August 15, 2008

छोटे परदे की टीआरपी बढ़ाते

छोटे परदे की टीआरपी बढ़ाते
- डॉ. महेश परिमल

आजकल मायानगरी के सितारे छोटे परदे पर कब्जा जमाने में लगे हैं। अब उन्हें पता चल गया है कि यह बुद्धू बक्‍सा बड़े काम का है। यही वह माध्यम है, जिससे गाँव-गाँव तक पहुँचा जा सकता है। टीवी ने आज सुदूर गाँव तक अपनी पहचान बना ली है, इसे हम सभी जानते हैं। आज बॉलीवुड के कई अभिनेता टीवी पर आने की कोशिश कर रहे हैं, कुछ तो इसमें सफल भी हो गए हैं।
टीवी की अहमियत को अब हर कोई समझने लगा है, इसलिए हालात लगातार बदल रहे हैं। अब टीवी का एक बहुत ही बड़ा वर्ग उन दर्शकों का है, जो महानगरों में नहीं रहता, बल्कि सुदूर गाँवों में रहता है और अपने मनपसंद नायक-नायिका को अपने ड्राइंग रुम में पाता है।
टीवी कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में होता है 'टेम` याने टेलीविजन ओडियंस मेजरमेंट, यही 'टेम` है, जो दर्शकों के साथ-साथ धारावाहिकों के निर्माताओं को आकर्षित करता है। यह एक प्रकार की रेटिंग है, अखबारों में पाठकों की संख्या महत्व की होती है, उसी तरह टीवी चैनलों पर प्रसारित कार्यक्रमों का 'टेम` महत्वपूर्ण है। टीवी की आवक विज्ञापनों से होती है। इन दिनों टीवी पर करीब 300 चैनल दिखाए जा रहे हैं। इस वर्ष के अंत तक 200 और नए चैनल आ जाएँगे। तब स्पर्धा और बढ़ेगी, दर्शकों को अपनी ओर खींचने के लिए ये चैनल नित नए प्रयोग करेंगे, इस स्पर्धा में अपने को टिकाए रखने के लिए कुछ चैनल अश्लीलता को भी परोसेंगे, इसमें शक नहीं। निश्चित रूप से इस तरह के चैनलों का अपना दर्शक वर्ग होगा। लोग इसमें रुचि लेने लगेंगे। इसलिए जो कुछ होगा, वह दर्शकों की पसंद का ही होगा, यह तय है।

पहले बॉलीवुड स्टार्स टीवी को हिकारत की नजर से देखते थे, टीवी पर काम करने वाले उनकी नजर में कुछ भी नहीं थे। आज भले ही वे टीवी पर चिपककर अपने कार्यक्रम बेच रहें हों, पर सच यही है कि ये स्टार्स भी चाहते हैं कि लोग उसकी प्रतिभा को पहचाने, यही टीवी धारावाहिकों या कार्यक्रमों को बनाने वाले चाहतेे हैं कि स्टार्स की लोकप्रियता को भुनाया जाए।
टीवी पर सबसे पहले लोगों ने बिग बी को देखा, तो कई लोगों का माथा ठनका। 'कौन बनेगा करोडपति` के माध्यम से जब अमिताभ बच्चन नें अपनी आवाज और अपने अभिनय से लोगों को रिझाया, तब सभी ने यही सोचा कि यह तो कमाल हो गया। इसके बाद तो अनुपम खेर, गोविंदा, मनीषा कोइराला ने टीवी पर आकर अपना भाग्य आजमाया, पर वे सभी विफल रहे। इसके बाद आजकल ' या आप पाँचवी पास से तेज हैं` में शाहरुख खान, 'दस का दम` में सलमान खान तथा 'वार-परिवार` में उर्मिला मांतोडकर टीवी पर दिखाई दे ही रहे हैं। अँग्रेजी शो 'फीयर फेक्‍टर` के देशी संस्करण में अक्षय कुमार ने भी अपने जलवे दिखा दिए। और अब शिल्पा शेट्टा बिग बॉस का देसी संस्करण ले कर आ रही हैं। जो भी हो इस तरह के टीवी शो के माध्यम से सितारों के फैन्स अपने चहेते स्टार्स को अपने और करीब पाएँगे।

यदि हम टीवी के अपने शुरुआती दौर में झांकें तो लोकप्रिय धारावाहिक 'हम लोग` ने घर-घर में अपनी जगह जमा ली थी, उस समय केवल दूरदर्शन ही दिखाई देता था, इसलिए लोग इसे अच्छी तरह से देखने के लिए अपने एंटीना को इधर-उधर घुमाते देखे जाते थे। इसके बाद तबस्सुम द्वारा पेश किया जाने वाले

कार्यक्रम 'फूल खिले हैं गुलशन- गुलशन` में कई फिल्मी कलाकार टीवी के छोटे परदे पर दिखाई दिए। इसके बाद तो धारावाहिक 'रामायण` ने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड दिए। रविवार को सुबह 9 बजे से 10 बजे तक पूरा देश थम जाता था, यही इस धारावाहिक की लोकप्रियता का सबसे बड़ा पैमाना है।
आज समय बदल गया है, स्टार्स की लोकप्रियता का लाभ हर कोई उठाना चाहता है। यही कारण है कि स्टार्स को भी यह छोटा परदा लुभाने लगा है, इसके लिए भी उन्हें फिल्मों की तरह करोडों रुपए मिलते हैं। भले ही आज उर्मिला मांतोडकर के पास एक भी फिल्म नहीं है, फिर भी वह व्यस्त है। अब तो ये बॉलीवुड स्टार्स स्वयं ही कार्यक्रम का संचालन करते हैं, इससे दर्शक वर्ग उन्हें अपने और करीब पाता है। इसमें कोई दो मत नहीं कि आज टीवी का जो दर्शक है, उन्हें टीवी के और करीब खींच लाने में अमिताभ बच्चन का बहुत बड़ा हाथ है। एक अलग पहचान दी है, उन्होंने अपने कार्यक्रम के माध्यम से। उनके इस कार्यक्रम के पहले टीवी केवल मनोरंजन का ही साधन था, परंतु कौन बनेगा करोडपति के बाद लोग इस बुद्धू बक्‍से को ज्ञान के पिटारे के रूप में भी देखने लगे।
अपना पसंदीदा कलाकार जब टीवी पर रोज ही दिखाई दे, तो कौन होगा, जो अपने चहेते स्टार को करीब से न देखना चाहे, इसमें यह आवश्यक नहीं होता कि वह कौन सा कार्यक्रम पेश कर रहा है, बल्कि यह आवश्यक होता है कि कार्यक्रम कौन पेश कर रहा है। यही वजह है कि टीवी कार्यक्रमों के निर्माताओं के लिए ये स्टार्स आज उनके कार्यक्रम की लोकप्रियता बढ़ाने में उपयोगी साबित हो रहे हैं, और वे उनका भरपूर दोहन भी कर रहे हैं, बदले में ये स्टार भी करोडों में खेल रहे हैं। स्थिति यह है कि टीवी चैनलों के स्टार की लोकप्रियता बड़े परदे के सितारों की चमक के आगे आज कहीं गुम हो गई हैं।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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