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Nov 5, 2026

उदंती.com, नवम्बर- 2026

वर्ष - 19, अंक – 4

दीपक की लौ में एक सादगी है,

वह अँधेरे से लड़ती एक जिंदगी है।

 खुद को जलाकर जो राह दिखाए,

 सच्ची सेवा तो बस उसी की बंदगी है।

                            -भवानी प्रसाद मिश्र

इस अंक में

अनकहीः पर्व- त्योहार पर बढ़ता बाजार का शिकंजा -डॉ.रत्ना वर्मा

जलवायु परिवर्तनः इस साल ठंड कैसी होगी? - धीरज चतुर्वेदी

कविताः समंदर यूँ ही खारा नहीं हुआ - अर्चना अनुपम

आलेखः चितेरे हैं हम... - डॉ. महेश परिमल

पर्व- संस्कृतिः लुप्त होते लोकगीत - जेन्नी शबनम

आलेखः प्रकृति की मूक शिक्षा - मीरा गोयल

आपदाः अपनी बर्बादी का मुआवज़ा चाहता है नेपाल - प्रमोद भार्गव

लघुकथाः  पोर्टर  - भीकम सिंह

प्रकृतिः टाइडपूलिंग का मनोरम संसार - डॉ. रमाकांत गुप्ता

कविताः प्रवाह के पार - अनीता सैनी

स्वास्थ्यः ...प्लास्टिक के उपयोग को रोकना होगा -स्रोत फीचर्स

व्यंग्यः आओ शिकायत करें - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

लघुकथाः आर्द्रता - सन्तोष सुपेकर

लघुकथाएँ - 1.जन्म दिन, 2. बेटी का क़द, 3.अंतिम पंक्ति के... - आनन्द हर्षुल

दो कविताएँः 1. संस्कार, 2. बड़े बुजुर्ग  - डॉ. प्रगति गुप्ता

कहानी: कुकी  - शुभ्रा ओझा

लघुकथाः जयजयवन्ती - अन्तरा करवडे

किताबेंः संघर्षमय जीवन का दस्तावेज - प्रो. अश्विनी केशरवानी

दो कविताएँ- 1. हे पुरुष!, 2. खंडित मूर्तियाँ - डॉ .अंजुल चौहान

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