February 25, 2009

क्या खूब कही

फुटबाल प्रेमी तोता
वाद विवाद के चलते मैच में बाधा पडऩा आम बात है लेकिन तोते की आवाज के चलते मैच रूक जाना आश्चर्य की बात है।
इरीन केरिगन नामक महिला अपने तोते मे-तू को लेकर हर्टफोर्डशायर रेंजर्स व हटफील्ड टाउन के बीच हुआ फुटबाल मैच देखने गईं। मैच देखने के लिए उसने ग्राउंड के बेहद करीब का सीट चुनी। जैसे ही रेफरी की सीटी बजती, मे-तू भी बिल्कुल उसी तरह सीटी बजा देता था। खिलाड़ी रेफरी की तरह बजने वाली सीटी की आवाज सुन खेल बंद कर खड़े हो जाते थे। ऐसा कई बार हुआ।
रैफरी गैरी बेली ने कहा कि मैं तो आश्चर्यचकित था मैंने पहले कभी नहीं देखा। महिला ग्राउंड के नजदीक ही बैठी हुई थी। जैसे ही मैं सीटी बजाता, तोता भी हू-ब-बू वैसी ही आवाज निकालता और खिलाड़ी रुक जाते। इतना ही नहीं मे-तू खिलाडिय़ों के अच्छे प्रदर्शन पर उन्हें प्रेटी ब्वाय कहकर उत्साहित भी करता था। केरिगन का कहना है कि उसे फुटबाल काफी पसंद है जिसका वह भरपूर लुत्फ उठाता है। हारकर मुझे उस महिला को तोते को बाहर ले जाने के लिए कहना पड़ा।
तैरने वाली कार में फिशिंग
अक्सर आपने लोगों को नाव में बैठकर मछली पकड़ते देखा होगा। लेकिन अगर कोई शख्स तैरने वाली कार पर बैठ कर झील या नदी के बीच में जाकर मछली मारता है तो आपको सुनने में अजीब जरूर लग सकता है। चीन में एक शख्स ऐसा है जिसने फिशिंग के लिए खास तौर पर तैरने वाली एक कार ही बना डाली है।
हेबे प्रांत के क्विनान शहर के वांग होंगजुन ने तेरह वर्ष में इस कार को तैयार किया है। कुल एक लाख पौंड में यह कार तैयार भी हो गई। वांग की कार पानी के अलावा सडक़ पर भी सरपट दौड़ती है। लेकिन वांग अपने इस आविष्कार को खुद तक सीमित नहीं रखना चाहते। इसलिए वांग कार की मार्केटिंग के लिए निवेशक खोज रहे हैं ताकि वो इसे लोगों तक पहुंचा सके। वांग ने बताया कि वह अक्सर इस कार से मछली पकडऩे जाते हैं। वह इस कार से अपने बेटे के साथ दस मील तक की समुद्री यात्रा भी कर चुके हैं।
पानी और जमीन पर चलने वाली वांग की एम्फी कार रिमोट का बटन दबाते ही वाटरप्रूफ हो जाती है। कार आराम से पानी में तैर सके इसके लिए इसमें विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि वांग ने इस खास तकनीक और कार की मशीनी संरचना को उजागर करने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि कार का एक-एक हिस्सा उनके हाथ का बना है।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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