January 31, 2012

दुनिया की सबसे छोटी महिला

नागपुर निवासी ज्योति अमगे 62.8 सेंटीमीटर यानी 24.7 इंच की ऊंचाई के साथ दुनिया की सबसे छोटी महिला घोषित की गई हैं। ज्योति की जिंदगी में अठारहवीं सालगिरह एक खास मायने लेकर आई है। उनका बरसों पुराना सपना पूरा हो रहा है और वे गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स में शामिल हो रही हैं। ज्योति अमगे जैसे ही अठारह बरस की हुईं गिनीज बुक ने उनका कद नापा और उनके जन्मदिन की बधाई देते हुए उन्हें विश्व की सबसे छोटे कद की महिला का खिताब दे दिया। लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने ज्योति को पहले ही दुनिया की सबसे छोटी महिला के खिताब से नवाजा था।

गिनीज बुक की टीम आने से पहले ही ज्योति के घर में खुशियों का माहौल छा गया था। वे सज-संवर कर तैयार बैठी थीं, एक इतिहास रचने के लिए। गिनीज बुक निर्णायक रॉब मलॉय और वॉकहार्ट के डॉक्टर मनोज पहुकर ने उसका कद नापा और घोषित किया कि ज्योति अमगे दुनिया की सबसे छोटे कद की महिला हैं, तो उनकी आंखों से आंसुओं की धार बह निकली। वो खुद को दुनिया की सबसे छोटी महिला के साथ सबसे खुश महिला भी महसूस कर रही थीं।

घूस मांगी तो, सपेरे ने छोड़ दिए सांप!
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के तहसील दफ्तर में उस समय हड़कंप मच गया जब नाराज, घूसखोरी से परेशान एक सपेरे ने सरकारी बाबुओं की नींद उड़ा दी उनके दफ्तर में 20 सांप छोड़ करके। सपेरे ने अपने सांपों को रखने के लिए सरकार से जमीन मांगी थी लेकिन जमीन आबंटन होने के बाद भी सरकारी बाबू उससे घूस मांग रहे थे। गुस्साए सपेरे ने सरकारी कार्यालय में एक साथ कई सांप छोड़ दिये। दफ्तर के कर्मचारियों ने किसी तरह कुर्सी-मेज पर चढ़कर जान बचाई। बाद में एसडीएम ने हक्कुलु नाम के इस सपेरे को जल्द ही जमीन आवंटित करने का आदेश दिया सात ही सांप छोडऩे पर उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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