December 25, 2010

एक होटल जिसकी सजावट में हर साल खर्च होता है

पांच किलो सोना !
अबू धाबी के मशहूर होटल 'एमीरेट पैलेस' में हर साल पांच किलो सोना सजावट पर खर्च होता है। अब जरा सोचिए जब सजावट पर इतना खर्च तो होटल कितने में बना होगा? जी हां यह होटल तीन अरब डॉलर की लागत से तैयार हुआ है। इस होटल में कुल 1,002 झाड़ फानुस लगे हैं, जिसमें से एक सबसे भारी ढाई टन का है। होटल की वेबसाइट के मुताबिक यह होटल 100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।
इस होटल के साथ 1.3 किलोमीटर का समुद्री किनारा लगा हुआ है। जो इसकी खूबसूरती को और भी बढ़ाता है। इसमें 394 कमरे हैं, जिसका आकार 55 वर्ग मीटर से 680 वर्ग मीटर तक है। यही नहीं, इसके खुले सभागार में एक साथ 20,000 लोग बैठ सकते हैं। इस होटल में 49 देशों के 1,800 कर्मचारी काम करते हैं। होटल के बाग में 800 पेड़ हैं तथा पार्किंग में 800 कार खड़ी करने की जगह है। जाहिर है यहां ठहरने का किराया भी जबरदस्त होगा। आपने सही सोचा इसके एक खास कमरे का किराया 10 लाख डॉलर है, जिसे मेहमानों की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जाता है।
वाह भई वाह
गोरखनाथ- मेरे पास 20 हजार रुपये थे! मैंने सोचा कुत्ता रखे बिना इतना पैसे घर में नहीं रखना चाहिए।
बहादुर- फिर आपने क्या किया?
गोरखनाथ- क्या करना था 20 हजार का कुत्ता खरीद लिया।
***
मनसुख लाल अपने दो दोस्तों के साथ बाइक पर जा रहा था। सामने से पुलिस आती दिखाई दी तो मनसुख ने तुरंत गाड़ी खड़ी कर दी और दोनों दोस्तों को नीचे उतार खड़ा हो गया।
पुलिस ने बाइक पर डंडा मारते हुए रौब झाड़ा तुम्हें पता नहीं है क्या, तीन लोगों की सवारी पर फाइन लगता है।
मनसुख लाल ने छुटते ही जवाब दिया पता है सर, इसीलिए तो एक को वापस छोडऩे जा रहे हैं।

0 Comments:

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष