May 10, 2011

मुसीबत में फँसे चोरों ने बुलाई पुलिस

आजतक आपने चोरों को पुलिस से भागने की खबरें पढ़ी और सुनी होंगी लेकिन पिछले दिनों दुनिया में कुछ ऐसे अजीबोगरीब घटनाएं हुई जिसमें चोर को मुसीबत में फंस जाने पर पुलिस की मदद लेनी पड़ी।
भारत की राजधानी दिल्ली के एक पॉश कालोनी में रहने वाले पति- पत्नी बाहर गए और अपने फ्लैट की चाबी नीचे रहने वाले पड़ोसी को देकर यह कह गए कि यदि देर हो गई तो हम रात में नहीं आएंगे अत: हमारे फ्लैट का ध्यान रखिएगा। पड़ोसी ने जब देखा कि रात 11 बजे तक भी वे नहीं लौंटे तो उसने अपने दोस्तों के साथ बालकनी से उनके फ्लैट में प्रवेश किया तथा घर के सारे कीमती सामान एक- एक करके नीचे दोस्तों को पकड़ाने लगा। टीवी, वीसीआर से लेकर कई कीमती समान उसने नीचे पहुंचा दिया लेकिन एक वजनी समान को उठाने में नाकाम होने पर दोस्तों को भी अंदर बुला लिया। इसी दौरान घर के मालिक वापस लौट आए। बाहर से उन्होंने देखा उनके घर की लाइट जल रही है तो वे चौंक गए और उन्होंने कालोनीवासियों को इकट्ठा कर लिया। जब भीतर चोरी कर रहे पड़ोसी को पता चला कि हम चारो तरफ से घिर चुके हैं तो वे घबरा गए और उन्होंने सोचा कि अगर दरवाजा खोला तो पिटाई निश्चित है अत: उन्हें एकमात्र उपाय सूझा और पुलिस को फोन करके बताया कि हम एक फ्लैट में चोरी करने घुसे हैं और बाहर कालोनी वाले इकट्ठा हो गए हैं। कृपया हमें बचाइए।
इसी तरह जर्मनी के बर्लिन शहर में दो नौजवान चोर एक व्यावसायिक इमारत में चोरी करने के उद्देश्य से घुस गए। जब वे दोनों लिफ्ट के जरिये ऊपर की मंजिल की तरफ जा रहे थे कि लिफ्ट अचानक खराब हो गई और वे उसमें फंस गए। दोनों घबरा गए। उन्होंने लिफ्ट से बाहर निकलने की हरसंभव कोशिश की, यहां तक कि एक ने तो अपना हाथ भी जख्मी कर लिया, लेकिन नाकाम रहे। आखिरकार, जब उन्हें अहसास हो गया कि अब बिना बाहरी मदद के यहाँ से निकलना असंभव है तब उन्होंने लिफ्ट के आपातकालीन फोन से पुलिस को अपने फंसे होने की सूचना दी और मदद की गुहार की। पुलिस ने उन्हें वहाँ से निकाल तो लिया लेकिन सच भी उगलवा लिया कि आखिर वे वहाँ क्या करने आये थे। बहरहाल, दोनों चोरी की कोशिश करने के जुर्म में पुलिस की गिरफ्त में हैं।
एक और घटना में विलमिंग्टन अमेरिका के चोर ने एक घर में घुसकर जम कर शराब पी लेकिन वापस जाने का रास्ता न ढूंढ पाया। इस कारण उसने मदद के लिए पुलिस को फोन किया। न्यूकैसल काउंटी पुलिस ने कहा, 44 वर्षीय जॉन फिंच जिस घर में चोरी के लिए घुसा था, वहां उसने पिछले साल अप्रैल महीने में भी चोरी की थी। लेकिन वह नहीं जानता था कि उस वाकये के बाद मालिक ने घर के ताले बदल दिए थे।
टैटू से सुलझा केस
आमिर खान की फिल्म गजनी तो आपने देखी ही होगी जिसमें आमिर अपनी याददाश्त की बीमारी के चलते पूरे शरीर में टैटू बनाकर अपने काम को अंजाम देते थे। ये तो हुई फिल्म की बात परंतु अमेरिका में एक ऐसा गजनी है जिसने अपने शरीर पर एक कत्ल की पूरी घटना का टैटू बनाया था।
अमेरिका की पुलिस पिछले सात साल से हत्या की एक गुत्थी सुलझाने में लगी हुई थी। इसी सिलसिले में केविन लॉयड नामक एक पुलिस अधिकारी जब एक टैटू वाले गैंग के सदस्यों के फोटो देख रहा था तभी उसे एक तस्वीर पर शक हुआ। दरअसल उस तस्वीर में एक लड़के के सीने पर जो टैटू बना था उससे सात साल पहले की गई हत्या के संबंध में बेहद ठोस जानकारी मिली। एंथनी गार्सिया नामक इस लड़के के सीने पर उसी शराब की दुकान का नक्शा बना था जहां सात साल पहले हत्या हुई थी। पुलिस ने जब उस लड़के से कठोरता से पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि उसी ने जॉन जूरेज नामक 23 वर्षीय लड़के की हत्या 23 जनवरी 2004 को की थी।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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