July 17, 2009

इस अंक के लेखक

रामहृदय तिवारी
छत्तीसगढ़ के लोक सांस्कृतिक मंचों से जुड़े रामहृदय तिवारी का जन्म 16 सितंबर 1943 को ग्राम उरइहा में हुआ। एमए हिन्दी की शिक्षा के बाद वे रंगमंच एवं दृश्य श्रव्य माध्यमों में निर्देशन के साथ लोकरंग अर्जुन्दा के माध्यम से लोककला के  संरक्षण संवर्धन की दिशा में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के नगरों, शहरों, गांवों के अतिरिक्त दिल्ली में हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी लोकमंच की प्रस्तुति दी इसके साथ उन्होंने विडियो फिल्म, टेली प्ले, टेलीफिल्म, डाक्यूमेंट्री फिल्म एवं एलबम का निर्देशन भी किया। वर्तमान में वे अध्ययन व लेखन के साथ त्रैमासिक पत्रिका सर्जना का संपादन कर रहे हैं। पता- न्यू आदर्शनगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़) मोबाइल- 94252 57363, फोन- 0788-2326962.
हृषीकेश सुलभ
कथाकार, नाटककार, रंग-समीक्षक हृषीकेश सुलभ का जन्म 15 फरवरी सन् 1955 को बिहार के छपरा (अब सीवान) जनपद के लहेजी नामक गांव में हुआ। आरम्भिक शिक्षा गांव में हुई और  गांव के रंगमंच से ही
 रंगसंस्कार ग्रहण किया। विगत तीन दशकों से कथा-लेखन, नाट्य-लेखन, रंगकर्म के साथ सांस्कृतिक आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां प्रकाशित जिनका अंग्रेजी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद। रंगमंच से गहरे जुड़ाव के कारण कथा लेखन के साथ-साथ नाट्य लेखन की ओर उन्मुख हुए और भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध नाट्यशैली बिदेसिया की रंगयुक्तियों का आधुनिक हिन्दी रंगमंच के लिए पहली बार अपने नाट्यालेखों में सृजनात्मक प्रयोग किया। विगत कुछ वर्षों से कथादेश मासिक में रंगमंच पर नियमित लेखन। बंधा है काल, वधस्थल से छलांग और पत्थरकट- तीनों कथा संकलन एक जि़ल्द में 'तूती की आवाज' शीर्षक से तथा अमली (बिदेसिया शैली पर आधारित नाटक), माटीगाड़ी (शूद्रक रचित मृच्छकटिकम् की पुनर्रचना) और मैला आंचल (फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास का नाट्यांतर) एक जि़ल्द में 'तीन रंग नाटक' शीर्षक से प्रकाशित। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा मंचित नाटक बटोही नई प्रकाशित नाट्यरचना है। कथा संकलन वसंत के हत्यारे, रंगसमीक्षा की पुस्तक रंगमंच का जनतंत्र और नाटक धरती आबा शीघ्र प्रकाश्य।
पता- पीरमुहानी, मुस्लिम क़ब्रिस्तान के पास, कदमकुआं, पटना- 800003 मोबाइल- 09431072603. 
Email- hrishhikesh.sulabh@gmail.com
डॉ. बलदेव  
कवि, कथाकार और कला समीक्षक डॉ. बलदेव का जन्म 27 मई 1942 को छत्तीसगढ़ के जिला चांपा- जांजगीर के ग्राम नरियारा में हुआ है। शिक्षा- एमए, पीएचडी हिन्दी, डिप्लोमा इन असिमया। देश के लगभग सभी प्रमुख पत्र- पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित एवं चर्चित। प्रकाशित पुस्तकें- मुकुटधर पांडेय पर चार किताबें शामिल हैं - 1.लेखों का शोध संपादन, 2.प्रतिनिधि कविताओं का संपादन 3. समीक्षा ग्रंथ 4. गोधूली (कविता संग्रह)।  इसके अतिरिक्त विश्व प्रसिद्ध संगीत किताब, रायगढ़ में कत्थक के मूल लेखक, खिलना भूलकर (काव्य संग्रह), ढाई आखर (औपन्यासिक कृति) भगत की सीख (लंबी कहानी), धरती सबके महतारी (छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह), साहित्य वाचस्पति पं. लोचन प्रसाद पांडेय (समीक्षा ग्रंथ), रायगढ़ का सांस्कृतिक वैभव, डॉ. जे.आर. सोनी (व्यक्तित्व एवं कृतित्व)। उन्हें चक्रधर सम्मान, मुकुटधर पांडे सम्मान के साथ अनेक प्रमुख संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। वे कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।   पता- श्री शारदा साहित्य सदन, स्टेडियम के पीछे, रायगढ़।
