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Oct 1, 2026

लघुकथाः अनुत्तरित प्रश्न

- नमिता सिंह 'आराधना' 

आज के अखबार में एक मृत माँ-बेटे की तस्वीर के साथ एक खबर छपी। शीर्षक था, "भूख ने ली माँ- बेटे की जान।"

इस खबर को पढ़कर कुछ लोगों ने प्रशासन को कोसा तो कुछ ने भगवान को निर्दयी ठहराया। लेकिन उस चौराहे पर खड़े लोगों में से कुछ लोग माँ-बेटे की तस्वीर पहचान कर तटस्थ बने रहे तो कुछ शर्म से गड़ गए। यह उसी लड़के की तस्वीर थी, जिसे मात्र दो दिन पहले एक दुकान से पाव चुराने के आरोप में उस चौराहे पर बुरी तरह पीटा गया था। लड़के की उम्र महज आठ-नौ वर्ष की रही होगी। वह लड़का रोता गिड़गिड़ाता रहा, “मेरी माँ बीमार है। वह काम पर नहीं जा पा रही। चार दिनों से हमने कुछ भी नहीं खाया इसीलिए...।”

पर लोगों की संवेदनहीनता अपनी पराकाष्ठा पर थी। और अपनी शक्ति प्रदर्शन का ऐसा सुनहरा मौका भला वो क्यों छोड़ते? लड़के के हाथ से पाव का पैकेट छूट कर कुछ दूर जा गिरा और लोगों के पैरों तले रौंदा जाता रहा। ठीक वैसे ही जैसे भूख उन माँ- बेटे की जिंदगी को रौंद रही थी। कुछ ही समय में पाव ने लोगों के पैरों तले दम तोड़ दिया था और आज दो दिनों बाद माँ-बेटे ने भी ...।

अब हर चौराहे पर एक अनुत्तरित प्रश्न हवा में तैर रहा था, "माँ बेटे की मृत्यु के लिए क्या सिर्फ भूख जिम्मेवार थी?"

 सम्पर्कः अहमदाबाद, मोबाइल- 9724756948

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