December 28, 2011

देव साहब और उनकी नायिकाएं...

देवानंद ने कई नई अभिनेत्रियों को फिल्म दुनिया में ब्रेक दिया। उनके साथ काम करने वाली सफल नायिकाओं की लंबी फेहरिस्त है। फिल्मों में अभिनय के दौरान उनके साथ बिताए पलों को भीगी पलकों से याद कर रही हैं उनकी ये नायिकाएं-

वे मेरे पहले हीरो थे: वहीदा रहमान
देव के निधन से मुझे धक्का लगा। देव कई कारणों से विशेष थे। मैंने अपनी पहली हिंदी फिल्म सीआईडी उनके साथ की। वे न केवल मेरे पहले हीरो थे बल्कि मैंने सात फिल्में उनके साथ कीं। इनमें से तीन नवकेतन बैनर की थीं जिसे देव ने शुरू किया था। हमने सीआईडी, गाइड, कालाबाजार जैसी कुछ शानदार फिल्में कीं। गाइड के लिए मैंने उन्हें न कह दिया था लेकिन वे मुझे मनाते रहे और आज मैं उनका शुक्रिया अदा करती हूं। मुझे याद है जब हमारी फिल्म हिट होती तो हम खुश होते लेकिन कोई फिल्म अच्छा नहीं कर पाती तो मैं उदास हो जाती। तब देव मुझसे कहते, कभी पीछे नहीं देखना। जो हो गया सो हो गया। जब मैं पहली बार उनसे मिली, मैंने उन्हें देव साहब कह कर बुलाया। उन्होंने कहा, मुझे देव कह कर बुलाओ। मैं नई-नई आई थी इसलिए मेरे लिए ऐसा कहना संभव नहीं था लेकिन जब तक मैं उन्हें देव कह कर नहीं बुलाती तब तक वे मेरी बात सुनते ही नहीं थे। वे फिल्म इंडस्ट्री में सबसे बेहतरीन इंसान थे। उन्होंने कभी किसी के बारे में बुरा नहीं कहा।
सेट पर वे सबसे पहले पहुंचते थे: हेमा मालिनी
देव साहब और मैंने जॉनी मेरा नाम की। मैं नई- नई आई थी और वे बहुत बड़े स्टार थे लेकिन उन्होंने मुझे ऐसा कभी महसूस नहीं होने दिया। केबल कार पर गीत वादा तो निभाया... बिहार के राजगीर में फिल्माया गया था। भीड़ बेकाबू हो रही थी। उन्होंने मेरा बहुत ख्याल रखा। वे आशावादी थे। सैट पर पहुंचने वालों में वे सबसे पहले होते थे। उनके हाथ में छड़ी रहती थी। मैंने पूछा, आप यह छड़ी क्यों अपने साथ रखते हैं। उन्होंने कहा, यह उनके लिए है जो समय बर्बाद करते हैं। वे कभी थकते नहीं थे और जो उनके साथ कदम- ताल नहीं कर पाता था उसकी कभी प्रशंसा नहीं करते थे। उन्हें काम करते देखना किसी विटामिन टेबलेट खाने जैसा था।
मेरे लिए उन्होंने नियम तोड़ा: मुमताज
कोई भी देव साहब की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने भारतीय सिनेमा की धारा ही बदल दी। वे आइकॉन थे। जब मैंने हरे रामा हरे कृष्णा साइन की तो उन्होंने फिल्म उद्योग के नियम को तोड़ा। तब किसी कलाकार को एक समय में छह से अधिक फिल्म साइन करने की इजाजत नहीं थी। लेकिन देव साहब ने मुझसे कहा, तुम्हें बंबई से बाहर ले जाना मेरा काम है और वे मुझे पुलिस सुरक्षा में काठमांडू ले गए। फिल्म उद्योग ने कड़ा एतराज जताया और उन्होंने कहा, मैंने प्रोजेक्ट के लिए उसे साइन किया है और मैं शूटिंग के लिए उसे साथ लेकर जाऊंगा। मैं देखता हूं मुझे कौन रोकता है।
निर्णय लेना मैंने उनसे सीखा: जीनत अमान
देव साहब कभी थकते नहीं थे। अंत तक वे अपने किए में भरोसा रखते थे। उन्होंने पूरी लगन के साथ अपनी फिल्में बनाई। वे फ्लॉप से कभी नहीं डरते थे। अपने कैरियर में निर्भीक होकर निर्णय लेना मैंने उनसे ही सीखा।
उनके साथ काम करना टे्रन में सफर जैसा: आशा पारेख
देव साहब कभी खाली नहीं बैठते थे। वे हमेशा सक्रिय रहते थे, आशा यह करो, आशा वह करो, वहां खड़े मत रहो, जाओ, जाओ। वे कभी नहीं रूकते थे। उनके साथ काम करना जैसे किसी एक्सप्रेस ट्रेन में सफर करने जैसा था। यात्रा कठोर लेकिन आनंददायक होती थी। वे पूर्ण फिल्मकार थे। सांस लेते, खाते यहां तक की सोते में भी उनके सामने सिनेमा ही रहता था। वे बहुत ऊर्जावान थे। सचमुच दूसरा देव आनंद कभी नहीं हो सकता।
एक खूबसूरत शिष्टाचारी इंसान: वैजयंतीमाला
मैं पहली बार अमरदीप के सैट पर देव साहब से मिली। एक खूबसूरत शिष्टाचारी इंसान और हां, लंबे भी (हंसते हुए)। मेरे समय में मैं लंबी हीरोइन थी। मुझे अपने लिए एक लंबा हीरो ही चाहिए था और देव साहब सही समय पर आए। वे पढ़े- लिखे, शिक्षित, सुसंस्कृत और विद्वान थे। मैं मानती हूं कि सिनेमाई पौरूष की सही व्याख्या उन्होंने ही की।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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