग था वीरान
महकते फूलों के इंतजार में था
कली कोई मुसकुराती है
तो नया वर्ष आता है।

यूं तो इन्द्रधनुष धरा पर
बिखरते रहते हैं
कभी कोई रंग जीवन में निखर जाता है
तो नया वर्ष आता है।
मेरे बारे में...
हिन्दी और अंग्रेजी साहित्य में स्नातक हूं। प्रकृति से प्रेम है। पढऩे- लिखने की शौकीन हूं। लखनऊ की एक साहित्यिक संस्था कादम्बिनी से जुड़ी हूं।
मेरा पता- शताक्षी, 13/89
इंदिरा नगर, लखनऊ
(उ. प्र.) 226016
फोन-0522 - २७१२४७७
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हाइकु
खुशी के फूल
- डॉ. भावना कुंअर
1
सीढिय़ां चढ़े
संभलकर सभी
नये वर्ष में।
2
उलझे रास्ते
जल्द ही सुलझेंगे
नव वर्ष में।

3
मंगलमय
सभी को नव वर्ष
दिल से दुआ।
4
पुराने दिन
जो थे मुश्किल भरे
लो बीत चले।
5
डाकिया लाया
खुशियों भरे पत्र
नये साल में।
6
नये साल की
बगिया में खिलेंगे
खुशी के फूल।
7
लो बीत चला
एक और सफऱ
नई तलाश।
8
लो चल पड़े
नया साल खोजने
बर्फीले दिन।
9
आओ लें प्रण
हो न कोई गुनाह
इस वर्ष में।
10
ओढ़े हुए है
कोहरे की चादर
नूतन वर्ष।
11
सर्द हवाएं
करती आलिंगन
नव-वर्ष का।
12
पंछी-समूह
गाये मधुर गीत
नये साल में।
13
करें स्वागत
खुशियां ले के हम
नव-वर्ष का।
14
खड़ा द्वार पे
प्रेम संदेश लिये
ये नव-वर्ष।
15
ना बरसाए
पलकों की झालर
दु:ख के मोती।
16
प्रथम गान
नव-वर्ष बेला में
गाती कोयल।
17
इस साल में
ना उजड़े चमन
कोशिश यही।
18
खुशियां लाए
बिछड़ों के मध्यस्थ
ये नववर्ष।
19
ओस के कण
चुगती हुई आई
ये जनवरी।
20
सहमे पंछी
अब फिर झूमेंगे
नये साल में।
मेरे बारे में...
मुझे साहित्य से बहुत प्यार है। साहित्य की वादियों में ही भटकते रहने को मन करता है। ज्यादा जानती नहीं हूं पर मेरे अन्त:करण में बहुत सी ऐसी बातें हैं जो कभी तो आत्ममंथन करती हैं और कभी शब्दों में ढलकर रचनाओं का रूप ले लेती हैं। वही सब आपके साथ बांटना चाहूंगी। पिछले वर्ष से आस्ट्रेलिया में अध्यापन कर रही हूं।
मेरा स्थायी पता- द्वारा श्री सी. बी. शर्मा, आदर्श कॉलोनी
(एसडी डिग्री कॉलेज के सामने) मुजफ्फरनगर (उप्र) 251001
Email- bhawnak2002@gmail.com
www.dilkedarmiyan.blogspot.com

3 Comments:

sada said...

सभी रचनायें एक से बढ़कर एक हैं पर इन पंक्तियों में जो बात है वो अभिभूत करती है ...

एक नया साल

नई उम्‍मीदों के संग

लिपटा है तेरी टहनियों से

नए सपनों की सरसराहट है पत्‍तों में

तुम्‍हारे जड़ों की मजबूती

सपनों का हौसला

रश्मि दी की इस रचना प्रस्‍तुति के लिये आपका आभार ।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

पहली दोनों कविता बहुत सुन्दर है ... और फिर हाइकुओं कि लड़ी भी अनुपम है ...
रश्मिदी की यह कविता मुझे बहुत अच्छी लगी .. परंपरा के साथ नए ज़माने की बात करती हुई ..

सहज साहित्य said...

नए वर्ष पर रश्मि प्रभा आशा भाटी और भावना कुँअर की रचनाएँ बहुत प्रभावशाली हैं । तीनो कविताओं में सजीव चित्रण किया गया है.

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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