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Aug 12, 2015

प्रेरक

यादों की नमक

सुबह आठ बजे मैं मैड्रिड पहुँच गया। यहाँ मुझे कुछ घंटे ही रुकना था इसलिए मैंने यह तय किया कि कुछ दोस्तों को फोन करके मुलाकात की जाए। फिर मैं अपनी जानी-पहचानी जगहों तक पैदल चलकर गया और अंत में रिटाइरो पार्क की एक बेंच पर सिगरेट पीने के लिए बैठ गया।
तुम कहीं खोए हुए हो, बेंच पर मेरे करीब बैठे एक बुज़ुर्ग ने कहा।
हम्म.. शायद, मैंने कहा, मुझे याद आ गया कि मैं 1986 में इसी बेंच पर मेरे दोस्त अनास्तासियो रांचाल के साथ बैठा हुआ था और हम दोनों मेरी पत्नी क्रिस्टीना को देख रहे थे जो थोड़ी ज्यादा पी लेने के बाद फ़्लेमेंको डाँस करने की कोशिश कर रही थी।
अपनी स्मृतियों का आनंद लो, बुज़ुर्ग ने कहा, लेकिन यह कभी मत भूलना कि स्मृतियाँ नमक की भाँति होतीं हैं। खाने में नमक की सही-सही मात्रा ज़ायका लाती है लेकिन ज्यादा नमक उसे बिगाड़ देता है। यदि तुम अतीत की स्मृतियों में बहुत अधिक समय बिताने लगोगे तो तुम्हारा वर्तमान स्मृतियों से रिक्त हो जाएगा। पाउलो कोएलो का संस्मरण से
  
कँचे

एक लड़का और लड़की साथ में खेल रहे थे। लड़के के पास बहुत सुंदर कँचे थे। लड़की के पास कुछ टॉफियाँ थीं।
 लड़के ने लड़की से कहा कि वह टॉफियों के बदले में अपने सारे कँचे लड़की को दे देगा। लड़की मान गई।
 लेकिन लड़के ने चुपके से सबसे खूबसूरत दो-तीन कँचे दबा लिए और बाकी कँचे लड़की को दे दिए। बदले में लड़की ने अपनी सारी टॉफियाँ लड़के को दे दीं।
 उस रात लड़की कँचों को निहारते हुए खुशी से सोई। लेकिन लड़का इसी सोच में डूबा रहा कि कहीं लड़की ने भी चालाकी करके उससे कुछ टॉफियाँ तो नहीं छुपा लीं!



लंबे सफर में ईमानदारी

 शाह अशरफ अली बहुत बड़े मुस्लिम संत थे। एक बार वे रेलगाड़ी से सहारनपुर से लखनऊ जा रहे थे। सहारनपुर स्टेशन पर उन्होंने अपने शिष्यों से कहा कि वे सामान को तुलवाकर ज्यादा वजनी होने पर उसका किराया अदा कर दें।
वहीं पास में गाड़ी का गार्ड भी खड़ा था। वह बोला- सामान तुलवाने कि कोई ज़रूरत नहीं है। मैं तो साथ में ही चल रहा हूँ। वह गार्ड भी शाह अशरफ अली का अनुयायी था।
शाह ने उससे पूछा- आप कहाँ तक जायेंगे।
मुझे तो बरेली तक ही जाना है, लेकिन आप सामान की चिंता नहीं करें- गार्ड बोला।
लेकिन मुझे तो बहुत आगे तक जाना है- शाह ने कहा।
मैं दूसरे गार्ड से कह दूँगा। वह लखनऊ तक आपके साथ चला जाएगा।
और उसके आगे?- शाह ने पूछा।
आपको तो सिर्फ़ लखनऊ तक ही जाना है न। वह भी आपके साथ लखनऊ तक ही जाएगा- गार्ड बोला।
नहीं बरखुरदार, मेरा सफर बहुत लंबा है-  शाह ने गंभीरता से कहा।
तो क्या आप लखनऊ से भी आगे जायेंगे?
अभी तो सिर्फ़ लखनऊ तक ही जा रहा हूँ, लेकिन जि़न्दगी का सफर तो बहुत लंबा है। वह तो खुदा के पास जाने पर ही ख़त्म होगा। वहाँ पर ज्यादा सामान का किराया नहीं देने के गुनाह से मुझे कौन बचायेगा?

