November 17, 2018

एक दीपक तुम जलाना

एक दीपक तुम जलाना
रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

काल की गहरी निशा है
दर्द भीगी हर दिशा है।
साथ तुम मेरा निभाना
नहीं पथ में छोड़ जाना।
छोड़ दे जब साथ दुनिया
कंठ  से मुझको लगाना 
एक दीपक तुम जलाना।।

गहन है मन का अँधेरा 
दूर मीलों है सवेरा।
कारवाँ  लूटा किसी ने
नफ़रतों ने प्यार घेरा ।
यहाँ अंधों में  नगर  में   
क्या इन्हें दर्पण दिखाना।
एक दीपक तुम जलाना।।

एक अकेली स्फुलिंग थी
दावानल बन वह फैली।
थी ऋचा-सी पूत धारा
ईर्ष्या-तपी,  हुई मैली।
कालरात्रि का  है पहरा
ज्योति बनकर पथ दिखाना।
एक दीपक तुम जलाना।।

सम्पर्कः सी -1702, जे एम अरोमा , सेक्टर-75, नोएडा, 201301 ( उत्तर प्रदेश)

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