February 23, 2012

दुनिया की तीसरी सबसे छोटी बच्ची

जन्म लेने वाले दुनिया के सबसे छोटे बच्चों में से एक बच्ची जिसका जन्म लॉस ऐंजिलिस में 30 अगस्त को हुआ था को पिछले दिनों अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उसने करीब पांच माह इन्क्यूबेटर में गुजारे हैं। गुलाबी कपड़ों में लिपटी बच्ची का नाम मेलिंडा स्टार गुइडो है। जिस समय बच्ची पैदा हुई, तब वह महज 269 ग्राम की थी। उसका साइज एक बड़े चूहे के बराबर था। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि वो ज्यादा दिन नहीं बचेगी, लेकिन फिर भी डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। हथेली पर समा जाने वाली इ बच्ची को पांच महीने तक इंक्यूबेटर में रखा गया। लंबे इलाज के बाद इस नन्ही परी के स्वास्थ्य में काफी सुधार आया और वो भी सामान्य बच्चों की तरह हाथ पैर चलाने लगी। माना जा रहा है कि वह जीवित रहने वाली दुनिया की तीसरी और अमेरिका की दूसरी सबसे छोटी बच्ची है। उसकी मां ने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि अंतत: हम उसे घर ले जा रहे हैं।'


पुरुष ने जन्म दिया एक बच्चे को

ब्रिटेन में पहली बार एक पुरुष ने बच्चे को जन्म दिया है। दरअसल, इस पुरुष का जन्म एक महिला के रूप में हुआ था, लेकिन एक ऑपरेशन कर उसने अपना लिंग बदलवा लिया था। लिंग बदलवाते वक्त उसने अपना गर्भाशय नहीं निकलवाया था। बच्चे को जन्म देने के लिए उसने अपनी हारमोन चिकित्सा करवाकर अपने गर्भाशय को फिर से सक्रिय किया।
पुरुष की उम्र 30 वर्ष से अधिक है। उसने पिछले साल ही बच्चे को जन्म दिया था, लेकिन इसे हाल में सार्वजनिक किया गया। बीटी अपनी पत्नी नैंसी के साथ एरीजोना में रहता है। इस दम्पत्ति ने अज्ञात दानकर्ता के वीर्य का उपयोग किया था।
ऐसा करने वाला वह ब्रिटेन का पहला पुरुष है, लेकिन अमेरिका में एक 38 वर्षीय पुरुष 2007 में गर्भवती हुआ और तीन बच्चों सुसान, ऑस्टिन तथा जेंसन को जन्म दिया।


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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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