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Mar 7, 2024

रपटः बस्तर के साथी गुरुकुल विद्यालय का रंगारंग वार्षिक उत्सव

 संस्कृति, परंपरा से जुड़े रहने के साथ 

रोजगारमूलक शिक्षा मुख्य उद्देश्य 

पिछले दिनों बस्तर कोण्डागाँव के कुम्हारपारा में ‘साथी समाज सेवी संस्था’ द्वारा संचालित स्कूल ‘साथी राउंड टेबल गुरुकुल’ के 20 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भव्य रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जो पद्मश्री धरमपाल सैनी जी के मुख्य आतिथ्य एवं पद्मश्री हेमचंद मांझी वैद्यराज जी के विशेष आतिथ्य में तथा किसान नेता डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी जी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। 

गुरुकुल के बच्चों द्वारा शिक्षकों के नेतृत्व में शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक से बढ़कर एक बेहतरीन प्रस्तुतियाँ दी गई। इस उत्सव की खास बात यह थी कि स्कूल में पढ़ने वाले नर्सरी से लेकर आठवीं तक के सभी बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लिया था। 

 इस भव्य कार्यक्रम में कोंडागाँव जिले के 3 नेशनल अवॉर्ड प्राप्त शिल्पकारों श्री तिजुराम विश्वकर्मा, श्री पंचूराम सागर तथा श्री राजेंद्र बघेल को शिल्प शिरोमणि सम्मान से सम्मानित किया गया तथा 2 शिक्षको ठाकुर राजेंद्र सिंह राठौर एवं श्री आर के जैन जी को शिक्षा गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। बस्तर संभाग की दो महान विभूतियों पद्मश्री धरमपाल सैनी जी को उनके द्वारा किए गए कार्यों के लिए विनोबा सम्मान तथा पद्मश्री हेमचंद मांझी जी को धनवंतरी सम्मान से सम्मानित किया गया।  कोंडागाँव के प्रख्यात किसान डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी जी को बस्तर भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। 

 इस अवसर पर स्वागत भाषण में साथी समाज सेवी संस्था के सचिव श्री हरिलाल भारद्वाज ने उपस्थित आगंतुकों तथा अभिभावकों का स्वागत किया।  डॉक्टर रत्ना वर्मा संस्थापक सदस्य साथी संस्था ने गुरुकुल विद्यालय की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार रखे । उन्होंने स्कूल के साथ अपने अनुभव को सबके साथ साझा करते हुए कहा कि  20 वर्ष पहले, जब साथी गुरुकुल की रूपरेखा तैयार हो रही थी, तब यह एक सपने की तरह था,  परन्तु साथी समाज सेवी संस्था के तीन आधार स्तंभ भूपेश भाई, हरि भाई, और सदैव हम सबके दिलों में रहने वाले स्व. भाई भूपेंद्र बंछोर के दृढ़ निश्चय और लगन का ही परिणाम है कि आदिवासी क्षेत्र के उन बच्चों के लिए, जो स्कूल जाने में असमर्थ थे, स्कूल स्थापित करने का यह सपना साकार हो सका।  मैंने इस स्कूल को उस समय से देखा है, जब एक छोटे से कमरे में 13 छोटे- छोटे बच्चों के साथ इसका शुभारंभ हुआ था। 

डॉ. रत्ना ने आगे कहा कि  गुरुकुल स्कूल की शिक्षा पद्धति ही इस स्कूल को खास बनाती है,  परन्तु स्कूल के इस 20 साल के सफर में संस्था के सामने कई मुसीबतें आईं,  जिसमें सबसे मुश्किल घड़ी थी - कोविड का वह कठिन दौर, जब पूरा विश्व इससे लड़ाई लड़ रहा था । साथी गुरुकुल ने भी इस कठिनाइयों का सामना किया। एक दौर तो ऐसा भी आया कि लगने लगा क्या स्कूल बंद हो जाएगा? पर इस कठिन समय में भी संस्था ने हार नहीं मानी। डॉ. वर्मा ने यह भी बताया कि स्कूल के इस कठिन दौर में उनके परिवार के सदस्यों के साथ उनकी मासिक पत्रिका उदंती के माध्यम से देश के अनके प्रबुद्ध लेखकों ने बड़ी संख्या में आगे आकर स्कूल को संचालित करने में अपना महत्त्वपूर्ण  योगदान दिया था और आज भी दे रहे हैं। 

