March 08, 2020

मलाल

मलाल
-ओमम्प्रकाश क्षत्रिय
गाँव वाले लड़ने आ सकते हैं। लड़की को क्यों मारा? क्या, तुम्हें मारने का अधिकार है। पिताजी पुलिस में रिपोर्ट कर सकते हैं। शर्म नहीं आती। एक छोटी लड़की का मारते हुए।’
यही सोच कर मोहनलाल का सिर फटा जा रहा था।
क्या करे, गलती तो हो गई। जो होगा देखा जाएगा,’ उन्होंने दिमाग को एक झटका दिया। मगर, दिल कहाँ मानता है। वह अपनी तरह सोच रहा था।
उस मासूम को नहीं मारना चाहिए था। हाँ, मगर मैं क्या करता ? मैंने कक्षा में अनुशासन बनाए रखने के लिए उसे कई बार डाँटा- फटकारा था। वह मान हीं नहीं रही थी। उस के देखादेखी दूसरे छात्र भी धमाल कर रहे थे। इसलिए मुझे ऐसा कदम उठाना पड़ा।’
क्या मारना जरूरी था। तूझे नहीं मालूम कि मारना दण्डनीय अपराध है। इसके लिए तेरी नौकरी भी जा सकती है। तुझे सजा हो सकती है।’
तो क्या करता? उसे धमाल करने देता। कक्षा में शांति बनाए रखकर पढ़ाना जरूरी है। वह पढ़ नहीं रही थी। दूसरे को भी पढ़ने नहीं दे रही थी। उसे पाँच बार समझाया। मत कर। मत कर। नहीं मानी तो गुस्सा आ गया। बस गुस्से में एक धौल जमा दिया।’
 ‘उसे बाद में पुचकार लेना था।’ कैसे पुचकार लेता। वह मार खाते ही घर भाग गई थी। ‘
तब तो भुगतना पड़ेगा।’ यह सोचते हुए वह विद्यालय पहुँच गया। मगर, जैसा उसने सोचा था वैसा कुछ नहीं था। विद्यालय को ताला बंद करने के लिए ग्रामीण नहीं आए हुए थे। लड़की के पिताजी कहीं नजर नहीं आ रहे थे। उन्होंने पुलिस रिपोर्ट की होती तो गाँव में खबर हो जाती। ऐसी कोई खबर नहीं थी।
तभी लड़की दूर से आती दिखाई दी। उस की धड़कन बढ़ गई। लड़की ने पास आते ही मोहनलाल के चरणस्पर्श करते हुए कहा, ’ सर ! आज तो मैं सभी काम करके लाई हूँ। अब तो नहीं मारोगे ना? ’ कहते हुए उसने मोहन सर को हाँ में गर्दन हिलाते देखा और कक्षा में चली गई।
मगर, मोहनलाल की निगाहें कुछ खोजते हुए खिड़की के बाहर चली गई। जहाँ कौवे से मार खाने के बाद पेड़ पर चहचहाती और उछलकूद करती चिड़िया अपना नीड़ बना रही थी।

सम्पर्कः पोस्ट ऑफिस के पास , रतनगढ़ – 458226 (मप्र) जिला- नीमच
                                -----------------------------------------------------------
मोतियाबिंद
-श्याम सुन्दर अग्रवाल
रात को अचानक सात वर्षीय बबलू पता नहीं कैसे बेहोश हो गया। दस बज गए थे। नए शहर में मिश्रा जी को डॉक्टरों के बारे में न जानकारी थी, न ही पास में पैसे। दो माह से तनख्वाह भी तो नहीं मिली थी, पिछले दफ्तर ने सर्टिफिकेट जो नहीं भेजा था।
श्रीमती जी का तो बुरा हाल था, मिश्रा जी भी घबरा गए। करें तो क्या करें। मोहल्ले में किसी से मेलजोल भी नहीं बढ़ाया। वे बहुत ऊँचे पद पर नहीं थे, फिर भी मोहल्ला उन्हें अपने स्तर का नहीं लगा। ट्रांसफर के बाद अच्छे मोहल्ले में मकान मिला नहीं, सो मजबूरी में एक बार यहीं ले लिया। पिछले माह ही पड़ोस का रामबिलास आया और बोला, ‘रिश्तेदार आए हैं, गैस खत्म हो गई… सिलेंडर है? तो…।’ जान न पहचान, कैसे दे देते सिलेंडर? जवाब दे दिया। फिर ‘बेटी की शादी  है’ के नाम पर बार-बार कुछ-न-कुछ माँगने आते रहे। श्रीमती जी हर बार गोलमोल-सा जवाब देती रहीं।
मिश्रा जी ने जल्दी में स्कूटर बाहर निकाला, मगर वह भी ऐन मौके पर जवाब दे गया। बहुत कोशिश की लेकिन स्कूटर-टस-से-मस नहीं हुआ। ‘क्या बात हो गई, मिश्रा जी?’ अचानक रामविलास के बोल कानों में पड़े।
उनकी श्रीमती जी ने घबराहट में सारी स्थिति बयान की।
रामबिलास ने जल्दी -से अपना स्कूटर निकाला। बबलू और मिश्राजी को पीछे बिठाया और अस्पताल की ओर चल दिया। समय से उपचार होने से बबलू अगले दिन ही ठीक हो गया।
मिश्रा जी व उनकी पत्नी रामबिलास से आँख नहीं मिला पा रहे थे, ‘हम तो आपके अपने भी न थे, फिर भी आपने पैसे भी दिए और सारी रात अस्पताल में भी रहे…।’
पड़ोसी भी अपने ही होते है…और अपने ऊपर से थोड़ा न गिरते हैं, जरूरतों के वक्त… और आँखों में मोतियाबिंद न हो, तो जल्दी पहचाने जाते हैं।’ रामबिलास ने मन ही बात कह ही दी।

मोबा-98885-36437

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष