March 17, 2010

आपके पत्र

भूमाफिया युग में

धरती की प्यास बुझते हैं तालाब -राहुल कुमार सिंह का लेख आंखे खोलनेवाला है, लेकिन करें क्या इस भूमाफिय़ा युग में लालची लोग तालाबो को पाटकर भावन बनाने में लगे हैं। भूमिगत जल का दोहन करके नई मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। कुछ लोगों का लोभ आने वाले समय में एक-एक बूंद पानी के लिए तरसा देगा। सरकारें जन सामान्य के साथ नहीं हैं। बोतलबन्द पानी पीकर योजनाएं बनती रहेंगी और आम आदमी दो बूंद जल के लिए हलाकान रहेगा। इस तरह के लेख प्रकाशित करके आप पावन यज्ञ कर रही हैं। साहित्य खंड में 'खेलने के दिन' बहुत ही सधी हुई मार्मिक लघुकथा है।
- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
rdkamboj@gmail.com
बस्तर का प्रेम अद्भूत प्रेम
अद्भूत। बस यही एक शब्द है। अद्भूत संस्कृति, अद्भूत प्रशंसक, अद्भूत लेखनी। हरिहर वैष्णव का लेख 'जिनके लिए बस्तर के गांव स्वर्ग समान है' महज़ एक आलेख नहीं, पूरी आलेख सीरीज़ का विषय है। बस्तर के वनों से होता हुआ प्रेम का संदेश कहां-कहां तक पहुंच गया और अपनी अमिट छाप छोड़ गया, यह पढऩा- सुनना भी अपने आप में एक अद्भूत अनुभव है। लेखक को कोटिश: धन्यवाद। अनुरोध है कि वे विदेशों में बसे दिल से हिंदुस्तानी लोगों के बारे में भी विस्तार से परिचय दें।
- विवेक गुप्ता (भोपाल)
vivekbalkrishna@gmail.com
छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी
वैष्णव जी का लिखा बहुत ही शानदार लेख है। आंसू उनकी आंखों में भी आते हैं जिनको हम मशीनों का भाई- बहन मानते हैं। छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी का तो खैर क्या मुकाबला। कभी महसूस नहीं कर पाया लेकिन अपने पिता से सुनता रहा हूं।
- अजय शर्मा
व्यवस्था का खुलासा
उदंती का जनवरी-फरवरी अंक मिला। पढ़कर संतुष्टि होती है। अनकही में रक्षक के भेष में भक्षक के माध्यम से आपने आज की भ्रष्ट व्यवस्था का खुलासा किया है जो बहुत कुछ सोचने पर बाध्य करता है। बधाई।
- प्रतिमा चंद्राकर, रायपुर
pchandraker@yahoo.com
वसंत की चाह
डा.गीता गुप्त की वसंत की चाह एक सुंदर और रोचक रचना है पढ़कर अच्छा लगा।
उदंती
को धन्यवाद।
- सुरेश यादव
sureshyadav55@gmail.com
दिल को छूता संस्मरण
प्रताप सिंह राठौर द्वारा रचित एक सच्चे संत की पुण्य स्मृति पढ़ कर यह सोचने को बाध्य हो गया कि एक समय वह भी था जब स्वामी रामानंद जैसे सच्चे और ज्ञानी संत हमारे देश में पैदा होते थे, जो चुपचाप अपना कर्म किए जाते थे और एक आज का समय है जब इच्छाधारी जैसे ढोंगी बाबा हमारे देश के लिए कलंक बन गए हैं, जिनके कारनामों से हम लज्जित होते हैं, यह सोच कर कि धर्म और आस्था की पुण्य भूमि भारत में यह कैसा समय गया है। क्या सच्चे संत ऐसे ढोंगी बाबाओं के विरोध में आवाज बुलंद करेंगे और क्या इन सबको प्रश्रय देने वालों की जमीर जागेगी?
-मयंक पुष्कर, इंदौर . प्र.
pushkarm@gmail.com

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष