November 24, 2012

गजलें



दो गजलें
-जहीर कुरेशी
रात भर स्वपन आते रहे,
नींद में भी जागते रहे।
       प्रश्न थे कुछ असुविधा-जनक
       मन ही मन सिर उठाते रहे।
लोग खुशियों को गाते समय,
आँसुओं को भी गाते रहे।
      जिनको लडऩा था अगला चुनाव,
      वे समर्थन जुटाते रहे।
सारे दिन सोचे-समझे बगैर,
मेघ सूरज पे छाते रहे।
       मौका मिलते ही मैदान में,
       लोग छक्के जमाते रहे।
मन के भीतर अँधेरा रहा,
किन्तु, तन जगमगाते रहे।
                  (दो)
लोग जो मुँह अँधेरा चले,
उनसे आगे सबेरे चले।
      साँस घुटने लगी धूप की,
      जब भी बादल घनेरे चले।
मछलियाँ फँसने के लिये,
जाल लेकर मछेरे चले।
      'जैड प्लस ' की सुरक्षा के बाद-
       उनको हथियार घेरे चले।
चेला-चोली चले नाचते,
जब भी संतों के डेरे चले।
        मिल रहा है सियासत का साथ,
        इसलिए भी लुटेरे चले।
भूखे ने जब विवश कर दिया,
साँप ले कर सपेरे चले।
संपर्क: 108 त्रिलोचन टावर,संगम सिनेमा के  सामने,
   गुरूबक्श की तलैया, स्टेशन रोड, भोपाल-462001
   मोबाइल नं.09425790565

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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