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Jan 1, 2026

प्रकृतिः आते हैं नभ से जल के मेहमान

 - रविन्द्र गिन्नौरे 

    प्रवासी पक्षियों का आगमन बदलते मौसम की सूचना सुखद जलवायु के साथ होता है। हर बरस हजारों मील की यात्रा करके पक्षी भारत सहित दूसरे देशों में सर्दियों में इसलिए आते हैं कि यहाँ का मौसम उनके लिए अनुकूल है। ऐसे पक्षियों की मूल भूमि का तापमान काफी गिर जाता है, जहाँ उन्हें अपना भोजन जुटाने के साथ अनुकूल वातावरण नहीं मिलता। विश्व स्तर पर प्रवास करने वाले पक्षियों के अपने निर्दिष्ट स्थान हैं। नियमित रूप से साल दर साल पक्षी प्रवास कर अपना निवास बनाकर प्रजनन वहीं करते हैं जहाँ उनका भोजन भी उपलब्ध रहता है।

   सदियों से पक्षियों का प्रवास चल रहा है, जिसे मानव ने बहुत बाद में जाना। चार दशक पूर्व तक इन पक्षियों का शिकार काफी होता रहा। शिकार के कारण पक्षियों ने अपनी जगह भले बदली परंतु प्रवास करना नहीं छोड़ा। पक्षियों की संख्या में कमी जरूर होती थी, परंतु उस खतरनाक स्थिति में नहीं पहुँचती थी कि इनकी प्रजाति ही विलुप्त हो जाए। बढ़ते प्रदूषण के कारण पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ खतरे में पड़ गई हैं। बदलते मौसम और फसल चक्र में परिवर्तन के कारण प्रवासी पक्षी अपनी निर्धारित ठौर से भटकने को मजबूर हो गए हैं।

    तूफान और बाढ़ जैसी विभीषिका लगातार होने के कारण पक्षियों के प्रवास में बाधा पड़ती है। वैसे प्राकृतिक घटनाओं का आभास पक्षियों को पहले ही हो जाता है। ऐसे स्थिति में पक्षी तूफान के बाद, प्राकृतिक स्थिति निर्मित होते ही आ जाते हैं। 

      भारत में शरद ऋतु आते ही कुररी पक्षी (arctic tern) उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव के लिए उड़ान भरता है और वसंत आने पर प्रजनन करने अपने घर लौट आता है। यही कोई 35 हजार किलोमीटर की खतरों से भरी तूफानी यात्रा करके हर साल सफ़र करता है कुररी। आश्चर्य है कि कुररी पक्षी दो विपरीत ध्रुवों को जोड़ता है।

    सर्दियों के मौसम में खंजन भी आता है। तुलसी दास रामचरित मानस में लिखते हैं, 

'जानि सरद रितु खंजन आए, 

पाइ समय जनु सुकृत सुहाए।' 

           यह हमारे पुण्यों का सुफल है कि शरद ऋतु में खंजन आए। खंजन हर साल 5000 किलोमीटर दूर साइबेरिया, मंगोलिया आदि से हिमालय पार करके आते हैं। जो देश के जलाशयों को सुंदर तथा जीवंत बनाते हैं।

 खूबसूरत प्रवासी पक्षी-   रंग बिरंगे खूबसूरत अदा लिए तरह तरह के पक्षी नम भूमि में मनोरम दृश्य प्रस्तुत करते हैं। स्वेंसन बाज (Swainsons's hawk) उत्तर-पश्चिमी अमरीका से चल कर अर्जेंटाइना पहुँचते हैं। खंतिया हंसक (shoveller) यूरेसिया से भारत तथा अन्य देशों में प्रवास करते हैं। लाल वारिरंक (red knot) कनाडा के ध्रुवीय क्षेत्रों से दक्षिण अमेरिका के दक्षिण कोने पेटागोनिया तथा तियेरा दैल फ्यूएगो में प्रवास करते हैं। ये प्रवासी पक्षी अपनी ख़तरनाक यात्रा के दौरान भूमध्य रेखा क्षेत्र के सदाबहार वनों को पार करते हैं। किन्तु, वहाँ रुकते नहीं ? क्योंकि पक्षी अपने गृह क्षेत्रों के समान ही प्राकृत वास तथा आहार पाना चाहते हैं। इस लिए ही अलास्का जैसे शीत प्रधान क्षेत्र में ध्रुव कूजिनी (arctic warbler) भूमध्यरेखीय फिलीपींस जैसे ग्रीष्म वर्षा के क्षेत्र में प्रवास करती है। 

