June 11, 2013

ग़ज़ल



नभ भी बिन बादल होगा...
- डॉ. श्याम सखा श्याम

आज नहीं तो कल होगा
हर मुश्किल का हल होगा ।

जंगल गर ओझल होगा
नभ भी बिन बादल होगा ।

नभ गर बिन बादल होगा
दोस्त कहाँ फ़िर जल होगा ।

आज बहुत रोया है दिल
भीग गया काज़ल होगा ।

आँगन बीच अकेला है
बूढ़ा- सा पीपल होगा ।

दर्द- भरे हैं अफ़साने
दिल कितना घायल होगा ।

छोड़ सभी जब जाएँगे
तेरा ही संबल होगा ।

झूठ अगर बोलोगे तुम
यह तो खुद से छल होगा ।

रोज़ कलह होती घर में
रिश्तों में दल-दल होगा ।

संपर्कः   निदेशक, हरियाणा साहित्य अकादमी ,
अकादमी भवन,  पी-16, सेक्टर-14,पंचकूला-134113 
मो.-09416359019,
Email- shyamskha1973@gmail.com

1 Comment:

सहज साहित्य said...

जंगल का न होना, फिर बादल का न होना ,बादल न होने पर जल का न होना, परस्पर नाखून और मांस कि तरह जुड़ा है, जिसे श्याम जी ने बहुत सहजता से व्यक्त किया है। घर की कलह रिश्तों को दलदल बना देती है , यह आज के पारिवारिक विघटन का कटु सत्य है। कम से कम शब्दों में जीवन और जगत का सत्य पेश कर दिया है ।विनोद सव जी का नक्सली अन्दोलन पर प्रस्तुत विश्लेषण तार्किक है।भैरव प्रसाद की कहानी 'एक पाँव का जूता'बहुत मार्मिक है। पाठक को द्रवित किए बिना नहीं रहती। क्या इस तरह की कालजयी रचना सेहमारे राजनेता कुछ सीखेंगे?अँधियारे रास्ते और उजला सवेरा-भावना सक्सैना जी का आलेख शोषण के इतिहास को परत -दर -परत खोलने में सक्षम हैं । अपने साढ़े तीन साल के प्रवास में आपने भारतीयों की 140 साल पहली पीड़ा को पाठकों के समक्ष रखा ऽनुपम मिश्र का आलेख और डॉ रत्ना जी का सम्पादकीय हमें वर्त्तमान की अपरिहार्य चिन्ता से रूबरू कराते हैं। छोटी -पत्रिका में साहित्य और समाज के व्यापक फलक को प्रस्तुत किया गया है । अनिता ललित के हाइकु गागर में सागर की तरह हैं साथ ही अभिव्यक्ति की ताज़गी को भी सँजोए हैं।

लेखकों से अनुरोध...

उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक मुद्दों के साथ पर्यावरण को बचाने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को प्राथमिकता से प्रकाशित किया जाता है। समाजिक जन जागरण के विभिन्न मुद्दों को शामिल करने के साथ ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, कविता, गीत, गजल, व्यंग्य, निबंध, लघुकथाएं और संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। उपर्युक्त सभी विषयों पर मौलिक अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। आप अपनी रचनाएँ Email-udanti.com@gmail.comपर प्रेषित करें।

माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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