साथी के सूत्र वाक्य  - “अकेले हम बहुत कम कर सकते हैं, पर साथ मिलकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं।” को उदघृत करते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से अनुरोध किया कि स्कूल का भविष्य उज्ज्वल हो और आपके बच्चे एक बेहतर नागरिक बनकर आपका नाम रोशन करें यही मनोकामना है; परंतु यह तभी संभव है जब आप सबका प्यार और साथ मिले। उन्होंने इस भगीरथ प्रयास में सबको सहभागी बनने की अपील करते हुए अपनी बात समाप्त की। 

तदुपरांत संस्था के अध्यक्ष भूपेश तिवारी ने विद्यालय की 20 वर्षों की यात्रा के साथ विद्यालय की उपलब्धियों, चुनौतियों सहित भविष्य की कार्य योजना की 

जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2004 में ग्रामीण एवं वंचित समुदाय के जरूरतमंद बच्चों को रोजगारमूलक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से साथी संस्था द्वारा गुरुकुल की स्थापना की गई थी, जहाँ बच्चों को सीखने का अवसर देने के साथ- साथ उनकी प्रतिभा को तराशा जाता है। सिर्फ 13 बच्चों से शुरू किए गए विद्यालय में वर्तमान में लगभग 250 बच्चे अध्ययनरत हैं।  

उन्होंने आगे कहा कि संस्था ने अपने अनुभव से महसूस किया कि ग्रामीण बच्चे बाहरी लोगों के सामने अपनी झिझक एवं शर्म के कारण अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन ठीक से नहीं कर पाते तथा शिल्पी समुदाय के बच्चे अपने परिवार के परंपरागत काम से दूर भी होते जा रहे हैं, ऐसे में संस्था ने महसूस किया कि बच्चो में अपनी संस्कृति, परंपरा, कौशल के प्रति सम्मान का भाव पैदा होना आवश्यक है। इन्ही सब उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए यह स्कूल प्रारंभ किया गया, जो आज अपने 20 वर्ष पूर्ण कर रहा है।  अब तक कुल 1200 से अधिक बच्चे, जो इस स्कूल से शिक्षा प्राप्त कर निकले हैं, उच्च शिक्षा प्राप्त कर आज विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहे हैं। कोई सफलतापूर्वक व्यवसाय कर रहा है, तो कई  उच्च शिक्षा प्राप्त कर सम्मानजनक नौकरी कर अपने परिवार की आर्थिक सहायता कर रहे हैं। 

 भूपेश जी ने पिछले वर्षों में स्कूल के सामने आई कई चुनौतियों  के बारे में बताते हुए कहा कि हर मुसीबत का सामना करते हुए यह विद्यालय अपने मूल उद्देश्यों को पूरा करने में आज भी लगा हुआ है। आर्थिक परेशानियों के समय साथी परिवार से जुड़े लोग अपनी सामर्थ्य अनुसार विद्यालय को दान भी दे रहे हैं, जिसके कारण हम विद्यालय का सफलता पूर्वक संचालन कर पा रहे हैं।  

इसके बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री धरमपाल सैनी जी ने बच्चों की अद्भुत प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि बिना भय के भरपूर आत्मविश्वास के साथ इस स्कूल के बच्चे जैसा प्रदर्शन कर रहे हैं वह काबिले तारीफ है। डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी जी ने साथी संस्था के संस्थापकों के बारे में बताया कि  मैंने जब अपनी बैंक की जॉब छोड़ी, तो उसके लिए प्रेरणा मुझे भाई भूपेश तिवारी और उनके साथियों से मिली।

सांस्कृतिक कार्यक्रम आरंभ होने के पूर्व सभी अतिथियों ने बच्चों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया एवं बच्चों का उत्साहवर्धन भी किया।  कार्यक्रम के अंत में स्कूल की प्राचार्य  श्रीमती प्रभा कुंभकार ने  उपस्थित आदरणीय अतिथियों के साथ सभागार में कार्यक्रम का आनंद ले रहे अभिभावकों एवं क्षेत्र के उपस्थित सम्माननीय जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया। चार घंटों तक चले इस भव्य कार्यक्रम का संचालन मधु तिवारी एवं संतोष तिवारी ने बहुत ही कुशलता से किया। 