आहार और आश्रय के लिए यात्रा पक्षियों के लिए मनोरंजन नहीं है। उनका प्रवास तो जीवन-मरण की यात्रा है। जो मौसम के अनुसार, आहार-शून्य होते प्रजनन क्षेत्र से पर्यावास के लिए साहसिक अभियान के साथ उड़ान भरते है। जब भी पक्षी के गृह क्षेत्र में आहार का 'अकाल' पड़ना शुरू होता है, पक्षियों को विशाल साहसिक उड़ान भरने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

    वास्तव में पृथ्वी पर जितने भी जीव हैं, उनमें खोजने, घूमकर खोजने की सहजवृत्ति बराबर कार्य करती है। इसी सहजवृत्ति के कारण मानव सारी पृथ्वी पर फैले। प्रवास करने वालों की खोज या तो ऐसे आवास की होती है, जहाँ उन्हें बेहतर या घर जैसा माहौल मिल सके, जहाँ वे अपने घर जैसे आहार-शून्य मौसम में निर्भर रह सकें। पक्षियों को फल और कीट तो हमेशा रूचिकर लगते हैं। उनके शावकों को प्रचुर मात्रा में प्रोटीन भरे कीट भी जरूरी होते हैं। अपने शावकों को वे भरपूर मात्रा में कीट मिले! संभवतः इसीलिए वयस्क पक्षी फलाहारी भी हो जाते हैं।

मौसम और जलवायु-

उत्तरी गोलार्द्ध में जब उत्तरी क्षेत्र में अत्यधिक ठंड पड़ती है, तब दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करें तो पहले समशीतोष्ण तथा बाद में भूमध्यरेखीय गर्म जलवायु मिलती है और उड़ते  रहें तो दक्षिणी गोलार्द्ध की ग्रीष्मकालीन भूमध्यरेखीय उष्ण जलवायु मिलती है। इससे भी और आगे उड़ते रहने पर समशीतोष्ण जलवायु मिलती है।

   अतएव अधिकतर पक्षी प्रवास उत्तर-दक्षिण दिशाओं में होते हैं। जैसे अभी तक की जानकारी के अनुसार पोइड क्रेस्टेड ककू दक्षिण अफ्रीका से मानसून आते ही भारत में प्रवास के लिए आते हैं जो वर्षा ऋतु पश्चात् लौट जाते हैं। चातक पक्षी अपने प्रवास क्षेत्र में प्रजनन करते हैं। यह उस नियम का अपवाद है, जिसमें माना जाता है कि प्रवासी पक्षी अपने गृह क्षेत्र में ही प्रजनन करते हैं; लेकिन इन्हें प्रजनन क्षेत्र में शावकों के साथ पालन के लिए पूरा समय नहीं मिलता। इस समस्या के हल के लिए मादा चातक अपना अंडा दूसरे पक्षी के घोंसले में देकर निश्चिंत हो जाती है।

     पक्षियों के प्रवास मार्ग का निर्धारण पर्वत श्रृंखलाओं, सागर तटों, हवाओं की दिशा, नदियों तथा विकास प्रक्रिया आदि से होता है। आहार की सुलभता, शिकारी पक्षियों, जानवरों तथा मनुष्यों से सुरक्षा तथा लाखों पक्षियों के ठहरने के स्थान भी प्रवास मार्ग का निर्धारण करते हैं। यथा संभव हवा की दिशा के अनुकूल उड़ना ही पक्षियों के लिए लाभकारी होता है। हवा का वेग उनके वेग में जुड़कर उनके यात्रा वेग को बढ़ाकर उनकी यात्रा समय कम कर देता है।

भारत में आने वाले प्रवासी पक्षी -

  भारत में प्रवास करने वाले पक्षियों में ग्रेट व्हाइट पेलिकन जो मुख्य रूप से यूरोप और मध्य एशिया से आते हैं इन्हें असम और उत्तर प्रदेश में देखा जाता हैं। द रफ, यूरोप और साइबेरिया से आते हैं यह उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा जाते हैं। ब्लूथ्रोट अलास्का से राजस्थान के भरतपुर पहुंचते हैं।ग्रेटर फ्लेमिंगो अफ्रीका और यूरोप से आकर गुजरात के पक्षी अभयारण्यों में विचरण करते हैं। द गैडवाल यूरोप और उत्तरी अमेरिकी से मध्यप्रदेश और ओडिशा की ओर जाते हैं। स्पॉटेड रेडशैंक आर्कटिक और यूरोप आकर हरियाणा के जलाशयों में रहते हैं। रोजी पेलिकन यूरोप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ठहरते हैं। ब्लू-टेल्ड, बी-इटर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से आते हैं, जिन्हें दक्षिण भारत की नमभूमि में देखा जा सकता हैं। साइबेरियन सारस (साइबेरियन क्रेन): पश्चिमी साइबेरिया से आते हैं जो भरतपुर नेशनल पार्क की शोभा बढ़ाते हैं। यूरेशियन स्पैरोहॉक ज्यादातर उत्तरी एशिया, यूरोप, साइबेरिया और टुंड्रा क्षेत्रों से लंबा सफर करके भारत में आते हैं और मार्च तक भारत में रहते हैं।

