October 04, 2008

रंग बिरंगी दुनिया


निशिता


भारतीय मूल की अरबपति लडक़ी को मिस्टर राइट की तलाश है
निशिता शाह फोब्र्स में नाम पाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला हैं। यह पत्रिका दुनिया के सबसे रईस लोगों की सूची बनाती है। निशिता इस सूची की सबसे युवा भी है। उसकी उम्र सिर्फ 21 साल है। निशिता को आगामी पीढ़ी की एशियाई अरबपतियों की सूची में 19वें नंबर पर रखा गया है। इस सूची में कुल 40 नाम हैं।
 


गुजरात मूल का शाह परिवार इस समय थाईलैंड में बसा है।  शाह परिवार की दौलत करीब 2000 करोड़ रुपए आंकी गई है। इनके जीपी गु्रप के बिजनेस में 44 विशाल शिप भी हैं। शाह परिवार मूलत कच्छ का है। 1868 में यह मुंबई बसा था। इसके बाद यह परिवार 1918 में बैंकॉक में सेटल हो गया।
 


निशिता का परिवार हर साल अपने मूल देश भी आता है। राजकोट में यह एक एनजीओ लाइफ फाउंडेशन की मदद से रक्त कैंसर से पीडि़त मरीजों के लिए और शिक्षा के क्षेत्र में कई काम कर रहा है। निशिता अपने परिवार की दौलत को और अधिक बढ़ाना चाहती हैं। उनका परिवार भारत में हासपिटैलिटी बिजनेस में भी उतरने की तैयारी में है।  अक्टूबर माह में वे नशा नाम से फैशनेबल कपड़ों के बिजनेस में भी उतर रहे हैं, पहले इसे लेकर वे थाईलैंड पंहुचेंगे फिर अमेरिका के चुंनीदा स्टोर्स में। इसके बाद इसे यूरोप और दुनिया के दूसरे देशों में भी पेश करेंगे।


निशिता ने बोस्टन अमेरिका से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स पूरा किया है। उसके पास अपना प्लेन भी है और पायलट का लाइसेंस भी। तीन संतानों में सबसे बड़ी निशिता के माता- पिता चाहते हैं कि निशिता अब शादी कर ले पर निशिता को अभी उसका मिस्टर राइट नहीं मिला है। कौन होगा वह खुशकिस्मत राइट च्वाइज जो इस अरबपति लडक़ी का पति बनेगा?



अबूबकर की पत्नियां बनीं फांसी का फंदा




नाइजीरिया के 84 वर्षीय धर्मगुरु महम्मदू बेलो अबूबकर दुनिया को लोक परलोक संवारने की शिक्षा देते देते अपने निजी हरम को लेकर मुसीबत में गए हैं। 86 पत्नियों के पति और 170 संतानों के पिता मौलाना अबूबकर ने दावा किया है कि इस्लाम में 4 से अधिक पत्नियां रखना नाजायज नहीं है। उनकी 86  पत्नियों में से अधिकांश की उमर बीस वर्ष के आसपास है और सभी संतानवती हैं। अबूबकर झाड़- फंक में भी माहिर हैं और उनकी अधिकांश पत्नियां उनके पास शारीरिक मानसिक व्याधियों का उपचार कराने आईं थीं और व्याधि से मुक्ति पाते ही उनको समर्पित हो गईं। अबूबकर शान से कहते हैं कि एक मर्द 10 पत्नियों को भी संतुष्ट नहीं रख पाएगा और पस्त हो जाएगा। मेरे पास तो अल्ला की दी हुई विशेष कुव्वत है कि मैं 86 पत्नियों को संतुष्ट रख पाता हूं। लेकिन अबूबकर के दावे से नाइजीरिया में इस्लाम का सर्वोच्च न्यायाधिकरण सहमत नहीं है और उसने उन्हें फांसी की सजा सुनाई है। इस पर स्थानीय अमीर ने आदेश दिया है कि मौलाना अबूबकर की फांसी माफ की जा सकती है यदि वह अपनी 86 पत्नियों में से 82 को तलाक दे दे और सिर्फ 4 से ही काम चलाए। अबूबकर की सभी 86 पत्नियां उन्हें दिलोजान से चाहती हैं। उनकी दुविधा है कि वह आखिर 86 पत्नियों में से  किन 82 को तलाक दें।






रॉबी विलियम्स के घर ऐलियंस
 


 ब्रिटिश गायक रॉबी विलियम्स ने दावा किया है कि दूसरी दुनिया के लोगों (ऐलियंस) के बारे में गीत लिखते ही उनके घर एक ऐलियन आया था।  कॉन्टेक्ट म्यूजिक डॉट कॉम के मुताबिक विलियम्स ने बताया कि जैसे ही उन्होंने अपना गीत ऐरिजोना खत्म किया, अचानक उनके स्टूडियो में रोशनी हुई। उन्होंने बताया कि मैंने एरिजोना लिखना खत्म ही किया था कि अचानक वहां रोशनी हो गई। वह सचमुच जादू था।  विलियम्स को लगता है कि दूसरी दुनिया के लोगों की उडऩ तश्तरी समुद्र में उतरी है। अब वह उनकी तलाश में निकलने की योजना बना रहे हैं। उनका यह गीत एक ऐलियन के बारे में है, जिसे अगवा कर लिया जाता है।

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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