February 02, 2014

कविता

          भोर शरद की
                             - डॉ. बच्चन पाठक सलिल
                      भोर शरद की
                      उतर रही है
                      धरती पर धीरे धीरे 
                      मानो कोई नव परिणीता
                      पति-गृह में सकुचाती आती।
                      किरणों की डोली में बैठी
                      जिसके कहार ये तारक सारे
                      और आसमान का बूढ़ा चाँद
                      करुण दृष्टि से ताक रहा है
                      पर घर जाती निज दुहिता को।
                      तुहिन पट आवृत्त छलकती आँखें
                      अंतर में है छिपा एक कौतूहल,
                      जिसमे भय है, विस्मय भी।
                      अब आलोक निखर आया है
                      पंछी गाते मंगल गान
                      इस समष्टि का हो कल्याण।
                      नाच रही है सारी धरणी
                      विहँस रही है यह पुष्करिणी
                      घर से निकले सब नर- नारी
                      शुचिस्मिता के अभिनन्दन में
                      आओ, आओ, आओ
                      शरद सुहागिन आओ

लेखक के बारे में: वरिष्ठ साहित्यकार, कवि, कथाकार, व्यंग्यकार डॉ बच्चन पाठक 'सलिलरांची विश्व विद्यालय के अवकाश प्राप्त पूर्व हिंदी प्राचार्य हैं। स्नेह के आँसू, धुला आँचल, सेमर के फूल, मेनका के आँसू (उपन्यास) तथा कई काव्य एवं कहानी संग्रह प्रकाशित।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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