April 27, 2009

लिंकन वर्सेस केनेडी

लिंकन वर्सेस केनेडी
इतिहास कभी कभी कुछ ऐसी घटनाओं को एक दूसरे से जोड़ देता है कि हम दांतों तले उंगली दबाने को बाध्य हो जाते हैं। लिंकन और केनेडी के जीवन और मृत्यु से भी जुड़ी कुछ घटनाएं ऐसी हैं जो उन दोनों को एक दूसरे से कुछ इस तरह जोड़ देती हैं कि हम आश्चर्य से भर उठते हैं जैसे- दोनों की हत्या शुक्रवार को हुई और दोनों के सेक्रेटरी का नाम एक दूसरे के नाम पर था। इस तरह की कई घटनाएं हैं जो दोनों के जीवन में एक समान घटी और वह भी सौ साल का अंतर होने के बावजूद.....
- अब्राहम लिंकन कांग्रेस के लिए सन् 1846 में चुने गए।
- जॉन एफ केनेडी कांग्रेस के लिए सन् 1946 में चुने गए।
- अब्राहम लिंकन सन् 1860 में राष्ट्रपति बने।
- जॉन एफ केनेडी सन् 1960 में राष्ट्रपति बने।
- दोनों ही सामाजिक अधिकारों (सीविल राईट्स) के विषय में चिंतित थे।
- दोनों की पत्नियों ने व्हाईट हाऊस में अपने बच्चों को खो दिया।
- दोनों राष्ट्रपतियों की हत्या शुक्रवार को की गई।
- दोनों ही राष्ट्रपतियों को सिर पर गोली मारी गई।
अब कुछ अद्भूत...
- लिंकन के सेक्रेटरी का नाम केनेडी था
- केनेडी के सेक्रेटरी का नाम लिंकन था।
- दोनों राष्ट्रपतियों की हत्या साउथ अमेरीकनों ने की।
- दोनों की हत्या के बाद जॉनसन नाम के व्यक्ति राष्ट्रपति चुने गए।
- लिंकन के बाद राष्ट्रपति बने एन्ड़्र्यू जॉनसन का जन्म 1808 में हुआ था।
- केनेडी के बाद राष्ट्रपति बने लिंडन जॉनसन का जन्म 1908 में हुआ था।
- लिंकन के हत्यारे जॉन विल्क्स बूथ (John Wilkes Booth) का जन्म 1839 को हुआ था।
- केनेडी के हत्यारे ली हार्वे ऑस्वल्ड (Lee Harvey Oswald) का जन्म 1939 को हुआ था। इन दोनों के नाम में तीन- तीन शब्द थे और उनमें 15 वर्ण थे।
अब दिल थाम कर बैठिए!
- लिंकन की हत्या फोर्ड नाम के थियेटर में हुई थी और केनेडी की हत्या फोर्ड कंपनी की बनाई लिंकन कार में हुई थी।
- लिंकन के हत्यारे ने उनकी हत्या थियेटर में की और माल गोदाम में जाकर छिप गया, दूसरी ओर केनेडी के हत्यारे ने माल गोदाम से उनकी हत्या की और थियेटर में जाकर छिप गया।
-दोनों हत्यारे मुकदमें से पहले ही मारे गए।
कुछ और रोचक...
लिंकन की हत्या के एक सप्ताह पूर्व वे मोनरो मैरीलैंड में थे।
और मजेदार बात ये है कि केनेडी अपनी हत्या के एक सप्ताह पहले मैरीलीन मोनरो के साथ थे।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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