यह सुनकर गार्ड शर्मिंदा हो गया। शाह ने शिष्यों को ज्यादा वजनी सामान का किराया अदा करने को कहा, उसके बाद ही वह रेलगाड़ी में बैठे। (हिन्दी ज़ेन से)

ग़ज़लें

- गिरीश पंकज 

1. अंगार लिखता है

कोई तकरार लिखता है कोई इनकार लिखता है
हमारा मन बड़ा पागल हमेशा प्यार लिखता है

वे अपनी खोल में खुश हैं कभी बाहर नहीं आते
मगर ये बावरा दुनिया, जगत, व्यवहार लिखता है

ये जीवन राख है गर प्यार का हिस्सा नहीं कोई
ये ऐसी बात है जिसको सही फनकार लिखता है

कोई तो एक चेहरा हो जिसे दिल से लगा लूँ मैं
यहाँ तो हर कोई आता है कारोबार लिखता है

तुम्हारे पास आ जाऊँ  पढ़ूँ कुछ गीत सपनों के
तुम्हारे नैन का काजल गजब श्रृंगार लिखता है

अगर हारे नहीं टूटे नहीं तो देख लेना तुम
वो तेरी जीत लिक्खेगा अभी जो हार लिखता है

यहाँ छोटा-बड़ा कोई नहीं सब जन बराबर हैं
मेरा मन जि़न्दगी को इस तरह तैयार लिखता है

हमारी दोस्ती उससे भला होगी कहो कैसे
मैं हूँ पानी मगर वो हर घड़ी अंगार लिखता है

उधर हिंसा हुई, कुछ रेप, घपले, हादसे ढेरों
ये कैसी सूरते दुनिया यहाँ अखबार लिखता है

वो खा-पीकर अघाया सेठ कल बोला के सुन पंकज
जऱा दौलत कमा ले तू तो बस बेकार लिखता है

2. कह कर चले आए

पेड़ था फलदार तो पत्थर चले आए
क्या करें हम चोट बस खाकर चले आए

लोग जलते हैं यहाँ क्यों फल रहे हैं हम
झेलकर इस दर्द को हँस कर चले आए

शातिरों के हाथ में है अब अदब की डोर
जब दिखा यह दृश्य हम कटकर चले ले आए

राग कुरसी जब सुनाया जा रहा था तब
मन दु:खी होने लगा उठ कर चल आए

दर्द में डूबी निशा को भूल बैठे हम
तुम अचानक दूत-से बन कर चले आए

आँसुओं की इक नदी बहने लगी जब भी
रोकने उनको सभी अक्षर चले आए

एक मेला-सा लगे बर्बादियों का अब
थी बड़ी किस्मत कि जो बचकर चले आए

लूटते थे लोग पहले जो विदेशी थे
अब तो है ये हाल कि रहबर चले आए

प्यार से जिसने पुकारा हम गए उस ओर
इक नदी की धार से बहकर चले आए

देख कर हमको खुशी जाहिर न की उसने
अब न पंकज आएगा कहकर चले आए

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दस व्यंग्य संग्रह और पांच उपन्यासों के लेखक गिरीश पंकज वैसे तो मूलत: व्यंग्यकार के रूप मे ही पहचाने जाते है लेकिन बहुत कम लोग इस तथ्य से परिचित है कि वे गज़़ले भी कहते है। गत वर्ष उनका दूसरा  गज़़ल संग्रह प्रकाशित हुआ था- यादों में रहता है कोई

सम्पर्क: जी- 31, नया पंचशील नगर, रायपुर (छ. ग.) 
मो.94252 12720Email- girishpankaj1@gmail.com

दिल की धड़कन

दिल की धड़कन 
और गायन के बीच 
कुछ तो रिश्ता है!