छत्तीसगढ़ में आने वाले प्रवासी पक्षी- 

   छत्तीसगढ़ में सर्दियों के मौसम में कई प्रवासी पक्षी आते हैं जो हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय करके यहाँ डेरा डालते हैं। प्रमुख प्रवासी पक्षियों में गार्गनीज़, टफ्टेड डक, साइबेरियन स्टोनचैट, ब्लैक स्वान, कार्लोलाइन डक, क्रिस्टेड डक, मस्कोवी डक आदि शामिल हैं। इसके अलावा, गिधवा परसदा, बारनवापारा में दुर्लभ मलार्ड पक्षी आने लगे हैं, जो यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका के ठंडे इलाकों से आते हैं। सरगुजा संभाग में पाइड एवोसेड और मार्श हैरियर जैसे  विदेशी प्रवासी पक्षियों का भी आगमन होता है। धमतरी जिले में यूरोप, रूस, अमेरिका, साइबेरिया और अन्य दूर देशों से कई प्रवासी पक्षी आते हैं जैसे पैसेफिक गोल्डन प्लोवर, व्हिम ब्रेल, डनलीन, रिवर लैपविंग और टैमनिक स्टींट।ये पक्षी छत्तीसगढ़ के जंगलों, जलाशयों और दलदली इलाकों में प्रजनन और प्रवास करते हैं, जिससे प्रदेश की जैव विविधता समृद्ध होती है।    

    छत्तीसगढ़ वन विभाग और स्थानीय लोग अब पक्षी संरक्षण के लिए जागरूक हुए हैं। 

छत्तीसगढ़ के प्रवासी पक्षी- गार्गनीज़, टफ्टेड डक, साइबेरियन स्टोनचैटब्लैक स्वान, कार्लोलाइन डक, क्रिस्टेड डक, मस्कोवी डकमलार्ड (दुर्लभ प्रजाति) पाइड एवोसेड, मार्श हैरियर पैसेफिक गोल्डन प्लोवर, व्हिम ब्रेल, डनलीन, रिवर लैपविंग, टैमनिक स्टींट आदि हैं। छत्तीसगढ़ प्रवासी पक्षियों की विविधता जैविक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। 

       पक्षियों के आगमन से तालाब, झील का इलाका चहचहाहट से गूँज उठता हैं। मनमोहक पक्षियों को निहारने का आनन्द हर साल आता है सर्दियों में।

ravindraginnore58@gail.com

9 comments:

  1. Anonymous11 January

    Very nice

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  2. Anonymous11 January

    ज्ञानवर्धक, रोचक, महत्वपूर्ण एवं कौतूहल जगाता बहुत सुंदर आलेख ।सुदर्शन रत्नाकर

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    1. आपका दिल से हार्दिक धन्यवाद जी🙏

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  3. डॉ सुनीता वर्मा11 January

    पक्षियों के लिए रविन्द्र गिनौरे जी का यह आलेख अत्यंत संवेदनशीलता से भरा और जानकारी से भरपूर है लेख है। यह हमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता और पक्षियों के लिए प्यार और सुरक्षा के संदेश देता हुआ ।लगा रत्ना जी आपको बधाई हो आप इतने सुंदर लेख से ख़ूबसूरत उदंती पत्रिका को सजाया है ।💐💐

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    1. शुक्रिया सुनीता। उदंती आप सब पाठकों के स्नेह और इसमें बेहतर लिखने वाले रचनाकारों के सहयोग से खूबसूरत बनता है। इसके लिए आप सबका हार्दिक धन्यवाद और आभार।🙏

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  4. Khoobsurat ...sunder lekh hai

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  5. धन्यवाद प्रतिमा 🌷❤️

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  6. ज्ञानवर्धक लेख।

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