February 17, 2010

वाह भई वाह


ओवरटाइम
टिंगू: पहले तो सिर्फ रात को ही मच्छर काटते थे, अब तो दिन में भी काटने लगे हैं।
मिंकू: तूने ये रिसेशन के बारे में नहीं सुना क्या? पूरे वर्ल्ड में मंदी की मार ऐसी है कि इंसान तो क्या, अब मच्छरों को भी दिन-रात काम करना पड़ रहा है।
रिस्टार्ट
एक दिन एक मेकेनिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर, केमिकल इंजीनियर और एक कंप्यूटर इंजीनियर एक ही कार में शहर में घूम रहे थे, अचानक ही कार कुछ टूटने की आवाज़ के साथ बंद हो गई।
मेकेनिकल इंजीनियर ने कहा 'मुझे लगता हैं चेचिस राड टूट गई हैं '
केमिकल इंजीनियर ने कुछ सोचकर कहा 'मुझे लगता हैं, इंजन को पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है।
'इलेक्ट्रिक इंजीनियर बोला' कहीं स्पार्क हुआ होगा, कुछ गड़बड़ लगती है गाड़ी के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में।
'तीनों मुड़े पीछे बैठे कम्प्यूटर इंजीनियर की तरफ, और उससे पूछा- तुमको क्या लगता हैं।'
तो कंप्यूटर इंजीनियर ने कहा 'मुझे लगता हैं कि हम सभी को गाड़ी से बाहर निकल कर दोबारा अन्दर बैठ जाना चाहिऐ, ताकि गाड़ी रिस्टार्ट हो सके'

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष