February 02, 2012

बूंद-बूंद से बना 'समंदर'

आगरा की एक युवती ने इस पुरानी कहावत को सही साबित कर दिखाया कि बूंद-बूंद से समंदर बनता है। दो साल पहले उसने 500 गुल्लक आगरा की इतनी ही दुकानों पर रखे थे और सभी से सिर्फ एक रुपये प्रतिदिन इसमें डालने का अनुरोध किया था। एक-एक रुपये से आज उनके पास करीब ढाई लाख रुपये एकत्र हो चुके हैं।

उनका मकसद इन पैसों से एक ऐसे अस्पताल का निर्माण करना था, जहां गरीबों को उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके। उनका यह सपना हालांकि अब तक पूरा नहीं हो सका है, लेकिन वह अपने इस प्रयास से पहले ही एक जिंदगी बचा चुकी हैं। यह कारनामा कर दिखाने वाली हैं आईटी पेशेवर सपना अग्रवाल, जिनकी उम्र अभी 30 साल भी पूरी नहीं हुई है।
सपना ने 'माले वेलफेयर सोसाइटी' नाम से अपना गैर- सरकारी संगठन बनाया और एक- एक सिक्के के रूप में मिले अनुदान को एकत्र करना शुरू किया। सपना का कहना है कि सिर्फ एक बूंद नाकाफी हो सकती है, लेकिन जब कई बूंद मिल जाती है तो वे बारिश की तरह खुशी व जीवन के लिए सहायक साबित होती हैं। सपना को इस काम की प्रेरणा दो साल पहले तब मिली थी जब उनके माता- पिता बीमार थे और शहर में खराब चिकित्सा व्यवस्था की वजह से उन्हें समुचित इलाज नहीं मिल पाया। इसके बाद उन्होंने आगरा में विश्वस्तीय अस्पताल बनाने का निर्णय लिया, जहां गरीबों को नि:शुल्क इलाज मिल सके।
उनका यह सपना हालांकि अब तक पूरा नहीं हो पाया है, लेकिन पिछले दो साल में एकत्र हुए करीब ढाई लाख रुपये से वह एक गरीब परिवार की युवती को बचा चुकी हैं, जो हृदय रोग की वजह से पिछले करीब आठ साल से बिस्तर पर थी। 20 वर्षीया कंचन के हृदय के बाल्व में गड़बड़ी थी। उसकी मां कमलेश बेटी को बचाने के लिए हर जगह गईं लेकिन उन्हें मदद मिली तो सपना से। सपना ने अपने गैर सरकारी संगठन के जरिये कंचन के इलाज के लिए वित्तीय सहायता मुहैया कराई। परिणामस्वरूप उसका ऑपरेशन हो सका। लेकिन बेटी को पूरी तरह ठीक रखने के लिए कमलेश को और पैसों की जरूरत है, जिसके लिए सपना ने लोगों से मदद का आह्वान किया है। हमें विश्वास है सपना का सपना जरूर पूरा होगा।

1 Comment:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह , बहुत बढ़िया ॥प्रेरक

लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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