मोबाइल- 98263 78186.
संजय द्विवेदी
 उत्तरप्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के एक गांव बतासपुर में जन्मे संजय द्विवेदी ने बीए की शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से बीजे, एमजे, एमसी की डिग्री माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से की। उन्होंने दैनिक भास्कर, स्वदेश, नवभारत, हरिभूमि आदि समाचार पत्रों में प्रमुख पदों पर कार्य किया। छत्तीसगढ़ के प्रथम सैटेलाइट चैनल जी-24 घंटे में एडिटर इन्पुट रहे। प्रमुख कृतियां- शावक (बाल कविता संग्रह - 1989),  यादें सुरेन्द्र प्रताप सिंह (संपादन - 1977), इस सूचना समर में (लेख संग्रह - 2003), मत पूछ हुआ क्या-क्या (लेख संग्रह - 2003), सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और उनकी पत्रकारिता (आलोचना - 2004), सुर्खियां (लेख संग्रह - 2007) कई पुरस्कार एवं सम्मान। संप्रति- अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय पता- प्रेस कॉम्पलेक्स, महाराणा प्रताप नगर, भोपाल, मप्र- 462001 मोबाइल - 09893598888.
Email- 123dwivedi@gmail.com
 राजेश उत्साही 
 30 अगस्त, 1958, मिसरोद, भोपाल, म.प्र. में पैदा हुए राजेश उत्साही ने राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र एवं हिंदी साहित्य में स्नातक, तथा समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर किया है। 26 साल तक मध्यप्रदेश की एकलव्य संस्था होशंगाबाद भोपाल से जुड़े रहे। बाल विज्ञान पत्रिका चकमक का सत्रह साल तक संपादन। स्रोत, संदर्भ, गुल्लक, पलाश, प्रारम्भ के संपादन से भी जुड़ा रहे। पता - अजीम प्रेमजी फाउंडेशन,134 दोद्दकनेल्ली, विप्रो कॉरपोरेट ऑफिस के पास, सरजापुर रोड, बंगलूर 560035
मोबाइल- 09611027788. Email- utsahi@gmail.com
कमलेश्वर साहू 
  26 नवम्बर 1965 को जन्मे कमलेश्वर साहू सशस्त्र पुलिस जैसे पेशे से जुड़े होने के बावजूद कविताएं लिखते हैं। देश की प्रमुख पत्र पत्रिकाओं जैसे पहल, पल प्रतिपल, नया ज्ञानोदय, समकालीन भारतीय साहित्य, वागर्थ, आकंठ, परस्पर, पाखी समकालीन जनमत, हंस, साक्षात्कार, अक्षरा, गंगा, उद्भावना, उत्तराद्र्ध, वसुधा, साहिती सारिका, अक्षर पर्व आदि में कविताओं का प्रकाशन।  कुछ कविताओं का अंग्रेजी, पंजाबी व बांग्ला में अनुवाद भी हुआ है। उनके तीन कविता संग्रह- बिरजू रिक्शावाला, यदि लिखने को कहा जाए, पानी का पता पूछ रही थी मछली प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान में वे नक्सलवाद पीडि़त प्रदेश छत्तीसगढ़ के सशस्त्र पुलिस में सहायक प्लाटून कमांडर के पद पर कार्यरत हैं। 
पता- 702, साकेत कालोनी, वार्ड-57, कातुलबोड पो.आ. एसएएफ लाइन, जिला दुर्ग (छ.ग.) मोबाइल- 09424109943, 09752390645.

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उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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