October 22, 2009

वह आँसू नहीं खून बहाता है

जब दिल भर आता है या मन दुखी होता है तो आंखों में पानी आना स्वाभाविक है। लेकिन ऐसे कई अजीबो-गरीब किस्से सुनने को मिले हैं जैसे आंखों से चिट्टियों का निकलना, सुई निकलना आदि। जेम्स बांड अभिनीत 2006 की हालीवुड फिल्म कसीनो रायॅल में बांड के दुश्मन ली सीफ्री की बीमारी से तो आप अवगत ही होंगे। लेकिन वह तो हुई फिल्म की बात। आप को जानकर आश्चर्य होगा कि लंदन के केलविनो जब रोते हैं तब उनकी आंखों से आंसुओं की जगह खून बहता है। खून के यह आंसू किसी के मारने या डराने से नहीं बल्कि उसे एक घातक बीमारी है। एक ऐसी बीमारी जिसके कारणों का पता लगाने में डॉक्टर  अभी तक अक्षम है।
केलविनो के सहपाठियों ने तो उसे ताना मारते हुए कहा कि तुम पर भूत का साया है। केलविनों की आंखों से लगभग 1 घंटे तक खून रिसता है। केलविनो का कहना है कि जब मेरी आंखों से इस तरह से खून के आंसू आते हैं तो मेरी आंखो में एक अजीब तरह की जलन होती है।
केलविनो की इस बिमारी से व्यथित उनकी मां का कहना है कि मैं डॉक्टरों के पास जा-जाकर थक चुकी हूं लेकिन कोई भी डॉक्टर मेरे बेटे की इस बीमारी देखकर दूर भागता है। केलविनो की मां ने पूरी दुनिया से अपने बेटे को ठीक करने के लिए मदद मांगी है।
क्या बुत बन जाएगी शॉनी?
केलविनो की ही तरह शॉनी नैमक जो हड्डी से संबंधित फाइब्रॉयडिस्लेप्सिया ऑरीफिकेंस प्रोग्रेसिवा नाम की बीमारी से ग्रस्त है। शॉनी 13 साल की हैं और उनके शरीर पर छोटी सी चोट भी लग जाए तो एक एक्स्ट्रा हड्डी बन जाता है। शॉनी की मम्मी ने बताया कि शॉनी की बाजुएं मुड़ी हुई अवस्था में ही जम चुकी हैं। उसकी गर्दन और पीठ भी अकड़ चुकी है। शॉनी अपने हाथों से अपना मुंह भी नहीं धो पाती है। इसके बावजूद वह बहादुरी से नॉर्मल लाइफ जीने की कोशिश कर रही है। यह रहस्यमय बीमारी ऐसी है कि वह मांसपेशियों को हड्डियों में बदल देती है। इसका कोई इलाज भी नहीं है। धीरे- धीरे उसका पूरा शरीर इस तरह अकड़ जाएगा कि वह एक बुत बन जाएंगी।
शॉनी कहती हैं कि लोगों को पता नहीं है कि मुझे किसी भी तरह की चोट नहीं लगनी चाहिए, इसलिए मेरे दोस्त मुझे भीड़ में बचाते हुए चलते हैं। मैं क्लास से पांच मिनट पहले निकल जाती हूं, ताकि भीड़ की धक्कामुक्की से बच सकूं। इस बीमारी के समाधान के लिए ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी रिसर्च में चल रही है।
केलविनो और शॉनी की रहस्यमयी बीमारी दुनिया में अपनी सफलता का परचम लहरा रहे मेडिकल साइंस और कुशल डाक्टरों के लिए चुनौती बन चुकी है। देखना है कि इस चुनौती से वे कैसे सफल हो पाते हैं।
कुलदेवता की पूजा का पर्व मातर
दीपावली के तीसरे दिन छत्तीसगढ़ के अनेक हिस्सों में राऊतों द्वारा मनाया जाता है मातर। मातर या मातृपूजा कुलदेवता की पूजा का पर्व है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों एवं यादव जाति के लिए इस त्योहार का विशेष महत्व हैं। इस दिन वे अपने कुल देवता खोडऱहदेव जो कि लकड़ी से बनाया जाता है की पूजा करते हैं। राऊतों के लिए यह दिन नाचने गाने का भी दिन होता है। राऊत नाच की परंपरा ने आज छत्तीसगढ़ में महोत्सव का रूप ले लिया है, प्रति वर्ष यहां राऊत नाचा प्रतियोगिता का आयोजन भी होने लगा है। इस दिन वे अपनी पारस्परिक वेशभूषा में रंग-बिरंगे परिधानों से लैस होकर अपनी लाठियां भांजते हुए नृत्य करते हैं। नृत्य के दौरान उनके पैरों के लय की थिरकन देखते ही बनती है।

Labels:

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home