वार्षिक उत्सव के पहले दिन गुरुकुल में बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों, कबाड़ से जुगाड़, बस्तर की संस्कृति से संबंधित वस्तुओं के साथ बस्तर की समृद्धि को दर्शाती एक शानदार प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था।  प्रदर्शनी का उद्घाटन कोंडागांव के विख्यात किसान डॉक्टर राजाराम त्रिपाठी जी के हाथों संपन्न हुआ।  अध्यक्ष भूपेश तिवारी ने बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, साथ ही त्रिपाठी जी ने बच्चों के साथ संवाद कर उन्हें बेहतर इंसान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।  बच्चों ने भी अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए कई प्रकार के सवाल उनसे पूछे।  इसके साथ ही बच्चों द्वारा इस अवसर पर स्वादिष्ट आनंद मेले का भी आयोजन किया गया था जिसमें बच्चों ने विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन बना कर बना कर सबका मन मोह लिया, अलग अलग व्यंजनों का स्वाद लेकर बच्चों के साथ उनके परिवारजनों ने भरपूर आनंद उठाया। 

 इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विद्यालय के सभी शिक्षकों सहित संस्था के समस्त कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ■ ( उदंती फीचर्स)

विशेष लेखः छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ा कदम

 

 - डॉ. दानेश्वरी संभाकर

सहायक संचालक

महिला सशक्तिकरण से महिलाओं में उस शक्ति का प्रवाह होता है, जिससे वो अपने को सकारात्मक भूमिका देने में अहम योगदान कर सकती है। जीवन से जुड़े हर फैसले स्वयं ले सकती हैं और परिवार और समाज में अच्छे से रह सकती हैं। समाज में उनके वास्तविक अधिकार को प्राप्त करने के लिए उन्हें सक्षम बनाना ही महिला सशक्तिकरण है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की वजह से आज भारत देश विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में है। विकसित भारत बनाने के साथ विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लिए यहां की माताओं और बहनों का बड़ा योगदान रहने वाला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए राज्य में महतारी वंदन योजना की शुरुआत की गई है। छत्तीसगढ़ में तीज-त्यौहारों और खुशी में महिलाओं को तोहफे, पैसे और नेग देने का रिवाज है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से उसी परंपरा छत्तीसगढ़ शासन निभा रही है। 

महतारी वंदन योजना के तहत राज्य में विवाहित महिलाओं को 1,000 रुपए प्रतिमाह (कुल 12,000 रुपए सालाना) वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (क्ठज्) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य राज्य में महिलाओं के बीच लैंगिक भेदभाव, असमानता और जागरूकता के स्तर का बढ़ावा, महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करना है। इसका लाभ उन विवाहित महिलाओं को मिलेगा जो 1 जनवरी, 2024 तक 21 वर्ष या उससे अधिक आयु के साथ छत्तीसगढ़ की मूल निवासी हैं। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएँ भी योजना के लिये पात्र हैं। महिलाएं खुश है कि वो महतारी वंदन योजना से मिली राशि से अपने बच्चों और परिवार की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी कर पाएगी।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि 2024-25 बजट में उनकी सरकार का फोकस GYAN यानि गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी सशक्तिकरण पर केन्द्रित है। बजट में सभी वर्गों की चिन्ता की गई है। यह बजट सरकार का विजन डॉक्यूमेंट भी है, जो छत्तीसगढ़ के चौमुखी विकास की परिकल्पना को दर्शाता है। उन्होंने कहा है कि उनका प्रयास आने वाले पांच वर्षों में राज्य की जीडीपी को दोगुना करने का होगा। इसी लिए राज्य की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बजट में महतारी वंदन योजना के लिए 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

महतारी वंदन योजना के तहत आवेदन भरने के प्रथम चरण में लगभग 70 लाख  महिला हितग्राहियों की अनंतिम सूची जारी की जा चुकी है एवं इनका प्रकाशन आंगनबाड़ी केंद्रों एवं ग्राम पंचायत स्तर पर किया जा चुका है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पहले यानी 7 मार्च को इन महिलाओं के खाते में एक-एक हज़ार रुपए अंतरित की जाएगी।