हर साल त्यागराजा आराधना के दिन सैकड़ों गायक, तिरुवयरु में इकट्ठे होकर एक सुर में पंचरत्न गीत गाते हैं। इन गीतों का सृजन संत त्यागराजा ने किया था। जब वे एक साथ एक सुर में इन गीतों को गाते हैं तो उनका ह्रदय भक्ति भाव से भर जाता है और उस समय उनकी धड़कन को मापना बहुत ही रोचक होगा। यह सुझाव मैं फ़्रंटियर्स इन फिजि़योलॉजी के 9 जुलाई 2013 के अंक में प्रकाशित एक पर्चे के आधार पर दे रहा हूँ। यह पर्चा डॉ. ब्योर्न विकहॉफ के नेतृत्व में डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और गायकों की एक टीम ने लिखा है। इस पर्चे का उद्देश्य इस बात पर प्रकाश डालना है कि कैसे गायन और विशेष रूप से वृंद गायन स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। पर्चे में बताया गया है कि गायक की श्वसन दर और दिल की धड़कन के बीच कुछ तालमेल होता है।
यह काफी समय से पता है कि श्वसन दर दिल की धड़कन को और उसके ज़रिए रक्तचाप को प्रभावित करती है। हमारे बुज़ुर्ग सहजता से इस बात को महसूस भी करते थे और तरह-तरह के प्राणायाम जैसे श्वसन व्यायाम करते थे। इस परिकल्पना को जाँचने के लिए 2009 में नेपाल मेडिकल कॉलेज, काठमाँडू के डॉ. टी. प्रामाणिक और उनकी टीम ने एक प्रयोग किया था। उन्होंने वालंटियर्स को धीमी गति से प्राणायाम करने को कहा (इसमें दोनों नासा छिद्रों से 4 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस लेना और फिर दोनों छिद्रों से 6 सेकेण्ड में धीरे-धीरे सांस छोडऩा था, कोई उदर श्वसन यानी भस्त्रीका नहीं) और उनकी धड़कन और रक्त चाप नापे। जब इस व्यायाम को 5 मिनिट के लिए किया गया था तब उच्च और निम्न ब्लड प्रेशर में गिरावट दिखी। साथ ही धड़कन में भी कुछ गिरावट नज़र आई। इसी के समान एक और समूह ने इसी तरह का व्यायाम किया मगर पहले उन्हें पैरासिम्पेथेटिक दवा दी गई थी। इस समूह में उपरोक्त असर नहीं देखा गया।
ऐसा क्यों होता है? श्वसन दर और हृदय गति में परस्पर सम्बंध तो पहले से पता है। सांस लेते वक्त नाड़ी की गति बढ़ती है और छोड़ते समय घटती है। वेगस तंत्रिका मस्तिष्क को हृदय और उदर से जोड़ती है। यह उत्तेजित हो जाती है और हृदय की धड़कन को कम करती है। दरअसल न्यूयार्क के एक ग्रुप ने एक ऐसी मशीन बनाई है जिसे रेस्पीरेट कहते हैं। इस मशीन से आपको धीमी गति से श्वसन (10 सांस प्रति मिनट) करवाकर उच्च रक्तचाप को ठीक करने की बात कही जाती है।
गायन से इसका क्या लेना-देना? एक दूसरे स्वीडिश समूह ने 2003 दर्शाया था कि में गायन सत्र के बाद केवल धड़कन ही कम नहीं होती बल्कि रक्त सीरम में ऑक्सीटोसीन जैसे अणुओं की सांद्रता भी बढ़ती है। हम यह तो नहीं जानते कि इस सबका क्या मतलब है, लेकिन गायन से स्वास्थ्य में सुधार आता है और उत्तेजना को कम करने में मदद मिलती है।
विकहॉफ और उनके साथी इसी पृष्ठभूमि में अपने परिणामों को देख रहे हैं। उन्होंने वालंटियर्स को तीन गायन सम्बंधी व्यायाम करने को कहा। पहले गु्रप को केवल मंत्र उच्चारण के लिए कहा गया (जैसे बौद्ध लोग सिक्किम या थाइलैंड के पैगोडा में करते हैं)। इसमें हृदय गति कम हुई और ब्लड प्रेशर भी कम हुआ। दूसरे समूह को वैसे ही गुनगुनाने को कहा गया था। इस मामले में जो अंतर देखा गया वह उतना नियमित नहीं था जितना मंत्र उच्चारण में देखा गया था। तीसरे समूह को 'फेयरेस्ट लॉर्ड जीसससमूह में गाने को कहा गया। इस प्रकार श्वसन के तीन संयोजन प्राप्त हुए। जिसमें समूह गान में गाने वालों के परिणाम सबसे उल्लेखनीय थे। जब वे एक सुर में गाते थे, तब उनकी धड़कन भी तालमेल में होने लगती थी। दूसरे शब्दों में संगीत संरचना गायकों की धड़कन को निर्धारित करती है।
इस प्रकार संगीत ऑटोनोमस तंत्रिका तंत्र से दो तरह से संवाद करता है- वेगस तंत्रिका की कडिय़ों और उसकी क्रियाओं के ज़रिए और श्रव्य संकेतों के ज़रिए। गायन नियमित श्वसन की माँग करता है।
श्वसन और हृदय गति दोनों ही ऑटोनोमस तंत्रिका तंत्र के ज़रिए जुड़ी हुई हैं। मस्तिष्क की वेगस तंत्रिका  पैरासिम्पैथेटिक ढंग से धड़कन को नियमित करती है। इससे श्वसन और दिल की धड़कन का तालमेल बनाने में मदद मिलती है। समूह गान इन दोनों क्रियाओं को अंजाम देता है।

