November 24, 2012

हाइकु



यादें
- डॉ. भगवतशरण अग्रवाल
1
घूमता मन
बचपन की घनी
अमराई में।
2
यादें ही यादें
आँखें बन्द की तो क्या !
चित्र उभरे।
3
नींद में मेरी
आती हैं परिएँ क्यों
बचपन की।
4
मेरे मन की
विस्तृत नभ गंगा
चित्र तुम्हारा।
5
वर्षों पहले
तुमसे कीं जो बातें
आज भी ताजी।
6
ऐसे बरसी
बदली आज, भूले
याद आ गए।
7
आहट आते
उड़तीं तितलियाँ
मेरे मन में।
8
गुलाबी शीत
आलस्य-भरी हवा
यादों की शाम।
9
टहुके मोर
याद आ गया कौन
इतनी भोर?
10
भोर के साथ
महक किसकी थी
पागल मन!
11
रेत पै बस
लिखूँ मिटाऊँ नाम
और क्या करूँ ?
12
भूलूँगा कैसे ?
घरौंदे बनाए जो
मैंने-तुमने ।
13
मत कुरेदो
स्मृतियों के ढेर को-
ज्वालामुखी है।
14
यादों के लम्हें
कड़वा-मीठा स्वाद
दर्दीला गीत।
15
घटा-सी घिरी
कमलों की सुगन्ध
वह आए क्या?
16
ओस में भीगी
कमल की पंखुरी
ऐसी थीं कभी!
17
अकेलापन
रेगिस्तान-सा फैला
चमके यादें।
18
वर्षा की हवा
यादों के पन्ने लौट
किसे ढूँढ़ती?
19
सिर्फ स्मृतियाँ
निपट एकान्त के
क्षणों में साथी।
20
उल्टे-पलटे
रात रानी की गन्ध
यादों के पन्ने।
21
हर मोड़ पे
यादों के झरोखे से
तुम्हीं झाँकती।
22
भूल जाऊँगा
रतजगों से कहो
पीछा छोड़ दें।
23
हर कदम
आहटें, परछाईयाँ
रीते मन की।
24
आज भी ताज़ी
यौवन के फूलों  में
यादों की गन्ध।
25
अकेलापन
मन-दर्पण यादें-
चन्दन वन।
26
कुलबुलाते
अँखियों में सपने
मीठी यादों के।       
लेखक के बारे में: जन्म 23 फरवरी, 1930, फतेहगंज पूर्वी, जिला- बरेली, उ. प्र.। शिक्षा- एम ए पी-एच डी।  छत्तीसगढ़ राज्य शासन एवं रायपुर विश्वविद्यालय द्वारा कुशाभाई ठाकरे पत्रकारिता और जन-संचार सृजन-सम्मान-2005, गुजरात राज्य हिन्दी अकादमी सम्मान। पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर-इन-चार्ज, गुजरात विश्वविद्यालय। रचनाएँ: शाश्वत क्षितिज-1985, हिन्दी का पहला हाइकु संग्रह- टुकड़े-टुकड़े आकाश-1987, हूं भी नहीं भी (हाइकु संग्रह), अर्घ्य (18 भारतीय और 7 विदेशी भाषाओं में देवनागरी लिप्यन्तर सहित हाइकु संग्रह 1995, अकह (हाइकु एव काव्य-संग्रह), सबरस, इन्द्रधनुष अस्ति- नास्ति (हाइकु एव काव्य-संग्रह), चार अन्य काव्य संग्रह, माटी तेरे रूप अनेक (कहानी-संग्रह, हँसना मना है (हास्य-व्यंग्य), शोध समीक्षा, सम्पादन-संग्रह और हाइकु भारती त्रैमाइक का सम्पादन, गुजरात साहित्य अकादमी के तीन ग्रन्थों का सम्पादन। हाइकु विश्वकोश (हाइकु काव्य पर प्रथम विश्वकोश)   
  सम्पर्क: ए-2 अरुणोदय  बंगलोज , चामुण्डा माता मन्दिर की गली झाडेश्वर रोड भरुच- 392011,
  मोबाइल- 09998965772,  E-mail- drbhagwatsaranagarwala@gmail.com

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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