November 23, 2008

एक सूट की कीमत 30 लाख रुपए और 24 करोड़ की..... !

आर्थिक सुनामी की मार से ध्वस्त भारतीय अर्थ व्यवस्था के बावजूद भारतीय कपड़ा निर्माता कंपनी दिग्जाम ने एक स्काटिश कंपनी के सहयोग से भारतीय बाजार में एक सूट का ऊनी कपड़ा प्रस्तुत किया है। 14 लाख रुपए प्रति मीटर वाले इस कपड़े की एक सूट लेन्थ की कीमत है सिर्फ 30 लाख रूपए ! इस ऊनी कपड़े की खास बात है कि यह कपड़ा आल्प्स पर्वत श्रृंखला में पाई जाने वाली एक दुर्लभ भेंड़ विकूना के ऊन से बना है।
लेकिन यह तो कुछ भी नहीं है योरोप के मशहूर फै शन हाउस विक्योरियाज सीक्रेट ने विश्व की सबसे महंगी एक ऐसी ब्रा (चोली) बनाई है जिसमेंं लगभग चार हजार हीरे जड़े हुए हैं। क्या आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कितनी कीमत होगी इस हीरो से जडि़त चोली की। अंदाजा नहीं लगा पाए ना? तो दिल थाम लीजिए इस चोली की कीमत पचास लाख डालर (24 करोड़ रुपए) रखी गई है !
अब भला इस करोड़ों की चोली के सामने 14 लाख रुपए प्रति मीटर वाले उस सूट के कपड़े की क्या बिसात। पहले तो हम यही सोच रहे थे कि 14 लाख रूपए मीटर का सूट पहनने वाले की शान कितनी निराली होगी । लेकिन अब उस 24 करोड़ के हीरों से जगमगाती चोली पहनने वाली की शान कितनी निराली होगी, यह तो कल्पना से परे है।


ईश्वर के

विरूद्ध दायर

मुकदमा खारिज
अमरीका के एक राज्य नेब्रास्का से खबर है कि है कि वहां के एक जज ने एक विधायक द्वारा ईश्वर के विरूद्ध दायर मुकदमा इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि वादी ने अपनी याचिका में ईश्वर के स्थायी निवास का पता नहीं दिया था, अत: ईश्वर को अदालत का सम्मन भेजा जाना संभव नहीं था। विधायक अर्नी चैम्बर्स ने अपनी याचिका में ईश्वर पर अपने तथा अपने वोटरों पर आतंकवादी धमकियां (पाप के परिणाम) देने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इसके कारण विश्व के अनगिनत निवासियों के मन में मृत्यु, विनाश एवं आतंक व्याप्त है।
लीजिए हम सोचते थे कि इस तरह की अंधविश्वास से भरी बातें भारतीय ही करते हैं पर अमरीका जैसे विकसित देश में भी ऐसे लोग हैं, वह भी वहां का एक जनप्रतिनिधि ऐसी बाते कर रहा है। कहते हैं न जब खुद पर से विश्वास उठ जाता है तब व्यक्ति ईश्वर पर भी शक करने लगता है।

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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