एक गर्म दोपहरी के दिन एक किसान बांसों के झुरमुट में बनी हुई जेन गुरु की कुटिया के पास रुका। उसने गुरु को एक वृक्ष ने नीचे बैठे देखा।
'खेती की हालत बहुत बुरी है। मुझे डर है कि इस साल गुजारा नहीं होगा', किसान ने चिंतित स्वर में कहा।
'तुम्हें चाहिए कि तुम पत्थरों को पानी दो', जेन गुरु ने कहा।
किसान ने जेन गुरु से इस बात का अर्थ पूछा और गुरु ने उसे यह कहानी सुनाई- एक किसान किसी जेन गुरु की कुटिया के पास से गुजरा और उसने देखा कि गुरु एक बाल्टी में पानी ले जा रहे थे। किसान ने उनसे पूछा कि वे पानी कहाँ ले जा रहे हैं। गुरु ने किसान को बताया कि वे पत्थरों को पानी देते हैं ताकि एक दिन उनपर वृक्ष उगें। किसान को इस बात पर बहुत आश्चर्य हुआ और वह आदर प्रदर्शित करते हुए झटपट वहां से मुस्कुराते हुए चला गया। जेन गुरु प्रतिदिन पत्थरों को पानी देते रहे और कुछ दिनों में पत्थरों पर काई उग आई। काई में बीज आ गिरे और अंकुरित हो गए।
'क्या यह कहानी सच है?', किसान ने आशामिश्रित कौतूहल से कहा।
जेन गुरु ने उस वृक्ष की ओर इशारा किया जिसके नीचे वह बैठे थे। किसान भी वहीं बैठ उस कहानी पर मनन करने लगा। www.hindizen.com से )
Wednesday, December 28, 2011
पत्थर सींचना
प्रस्तुतकर्ता www.udanti.com पर 2:22 PM
लेबल: प्रेरक कथा/ दिसम्बर 2011
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