June 05, 2019

दुनिया में प्लास्टिक घटाने की कोशिश

नियम कानूनः
दुनिया में 
प्लास्टिक घटाने
की कोशिश
दुनिया में प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करने को लेकर सजगता बढ़ी है. कई देशों ने प्लास्टिक की ब्रिकी पर रोक लगाने के लिए कई नियम भी बनाए हैं. आइए देखें कहाँ क्या हो रहा है?
खरीदारी के वक्त
यूरोप में प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल को लेकर आम लोगों के रुख में बदलाव आया है। डेनमार्क, लक्जमबर्ग जैसे देशों में इनके इस्तेमाल पर कर लगाना शुरू कर दिया है। तो वहीं जर्मनी के सुपरमार्केट प्लास्टिक बैग को तेजी से खत्म करने की राह पर है। ये सुपरमार्केट बार-बार इस्तेमाल किए जा सकने वाले थैलों को बढ़ावा दे रहे हैं।
एक कदम आगे
केन्या प्लास्टिक बैगों को लेकर एक कदम और आगे है। केन्या ने साल 2017 में प्लास्टिक बैग के उत्पादन और बिक्री के खिलाफ कानून लागू किया। जिस वक्त यह कानून लागू किया गया था, उस वक्त हर माह केन्या में लगभग 2.4 करोड़ बैग का इस्तेमाल होता था। लेकिन आज अगर कोई इस कानून का तोड़ता है ,तो उसे चार साल की कैद या 38 हजार डॉलर का जुर्माना हो सकता है।
जिम्बाब्वे में मुहिम
यहाँ भी पैकेजिंग नीतियों में बदलाव किया गया। जिम्बॉब्वे ने फॉस्टफूडपैकेजिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले स्टायरोफॉमकंटेनर के इस्तेमाल को गैर कानूनी घोषित किया ताकि कागज या पर्यावरण के अनुकूल बनाये जाने कंटेनरों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिल सके। इस कानून के बाद अब दुकानदार, उपभोक्ताओं को दुकानों में ही बैठकर खाना खाने के लिए प्रेरित करते हैं।
समुद्र की गंदगी
स्कॉटलैंड सरकार ने देश में प्लास्टिक से बने ईयरबड के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की है। ये ईयरबड समंदर की गंदगी का एक बड़ा कारण है। ईयरबड्स को आमतौर पर टॉयलेट में फ्लश कर दिया जाता है जिसके चलते ये समंदर में पहुँच जाते हैं। हाक्लाँकि अब अन्य उत्पादों को इस्तेमाल करने पर विमर्श जारी है।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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