October 22, 2013

प्रेरक

प्रयास करते रहो
पाब्लो पिकासो ने कभी कहा था, ईश्वर बहुत अजीब कलाकार है। उसने जिराफ़ बनाया, हाथी भी, और बिल्ली भी। उसकी कोई ख़ास शैली नहीं है। वह हमेशा कुछ अलग करने का प्रयास करता रहता है।
जब आप अपने सपनों को हकीकत का जामा पहनाने की कोशिश करते हैं तो शुरुआत में आपको कभी डर भी लगता है। आप सोचते हैं कि आपको नियम-कायदे से चलना चाहिए। लेकिन हम सभी जब इतनी अलग-अलग तरह से ज़िन्दगी बिता रहें हों तो ऐसे में नियम-कायदों की परवाह कौन करे! यदि ईश्वर ने जिराफ़, हाथी, और बिल्ली बनाए है तो हम भी उसकी कोशिशों से सीख ले सकते हैं। हम किसी रीति या नियम पर क्यों कर चलें!
यह तो सच है कि नियमों का पालन करने से हम उन गलतियों को दोहराने से बच जाते हैं जो असंख्य लोग हमसे भी पहले करते आये हैं ; लेकिन इन्हीं नियमों के कारण ही हमें उन सारी बातों को भी दोहराना पड़ता है; जो लोग पहले ही करके देख चुके हैं।
निश्चिंत रहिए। दुनिया पर यकीन कीजिए और आपको राह में आश्चर्य देखने को मिलेंगे। संत पॉल ने कहा था, 'ईश्वर ने जगत् के मूर्खों को चुन लिया है  कि ज्ञानियों को लज्जित करे; और ईश्वर ने जगत् के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्जित करे´। बुद्धिमान जन जानते हैं कि कुछ बातें अनचाहे ही बार-बार होती रहतीं हैं। वे उन्हीं संकटों और समस्याओं का सामना करते रहते हैं ,जिनसे वे पहले भी जूझ चुके हैं। यह जानकर वे दु:खी भी हो जाते हैं। उन्हें लगने लगता है कि वे आगे नहीं बढ़ पाएँगे; क्योंकि उनकी राह में वही दिक्कतें फिर से आकर खड़ीं हो गईं।
'मैं इन कठिनाइयों से पहले भी गुज़र चुका हूँ´, वे अपने ह्रदय से यह दुखड़ा रोते हैं।
'सो तो है´, उनका ह्रदय उत्तर देता है, 'लेकिन तुमने अभी तक उन पर विजय नहीं पाई है।´
लेकिन बुद्धिमान् जन यह भी जानते हैं कि सृष्टि में दोहराव व्यर्थ ही नहीं होता। दोहराव बार-बार यह सबक सिखाने के लिए सामने आता है कि अभी कुछ सीखना बाकी रह गया है। बार-बार सामने आती कठिनाइयाँ हर बार एक नया समाधान चाहतीं हैं। जो व्यक्ति बार-बार असफल हो रहा हो, उसे चाहिए कि वह इसे दोष के रूप में न ले, बल्कि इसे गहन आत्मबोध के राह की सीढ़ी समझे।
थॉमस वाटसन ने कभी इसे इस तरह कहा था, 'आप मुझसे सफलता का फॉर्मूला जानना चाहते हैं? यह बहुत ही सरल है। अपनी असफलता की दर दुगनी कर दीजिये´। (हिन्दी ज़ेन से)

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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