June 05, 2010

रंग बिरंगी दुनिया

तकिए का दीवाना एक बेचारा
सुनने में यह बात बहुत अजीब लगती है कि किसी व्यक्ति को अपने तकिए से इतना प्यार हो जाए कि वह उससे शादी ही रचा ले। लेकिन यह बात है सच। 28 वर्षीय ली जिन ग्यू ने टोक्यो में एक खास समारोह में पादरी बुलवाकर अपने प्यारे बड़े से तकिए से शादी कर ली। इतना ही नहीं उसने शादी के समय अपने इस तकिए को बाकायदा दुल्हन वाली ड्रैस भी पहनाई।
ली एक फेवरिट सैक्सी एनिमेटिड कार्टून कैरैक्टर फेट टैस्टारोसा का दीवाना है। लोगों का कहना है कि ली ने उसी से प्रेरित होकर अपने तकिए से इस तरह शादी की। ली के एक दोस्त अनुसार वह पूरी तरह इस तकिए का दीवाना है और वह जहां भी जाता है इसे अपने साथ लेकर जाता है। पार्क में घूमने जाते समय, खाना खाने कहीं बाहर होटल जाते समय भी वह इसे अपने साथ रखता है। चौंकिए मत बाकायदा अपनी इस दुल्हन तकिए के लिए अलग सीट लगवा कर उसके लिए भी खाना मंगवाता है!
ली के इस तकिए प्रेम के बाद से तो जापान में तकियों को गले लगाकर घूमना आम बात हो गई है। इस तरह किशोर मानो अपने सपनों की रानी को आगोश में ले रहे होते हैं। वैसे भी तरह- तरह के आकार वाले खूबसूरत तकिए दुनिया भर के बाजार में बहुतायत से मिलते हैं जिनका इस्तेमाल विभिन्न अवसरों पर अपने प्रिय को उपहार में देने के लिए भी किया जाता है। अब इस जापानी व्यक्ति द्वारा तकिये से शादी करने के बाद तकियों के बाजार का रुख क्या होगा इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है! व्यापारियों के लिए तकिये का अपना व्यापार बढ़ाने का बढिय़ा मौका है।
66 की उम्र में मातृत्व सुख !
दुनिया के रंग भी निराले हैं यहां चमत्कारों की भरमार है। ऐसे ऐसे चमत्कार यहां हो जाते हैं कि विज्ञान भी उनके सामने हार जाता है। 75 साल का एक इंसान हवा खाकर जिंदा रहता है तो 66 साल की उम्र में एक महिला एक साथ तीन-तीन बच्चों को जन्म दे कर चकित कर देती है। नाती-पोतों को कहानी सुना कर उनकी बलैया लेने की उम्र में हरियाणा के हिसार जिले की भतेरी देवी तीन बच्चों को जन्म देने वाली संभवत: सबसे उम्रदराज महिला बन गई है। भतेरी देवी ने 29 मई 2010 को दो लड़कों और एक लड़की को एक साथ जन्म दिया है।
भतेरी की शादी को 44 वर्ष हो चुके हैं। सातरोड गांव की भतेरी देवी को नैशनल फर्टिलिटी सेंटर में इनविट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक के माध्यम से गर्भाधान कराया गया था। भतेरी के पति देवा सिंह ने भतेरी से शादी करने के बाद बच्चों की आस में दो बार और शादी की थी लेकिन वह एक बार भी पिता नहीं बन सके। भतेरी देवी से पहले इसी तकनीक से डेढ़ वर्ष पूर्व जींद की राजो देवी ने 70 वर्ष की उम्र में इसी केंद्र में एक लड़की को जन्म दिया था।
दादी की उम्र में मां बनी भतेरी देवी और उसके पति ने कहा कि तीन बच्चों के जन्म के बाद उनका आंगन गुलजार हो गया है इतना ही नहीं भतेरी को बेहद खुशी है कि वह इस उम्र में बच्चे पैदा कर पाई हैं। पेशे से खेती का कार्य करने वाले बच्चों के पिता देवा सिंह कहते हैं कि वे तीनों बच्चों की परवरिश बहुत अच्छी तरह से करेंगे।
यह सब तो ठीक है बच्चे उनके हैं तो पालन- पोषण तो करेंगे ही पर क्या वे कुदरत और विज्ञान के इस करिश्मे के साथ अपनी उम्र भी बढ़वा कर लाए हैं? कितने साल तक ये बूढ़े माता- पिता अपने इन तीन नन्हें बच्चों का लाड़- दुलार कर सकेंगे? चिकित्सा विज्ञान भले ही अपने इस करिश्मे पर इतराये, पर क्या इस सवाल का जवाब उनके पास है कि इन बच्चों का भविष्य किससे साये में पलेगा?

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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