इस अध्ययन के व्यापक दार्शनिक और सामाजिक निहितार्थ हैं। शोधकर्ताओं को लगता है कि इस तरह कि सामूहिक क्रियाएँ साझा परिप्रेक्ष्य और साझा इरादों को जन्म देती है। 'दूसरे शब्दों में गायक गायन के माध्यम से इस दुनिया के अपने आत्मकेंद्रित नज़रिए को 'साझा नज़रिमें बदल सकता है जो उन्हें दुनिया को एक ही नज़रिए से देखने में मदद करेगा (उदाहरण के लिए धर्म, राजनीति या फुटबॉल टीम) और इस तरह से यह भी परिभाषित होगा कि हम कौन हैं। यदि समूह गान से सामूहिक नज़रिया पनपता है, तो इससे सामाजिक बँधनों में गहराई आएगी।यानी समूह गान हृदय के लिए एक व्यापक और गहरे अर्थ में लाभदायक हो सकता है। समूह गान मिज़ाज का नियंत्रण करता है और सामाजिक बँधनों को पुख्ता करता है। ओहायो स्टेट विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ म्यूजि़क के डेविड ह्यूरॉन हमेशा से सोचते रहे हैं कि आखिर लोग साथ-साथ गाते ही क्यों हैं। कहीं संगीत एक आनुवंशिक अनकूलन तो नहीं, जो लोगों को परस्पर लाभ के लिए एक समुदाय के रूप में बाँधता है। (स्रोत फीचर्स)

जीवन का सच

जीवन का सच

- सत्यनारायण सिंह

स्मृतियों नें
अनुभवों के ताने बाने से
जीवन को बुना
बुनते बुनते
कुछ धागे टूटे
कुछ छूटे,
कुछ जीवन में समाहित होकर
हमें एहसास दिलातें हैं की,
जीवन का माधुर्य
सुख और दु:ख
इन दो अहम घटकों
पर आधारित है
किसी एक घटक के आभाव में,
जीवन सुखद नहीं लगता,
मानो जीवन से जी ऊब सा गया हो
और तब वह जीवन,

