December 02, 2009

ख्वाहिश


- आशीष दशोत्तर
ठोकर खाकर भी समझे हैं खुद को लोग सयाने कुछ,
लो, ऐसे ही लोग चले हैं दुनिया को समझाने कुछ।

पनघट, पीपल, कच्चे घर, कुछ गलियां छोटी-छोटी सी,
आंखों में यूं आ जाते हैं चलकर ख्वाब पुराने कुछ।

आजादी भी अब तो कितनी दूर तलक फैली देखो,
घर में यूं ही आ जाते हैं हरदम लोग डराने कुछ।

राम अगर हैं हमें बचा ले पल-पल होते दंगों से,
ऐसा ही तो कहती होंगी शायद रोज अजाने कुछ।

अपनी- अपनी ख्वाहिश को हर कोई पूरा कर माना,
उसके हिस्से में आए हैं घरवालों के ताने कुछ।

झण्डे, बैनर, जलसे, जमघट, बड़े- बड़े जयघोष हुए,
बीती रात सुलगते देखी हमने वहीं दुकाने कुछ।

मोटी सुई और पक्का धागा घर में हो तो ले आओ,
इसकी- उसकी और उसकी भी सिल दो आज ज़ुबाने कुछ।

2 Comments:

Anonymous said...

सुन्दर कविता...सुंदर भाव..बधाई!

Unknown said...

Bhavpravan aur sunder samyaik kavita hai. kavi ko is rachna ke liye badhai.

Dr. Ajay Pathak, Bilaspur, Chhattisgarh

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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