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आलेखः महतारी वंदन योजना- महिलाओं को मिली खुशियों की गारंटी

 


 - श्रीमती रीनू ठाकुर

सहायक जनसंपर्क अधिकारी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ की महिलाओं को दी गई गारंटी को पूरा कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में नई सरकार ने महिला सशक्तिकरण का एक नया रास्ता तैयार किया है। इससे महिलाओं में भारी उत्साह है। महतारी वंदन योजना के तहत आगामी 01 मार्च से प्रदेश की पात्र विवाहित महिलाओं को 12 हजार रूपए वार्षिक भुगतान किये जाएंगे। महिलाओं के खाते में हर माह  डीबीडी के माध्यम से एक हजार रूपए आएंगे। इससे महिलाओं की छोटी-छोटी खुशियों को अब गारंटी मिल गई है। 

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महतारी वंदन योजना के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में 3,000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इससे महिलाओं की न सिर्फ रोजमर्रा की छोटी-मोटी जरूरतें पूरी होंगी बल्कि उन्हें आर्थिक संबल भी मिलेगा। महतारी वंदन योजना को लेकर महिलाओं के उत्साह का प्रमाण है कि 05 फरवरी को पहले ही दिन 1 लाख 81 हजार से अधिक महिलाओं ने आवेदन किया। दिन-प्रतिदिन योजना की लोकप्रियता के साथ फार्म भरने का सिलसिला भी बढ़ता रहा। योजना के तहत 20 फरवरी को अंतिम तिथि तक 70 लाख से अधिक महिलाओं ने आवेदन जमा कर दिया। आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद हितग्राहियों को दावा आपत्ति का समय दिया गया। दावा आपत्ति के निराकरण के पश्चात् पात्र हितग्राहियों की अंतिम सूची जारी की गई। अंतिम सूची के आधार पर पात्र हितग्राहियों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के एक दिन पहले 07 मार्च को राशि का अंतरण किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ की लगभग 70 लाख पात्र महिलाओं को लाभ होगा।

राज्य सरकार द्वारा योजना के सुचारू क्रियान्वयन और हितग्राहियों की सुविधा के लिए पुख्ता व्यवस्था की गई। राज्य स्तर पर महिला एवं बाल विकास विभाग को योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग बनाया गया। जिला स्तर पर कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी और शहरी क्षेत्रों में आयुक्त नगर निगम और मुख्य नगरपालिका अधिकारी सहायक नोडल अधिकारी बनाए गए। आवेदन के लिए ऑनलाईन पोर्टल  s://www.mahtarivandan.cgstate.gov.in  तथा मोबाईल एप बनाया गया है। 

पोर्टल में हितग्राहियों को आवेदन की स्थिति की जानकारी की सुविधा भी दी गई है। साथ ही राज्य स्तर पर योजना से संबंधित समाधान के लिए टोल फ्री हेल्प लाइन नंबर 1800233448 भी जारी किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा पात्रता संबंधी नियमों को बताने के लिए कर्मचारी नियुक्त किये गए हैं। आंगनबाड़ी और ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों का भी आयोजन किया गया। घर-घर सर्वे कर भी फार्म भरवाए गए। इसके साथ ही प्रतिदिन राज्य स्तर पर योजना की समीक्षा और निगरानी की जा रही है। 

महिलाएं विशेषकर विवाहित महिलाएं घर-परिवार की देखभाल, प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन आर्थिक मामलों में उनकी सहभागिता अभी भी बहुत कम है। महिलाओं के स्वास्थ्य की बात की जाए तो 2020-21 में हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 के अनुसार 23.1 प्रतिशत महिलाएं मानक बॉडी मास इंडेक्स से कम स्तर पर हैं। 15 से 49 वर्ष के आयु की महिलाओं में एनीमिया का स्तर 60.8 प्रतिशत और गर्भवती महिलाओं में यह 51.8 प्रतिशत है। महिलाएं अपनी छोटी-मोटी बचत का उपयोग ज्यादातर परिवार और बच्चों के पोषण में खर्च करती हैं। ऐसे में महतारी वंदन योजना उनके लिए खुशियों की गारंटी बनकर आई हैं। 

