May 24, 2010

प्रहलाद जानी:विज्ञान भी जिसे नहीं बूझ पाया

वे हवा खा कर जिंदा हैं!
72 साल से प्रहलाद जानी ने हवा के अलावा कुछ नहीं लिया। प्रहादभाई अस्पताल के एक कमरे में बंद थे। डॉक्टरों की टीम बाहर से टीवी पर सब कुछ देखती रही। भूख पर ही नहीं इस शख्स ने उम्र पर भी जीत हासिल कर ली है। वक्त बीतता रहा, दिन गुजरते रहे। ऑपरेशन भूख सफल रहा। डॉक्टरों ने खुद मान ली हार। ये चमत्कार था और डॉक्टरों को चुनौती....
विज्ञान और आध्यात्म के बीच फंसी ये पहेली सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। 72 साल से भूखा- प्यासा रहने का दावा करने वाले प्रहलाद जानी के दावों में कितनी सच्चाई है ये जानने के लिए रक्षा विभाग के डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की एक टीम ने 15 दिन का ऑपरेशन भूख शुरू किया। साथ में सीसीटीवी की नजरें 24 घंटे प्रहलाद जानी पर लगी रहीं। यहां तक कि नहाने और ब्रश करने के लिए भी पानी पहले से ही नापतौल कर दिया जाता रहा। हर आधे से एक घंटे में प्रहलाद जानी को फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट,गेस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबिटोलॉजिस्ट, यूरोसर्जन, आंख और जेनेटिक के जानकार डॉक्टरों की टीम चेक करती रही।
प्रहलाद जानी ने अपने ऊपर किए गए इस परीक्षण के लिये एक शर्त ये रखी थी कि डॉक्टर, उनके शरीर में किसी भी तरह की चीज इंजेक्ट नहीं करेंगे। प्रहलाद जानी का अपने बारे में कहना है कि जब वो 12 साल के थे तब तीन बच्चों ने उनके मुंह में उंगली रख दी थी जिसके बाद से ही उन्होंने खाना- पीना छोड़ दिया था फिर बाद में उन्होंने कई सालों तक हिमालय के जंगलों में तप किया।
गांधीनगर के चराड़ा गांव निवासी प्रहलाद भाई जानी ने कक्षा तीन तक की शिक्षा प्राप्त की हैं। ग्यारह वर्ष की उम्र में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, और उन्होंने घर त्याग कर जंगलों में रहना शुरू कर दिया। जानी का दावा है कि दैवीय कृपा तथा योग साधना के बल पर वे बिना कुछ खाए पिए- जिंदा हैं। इतना ही नहीं मल-मूत्र त्यागने जैसी दैनिक क्रियाओं को योग के जरिए उन्होंने रोक रखा है।
15 दिन की स्टडी में डीआरडीओ के वैज्ञानिक और डॉक्टरों को आखिर मानना पड़ा कि प्रहलाद जानी ने 15 दिनों तक कुछ नहीं खाया- पिया। डॉक्टरों को समझ नहीं आया कि ऐसा कैसे हो सकता है। मेडिकल साइंस इसकी इजाजत नहीं देती लेकिन ऑपरेशन भूख के नतीजे सामने थे। दुनिया में अब तक की ये पहली घटना थी।
तो क्या इसे कुदरत का करिश्मा कहें, फिलहाल तो वैज्ञानिक ऐसा कहने से बच रहे हैं। हां पर वे इतना जरूर मानते हैं कि प्रहलाद जानी आम इंसान से अलग हैं। डॉक्टरों को ये बात माननी पड़ी कि इनके शरीर में कुछ तो ऐसा होता है, जो कि बिना खाए- पिए इन्हें ताकत देता है। रक्षा विभाग के डॉक्टर और वैज्ञानिकों ने जो रिर्सच किया है उसका नतीजा 3 महीने के अंदर आ जाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि बिना कुछ खाए- पिए जिंदा रहने की वजह रिसर्ज के नतीजों से साफ हो जाएगी। लेकिन बिना कुछ खाए- पिए प्रहलाद जानी के जिंदा रहने का राज खुलता है तो चिकित्सा विज्ञान में चमत्कार हो जायेगा।
15 दिन की पड़ताल के बाद तीन सौ डॉक्टरों की टीम ने जो रिपोर्ट दी उसके अनुसार तो यह चमत्कार ही है-
प्रहलादभाई ने 15 दिन तक कुछ नहीं खाया, यहां तक की पानी भी नहीं पीया, उनके शरीर के सभी अंग पहले की तरह काम कर रहे हैं, दिल की धड़कनों में कोई खास बदलाव नहीं आया, पेट की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में भी कुछ गड़बड़ी नहीं, दिमाग के एमआरआई में भी कुछ खास नहीं निकला, सीने का एक्स-रे भी सामान्य रहा, 15 दिन भूखे रहने का उनपर कोई असर नहीं।
डॉक्टरों की जांच पड़ताल में प्रहलादभाई के खून में मौजूद हेमोग्लोबीन पर खास ध्यान दिया गया। ऑपरेशन भूख शुरू करने के पहले दिन प्रहलादभाई का हेमोग्लोबीन था-10.8, तीसरे दिन-11.3,पांचवे दिन-11.5,सातवें दिन-12.3 और नवें दिन-12.9।
यानि डॉक्टरों ने एक दिन छोड़कर प्रहलादभाई के खून में हेमोग्लोबीन का स्तर जांचा। साफ है कि 15 दिन की भूख के बावजूद हेमोग्लोबीन के स्तर में कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
भारत की इस चलती- फिरती पहेली ने डॉक्टरों को भी हैरत में डाल दिया। डॉक्टरों ने इस केस की जांच किसी और बड़ी रिसर्च टीम से भी कराने का समर्थन किया। वहीं उन्होंने राय दी कि अगर वाकई में प्रहलादभाई के शरीर में कुछ ऐसा खास है जिससे उन्हें भूख नहीं लगती और उनके शरीर को खाने की जरूरत महसूस नहीं होती तो उस कारण को जानना बेहद जरूरी होगा। अगर इसके पीछे प्रहलादभाई के शरीर में मौजूद कोई खास जीन काम कर रहा है तो उसे जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से खोजना होगा। अगर ऐसा हो गया तब- दुनियाभर में भूख की समस्या से निपटा जा सकता है, इंसान के बीमार शरीर को स्वस्थ किया जा सकता है, बुढ़ापे को रोकने में मदद मिल सकती है, बर्फीले पहाड़ों पर रह रहे सैनिकों को मदद मिलेगी, अंतरिक्ष यात्रा पर गए लोगों को खाने का सामान साथ नहीं ले जाना पड़ेगा। अगर ऐसा हो गया तो मानव की यह सबसे बड़ी जीत होगी। फिर भी यह कहना ही पड़ेगा कि मनुष्य के पास ज्ञान का भंडार है उसके बाद भी अभी बहुत कुछ जानना बाकी है। प्रहलाद जानी दीर्घायु हों यही कामना है। (उदंती फीचर्स)

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लेखकों से अनुरोध...

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