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Oct 1, 2026

व्यंग्यः गुमशुदा और शादीशुदा

 - अख़तर अली  

पहले गुमशुदा आदमी ज़्यादातर शादीशुदा आदमी निकलते थे। अब गुमशुदा आदमी शत प्रतिशत शादीशुदा निकलते है। जो शादीशुदा नहीं है, उसे भला गुमशुदा होने की क्या ज़रूरत? अगर कोई आदमी लापता हो गया है, तो पहले पता करो क्या वह शादीशुदा है? अगर शादीशुदा है, तो यह स्वीकार कर लो कि वह गुमशुदा नहीं है; बल्कि फ़रार है। वह फरार क्यों है ?

ज़रूर उसे चंद पल चैन से जीने की इच्छा हुई होगी। वह अपनी पसंद की सब्जी खाना चाहता होगा। साले की हाँ में हाँ मिलाते- मिलाते उकता गया होगा अब दोस्तों के साथ ठहाके लगाने की ख्वाहिश पूरी करनी होगी। यह भी हो सकता है कि वह अपने हिसाब से पंखे की स्पीड कम ज़्यादा करना चाहता हो।

अगर वह पति है तो लापता होने का कारण घर में ही छिपा होगा। गहरी जाँच पड़ताल की जाएगी तो चौंकाने वाले कारण सामने आ सकते है। यह भी हो सकता है वह अपनी पसंद का टी शर्ट पहनना चाहता हो या अपना पसंदीदा गाना गाने का मन हो रहा हो।

ऐसे लापता हुए लोग जो गुमशुदा होने के साथ- साथ शादीशुदा भी थे ढूँढने से मिलते नहीं है। खोजा उन्हें जा सकता है जो खो गए हों जो भाग गए हों वे नहीं मिलते है। ये मन माफिक चंद दिन गुज़ारने के बाद ख़ुद लौट आते है। गुमशुदा हुए शादीशुदा लोगों का यह तयशुदा कार्यक्रम है। अब तो अगर पति चार घंटे नहीं दिखता है, तो पत्नी सहेली को मुसकुराते हुए बताती है कि लगता है, भाग गया। सुनकर सहेली ख़ुश होती है और बधाई देते हुए कहती है- तेरा वाला तो निकल लिया। न जाने मेरे वाले को कब अक्ल आयेगी।

लगातार अत्याचार झेलते हुए अनेक पतियों ने तो पति के पद से अघोषित त्याग पत्र दे दिया है।  वहीं कुछ पतियों को अलिखित रूप से निलंबित कर दिया गया है। अगर पति नामक प्रजाति को बचाने के समुचित प्रयास नहीं किए गये तो जल्द ही पृथ्वी पर से पति लुप्त भी हो सकते है।

जो पति गुमशुदा होने का साहस नहीं जुटा पाते है, वे घर में नहीं होने की तरह होते हैं। अनुपस्थित की तरह उनकी हाज़िरी होती है। हँसने की बात पर कस कर मुँह दबा लेते हैं कि हँसी न निकल जाए।

परेशान पतियों के लिए यह राहत की बात है कि यहाँ दूसरी और तीसरी शादी की अनिवार्यता नहीं है वरना जो घर से चले गए, वे दुनिया से ही चले जाते।

पति समाज का हर पति घर में ख़ुश नहीं है बल्कि कुछ पति तो सुरक्षित भी नहीं है। एक पति ने दो साल से घर में कुछ बोला नहीं था तो यह मान लिया गया कि इसकी बोलने की शक्ति खत्म हो गई है। फिर एक दिन खाना खाते हुए पति बोला आज सब्जी अच्छी बनी है। पति को बोलता देख पत्नी बोली आप तो बोल सकते हो फिर दो साल से कुछ बोले क्यों नहीं? पति बोला दो साल पहले बोला था कि सब्जी अच्छी नहीं बनी है। यह बात सुनते ही तुमने जो उत्पात मचाया था उसी वक्त मैंने सोच लिया था अब तभी बोलूँगा जिस दिन सब्जी अच्छी बनेगी।

एक भागे हुए पति को जब घने जंगल में बरामद किया गया तो उसने भागने का जो कारण बताया उसे सुन कर लोगों  की आँख में आँसू आ गए। उसने कहा – मैं जूता पहनना चाहता था पर मेरे को हवाई चप्पल पहनने को विवश किया गया, मेरा मन हलवा खाने का होता तो मेरे को पोहा देते, कपड़े पहनते समय मैं पहले शर्ट फिर पैंट पहनना चाहता था लेकिन मेरे को पहले पैंट फिर शर्ट पहनने को मजबूर किया जाता। सुबह का अखबार मेरे को शाम को दिया जाता। मेरे को नाड़ा वाला पाजामा जमता था सिर्फ इसलिए मेरे सभी पाजामा में लास्टिक डलवा दिया गया। 

जिन पतियों को पेंशन मिलती है वह माह के प्रथम सप्ताह थोड़े बहुत सुखी रहते है। जिन्हें पेंशन नहीं मिलती उन्हें टेंशन मिलती है। ऐसे पति पलंग के दाहिने तरफ़ सोना चाहते हैं पर उन्हें बाएँ तरफ़ सोना पड़ता है। कुछ तो पत्नी के सुबह उठने के बाद ही पलंग पर आ पाते हैं, पूरी रात वो सोफे पर ही गुज़ारते हैं। शून्यवाद को समझना है तो पीड़ित पतियों का अध्ययन कीजिए।

प्रताड़ित पति का गर्मियों में कूलर से गहरा नाता नज़र आता है। कूलर के सामने ये कभी खड़े, बैठे या लेटे नहीं दिखेंगे ए हमेशा कूलर के पीछे उसमें पानी भरते पाए जाते हैं। उस वक्त उनके मन में यह भाव आता है कि मैंने अच्छे- अच्छे को पानी पिला दिया है। जब लगातार तीन महीने तक ये बेचारे खटते रहते हैं तब एक दिन पत्नी इस सर्व हारा को देख मुसकुरा देती है ये बेचारे इसी में गदगद हो जाते हैं। यही इनका वेतन है, बोनस है, प्रमोशन है। यही इनकी ईद और दीवाली है।

भले यह बात आप को अतिशयोक्ति लगे लेकिन ऐसे भी बेचारे पति है जिन्हें घर का बाथरूम इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है। टॉयलेट भी ये अपनी ज़रूरत के नहीं पत्नी की मर्जी के हिसाब से जाते हैं। पत्नी इनका दोनों तरफ़ का वक्त मुकर्रर करती है जाने का भी और निकलने का भी।

पतियों की दुनिया में सब कुछ अच्छा- अच्छा नहीं चल रहा है। माना अधिकांश पति सुखी हैं लेकिन कुछ प्रतिशत परेशान भी हैं। जो सुखी हैं उन्हें अपनी पीड़ित बिरादरी की मदद के लिए आगे आना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं कि नब्बे प्रतिशत पत्नियाँ बहुत अच्छी हैं लेकिन दस प्रतिशत के बिगड़े स्वभाव से इनकार नहीं किया जा सकता।

सम्पर्कः निकट मेडी हेल्थ हाँस्पिटल, आमानाका, रायपुर (छत्तीसगढ़) 492010,  मो. 9826126781

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