नीरव वन सा डरावना लगता है।

Email- sssinghus@gmail.com                    

बैंकिंग

ऑनलाइन

धोखाधड़ी से कैसे बचें

- देवमणि पाण्डेय


पिछले कई महीनों से ऑन लाइन फ्राड पूरे देश में हो रहे हैं। प्रायवेट बैंकों में भी और राष्ट्रीयकृत बैंकों में भी। क्रेडिट कार्ड पर भी और डेबिट कार्ड पर भी। हैरत की बात ये है कि अभी तक पुलिस ऐसे किसी संगठित गिरोह या ठग को पकड़ नहीं पाई है, जो ऐसे कारनामे अंजाम दे रहे हैं। ये हमेशा मोबाइल से ही लोगों को फोन करते हैं। ऐसे ठगों के पास कोई ऐसी तकनीक है कि ये पता ही नहीं चलता कि कॉल करने वाले का मोबाइल किस कम्पनी का है। सिम कार्ड किसके नाम है या वो किस जगह से बोल रहा है। हाँ इतना ज़रूर पता चला है कि इन ठगों ने कई लोगों के क्रेडिट कार्ड से सिंगापुर, दुबई, बैंकाक, कनाडा आदि बाहर के देशों में ख़रीददारी की है। इसलिए भी सम्भव है कि ये मोबाइल सिमकार्ड विदेशों के हो।
कुछ कम्पनियों के स्मार्ट मोबाइल फोन में ट्रूकॉलर सर्च की सुविधा होती है। यानी अगर आप सर्च बाक्स में कोई अजनबी नम्बर डालें तो जिस नाम से सिमकार्ड लिया गया है वह नाम स्वत: दिखाई देता है। इन ठगों के नाम ट्रूकॉलर में भी नहीं दिखाई देते। इससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ऐसी ठगी के पीछे कोई ऐसा गिरोह सक्रिय है जो इंटरनेट एक्सपर्ट है। ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ बरतें-
 (1) अपने ग्राहकों को जानकारी देने के लिए बैंक प्राय: लैंडलाईन फ़ोन से ही सम्पर्क करते हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति मोबाइल फ़ोन से आपको सम्पर्क कर रहा है तो फ़ौरन सतर्क हो जाइए कि यह कोई फिशिंग (धोखाधड़ी) कॉल हो सकती है। फिशिंग कॉल करने वाले बड़े शातिर होते हैं। वे इतनी विनम्रता से बात करते हैं कि पढ़े-लिखे लोग भी उनके जाल में फँस जाते हैं।
(2) अगर फोन पर कोई आपसे कहे कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ानी है अथवा डेबिट कार्ड ब्लॉक हो गया है या एक्सपायर हो गया है तो उसे व्यस्तता का बहाना बना कर आधे-एक घंटे के लिए टाल दें और तत्काल अपने बैंक की हेल्पलाइन पर फोन करके वास्तविकता का पता लगाएँ।
(3) बैंक अपने ग्राहकों से क्रेडिट या डेबिट कार्ड का पूरा नम्बर कभी नहीं पूछते क्योंकि उनके पास ये सूचनाएँ पहले से सुरक्षित हैं। अगर कोई फोन पर आपसे 16 अंकों का क्रेडिट या डेबिट कार्ड नम्बर पूछता है तो सावधान हो जाएँ और उसे नं. न बताएँ। शतप्रतिशत यह आदमी ठग है। ऐसे आदमी को कार्ड को जारी करने की तारीख़ (इशू डेट) या ख़त्म होने की तारीख़ (एक्सपायरी डेट) भी न बताएँ।
(4) आपके क्रेडट / डेबिट कार्ड के पीछे पट्टी पर जहाँ आप साइन करते हैं, सात अंकों का समूह होता है। यह सिक्योरिटी कोड है। इसे सीवीवी नम्बर कहते हैं। इस नम्बर के ज़रिए ही वन टाइम पिन क्रिएट करके ऑन लाइन खऱीदारी सम्भव होती है। यह नम्बर फ़ोन करने वाले को भी कभी न बताएँ।
(5) आप चार अंकों का अपना पिन नम्बर किसी को भी न बताएँ वर्ना धोखाधड़ी का शिकार हो जाएँगे। धोखाधड़ी से बचने के लिए किसी इनकमिंग फ़ोन कॉल, एसएमएस या ईमेल पर आप ये पाँच जानकारियाँ कभी शेयर न करें- सोलह अंकों का कार्ड नं., एक्सपायरी डेट, क्रेडिट लिमिट, सीवीवी कोड और कार्ड का चार अंकों का पिन नम्बर।
(6) धोखाधड़ी का शिकार होने पर सबसे पहले कार्ड प्रदाता बैंक को फ़ोन करके अपना कार्ड ब्लॉक कराएँ। आप अपना मोबाइल नम्बर और ईमेल अपने बैंक के साथ ज़रूर रजिस्टर्ड कराएँ ताकि आपको आवश्यक सूचनाएँ एवं ट्रांजेक्शन की जानकरी मिलती रहे।
कभी भी लॉटरी के ईमेल या एसएमएस पर यकीन न करें। सवाल यह है कि जब आपने लॉटरी का टिकट खरीदा ही नहीं तो आपको करोड़ों की लाटरी लगी कैसे? अगर लॉटरी की रकम देने से पहले आपसे कस्टम डूयूटी या इनकम टैक्स के बहाने रुपये माँगे जाएँ तो समझ  जाइए कि मामला  ठगी का है। ऐसे में माँगी गई रकम किसी भी अकाउंट में ट्रांसफर न करें और तत्काल पुलिस विभाग को सूचित करें।
ट्रेन या बसों में इश्तहार देख कर पर्सनल लोन देने वाले अनजान लोगों के चक्कर में न फँसें। अक्सर ऐसे लोग भी पंजीकरण शुल्क या सेवा शुल्क के नाम पर सीदे-सादे लोगों को ठग लेते हैं।

सम्पर्क: ए-2, हैदराबाद एस्टेट, नेपियन सी रोड, मालाबार हिल, मुम्बई - 400 036