February 25, 2009

रंग बिरंगी दुनिया

प्रकृति की लीला...

पिछले माह अमरीका के केलिफोर्निया में एक 33 वर्षीय स्त्री ने एक साथ आठ बच्चों को जन्म देकर सबको चमत्कृत कर दिया। छह लडक़े और दो लड़कियां में से सभी बच्चे स्वस्थ हैं। इन बच्चों का वजन आधा किलो से लेकर डेढ़ किलो तक है। 46 डॉक्टरों की मदद से बच्चों को सीजेरियन ऑपरेशन करके निर्धारित समय से 9 सप्ताह पहले ही जन्म दिलवाना पड़ा क्योंकि आठ बच्चों के गर्भ में होने से मां का पेट इतना बड़ा हो गया था कि उसका जीवन ही संकट में पड़ गया था।

14 बच्चों की यह मां जरुर कोई जीवट महिला होगी जिसने एक साथ आठ बच्चों को अपने गर्भ में पालने का साहस किया। मीडिया जगत इस मां के बारे में अधिक से अधिक जानकारी इकठ्ठा करने में लगी रही और अंतत: उसने यह जानकारी हासिल कर ली कि नादिया सुलेमान नाम की इस महिला ने अपने एक दोस्त के शुक्राणुओं की मदद फर्टिलिटी ट्रीटमेंट से गर्भधारण किया था। इस तकनीक से मल्टीपल प्रेगनेन्सी की बहुत अधिक संभावना रहती है। गर्भकाल के दौरान ही महिला को सोनोग्राफी तथा अन्य मेडिकल जांच से आठ भ्रूण होने का पता चल गया था। लेकिन उसने सभी बच्चों को जन्म देने का निर्णय कर लिया। यद्यपि मीडिया की बहुत कोशिश के बाद भी उसने बच्चो के पिता के बारे में कोई भी जानकारी देने से इंकार कर दिया। उसने अपने इन आठ बच्चों के नाम रखे हैं- नोआह एंजल, सिस्टर मालियाह एंजल, इसियाह एंजल, नारियाल एंजल, जेरेमियाह एंजल, जोसियाह एंजल और मेकेय एंजल।

आश्चर्य तो यह है कि इस महिला के पहले से ही आठ साल के कम उम्र के छह: बच्चे और हैं उनमें से दो जुड़वा हैं। अब अपने 14 बच्चों को पालने के लिए नादिया ने इंटरनेट में लोगों से सहयोग की अपील की है। नाडिया अपने माता- पिता के साथ ही रहती है।

अमरीका में आठ बच्चे एक साथ पैदा होने की यह दूसरी घटना है। 10 वर्ष पहले भी अमरीका के टेक्सास राज्य में एक स्त्री ने आठ बच्चों को जन्म दिया था, जिनमें से एक बच्चे की मृत्यु हो गई थी, बाकी सात बच्चे अब 10 वर्ष के हो गए हैं। इससे पहले 1971 में आस्ट्रिया में एक और महिला ने 9 बच्चों को जन्म दिया था। जानकारी के अनुसार उनमें से संभवत: एक-दो ही जीवित बच पाए थे। प्रकृति की लीला अपरमपार है।

नानस्टाप हंसी...
बच्चों को हंसते-खेलते देखना किसे अच्छा नहीं लगता लेकिन एक चीनी दंपत्ति के लिए उनकी बेटी की हंसी ही परेशानी की वजह बन गई है। दरअसल उनकी बेटी शू पिंगुई पिछले 12 वर्षो से लगातार हंस रही है।

शू पिंगुई 8 माह की थी तब से यह सिलसिला जारी है। दो साल की उम्र के बाद से उसने बोलना बंद कर दिया और लगातार हंसती रहती है। बेटी के कितने ही इलाज के बाद भी यह बीमारी ठीक नहीं हो रही है। शू के पिता वीमिंग कहते हैं कि उसे हंसता देख कर हम दोनों को बहुत दुख होता है। वहीं चांगकिंग मेडिकल कालेज के डाक्टर, शू के दिमाग की स्कैनिंग करने की सोच रहे हैं ताकि उसके लगातार हंसने के कारणों का ठीक-ठीक पता लगाया जा सके। कितनी अजीब बात है शू के लिए उसकी हंसी ही श्राप बन गई है।

वह चार साल तक पलंग के नीचे छुपा रहा

डांट या मार से बचने के लिए प्राय: बच्चे मां के आंचल के पीछे छिप जाते हैं लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पुलिस से बचने के लिए रोमानिया के एक चोर पेट्रू सुसानू चार साल तक मां के पलंग के नीचे छिपा रहा।
व्लादेनी स्थित पैतृक घर में सुसानू ने बिस्तर के नीचे छिपे रहने की शानदार व्यवस्था बना रखी थी। किसी को पता न चले इसलिए वह खुद को फर्श के नीचे बने लकड़ी के बक्से में छिप कर रहता था। पता न चले इसलिए उसने उस जगह को एक गलीचे से ढक रखा था। लेकिन चार साल चकमा देने के बाद पड़ोसियों व एक दुकानदार के जरिए पुलिस ने उसे पकड़ ही लिया। दरअसल पड़ोसियों ने पेट्रू की मां को दुकान से सिगरेट व बीयर लाते देखा जबकि वह न तो सिगरेट पीती है न शराब। दुकानदार को शक तब हुआ जब सुसानू की मां रोज उसी ब्रांड की सिगरेट दुकान से लेकर जाती थी, जिस ब्रांड की सिगरेट उसके दुकान से हमेशा चोरी होती थी।

सुसानू की 2005 में की गई चोरी के आरोप में पुलिस को तलाश थी। फिलहाल जेल में वह चार साल की सजा काट रहा है। सुसानू के लिए पलंग के नीचे चार साल तक छिपे रहने की बजाय बाहर आकर जेल की सजा काटना शायद ज्यादा आसान होगा।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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