महिलाओं ने प्रतिमाह एक हजार रूपए मिलने से अपनी पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने की तैयारी भी कर ली है। धमतरी में रुद्री निवासी लोमेश्वरी ओझा कहती हैं कि मेरी छोटी-छोटी खुशियां इस राशि से पूरी होगी। मैं अपने बच्चों के लिए भी राशि खर्च कर सकूंगी। रायपुर की सविता साहू का कहना है कि कि तीज-त्यौहार में उन्हें, मायके से जो भेंट मिलती है, उसको वह मनचाहा खर्च करती हैं। ऐसे में मुझे मुख्यमंत्री श्री साय भी भाई की तरह लग रहे हैं, जो हर महीने तीज की राशि हजार रुपए देंगे। यह राशि महिलाओें के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के साथ परिवार के निर्णयों में उनकी भूमिका के सुदृढ़ीकरण में भी सहायक साबित होगी।

महतारी वंदन योजना से मिली राशि से महिलाओं को परिवार के साथ खुद के स्वास्थ्य, पोषण और जीवन स्तर को उठाने का एक मजबूत आधार मिलेगा। महिलाओं की आर्थिक मजबूती से समाज में उनके प्रति भेदभाव में कमी और जागरूकता आएगी। निश्चित रूप से आने वाले दिनों में महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की आधी आबादी की आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। ■

शोधः वृद्धावस्था थामने की कोशिश

 हर किसी की तमन्ना होती है कि लंबा जिए; लेकिन शरीर जवां और तंदुरुस्त बना रहे। अब यह तमन्ना सेनोलिटिक्स औषधियों से पूरी होने का दावा किया जा रहा है।

जीर्णता (या सेनेसेंस) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया है। जीर्ण पड़ चुकी कोशिकाएँ हमारे शरीर में घूमती रहती हैं और ऐसे पदार्थ स्रावित करती हैं जो स्वस्थ कोशिकाओं को भी जीर्ण कर सकते हैं; कुछ उसी तरह जैसे एक सड़ा हुआ फल बाकी फलों को भी सड़ाना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में अवरोध पैदा करने वाले पदार्थों को कहते हैं सेनोलिटिक्स – वृद्धावस्था-रोधी।

सेनोलिटिक्स में (कृत्रिम या प्राकृतिक) सेनोलिटिक एंजेट की मदद से जीर्ण कोशिकाओं को हटाया जा सकता है, और इस तरह स्वस्थ कोशिकाओं पर जीर्ण कोशिकाओं के प्रभावों को रोककर वृद्धावस्था को टाला जा सकता है।

वर्तमान में शोधकर्ताओं ने सेनोलिटिक्स की मदद से वृद्ध हो रहे अलग-अलग अंगों की बहाली या तंदुरुस्ती लौटाने में सफलता पा ली है। जैसे मेयो क्लिनिक में एक ही परिस्थिति में एक ही उम्र के दो कृन्तकों पर अध्ययन किया गया था। देखा गया कि जो कृन्तक स्वाभाविक रूप से वृद्ध हो रहा था वह दुबला और बूढ़ा दिख रहा था, जबकि सेनोलिटिक उपचार वाला दूसरा कृन्तक स्फूर्तिभरा था।

अन्य शोधों में पाया गया है कि सेनोलिटिक्स के साथ उपचार से रक्त में इतना बदलाव हो जाता है कि ऐसे चूहों का रक्त प्राप्त करने वाले करीब दो साल के चूहे आठ महीने के चूहे लगने लगते हैं। इसके अलावा, दृष्टि बहाल करने से लेकर मेरुदंड में डिस्क ठीक से बिठाने तक के प्रयास सेनोलिटिक्स की मदद से किए जा रहे हैं।

यहाँ तक कि हृदय के मामले में सेनोलिटिक्स कारगर लगते हैं। पूरे शरीर में कुशलतापूर्वक रक्त पहुँचाने के लिए हृदय की रक्त पम्प करने वाले ऊतकों को सटीक लयबद्धता से काम करना पड़ता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है और इनकी कोशिकाएँ बूढ़ी होती जाती हैं, यह लय गड़बड़ा सकती है। नतीजतन शरीर बीमारियों का घर बन सकता है। एक अध्ययन में देखा गया है कि अन्य उपयोगों के लिए स्वीकृत दो औषधियाँ हृदय को फिर तंदुरुस्त बना देती हैं। दोनों औषधियों का मिश्रण पुरानी पड़ चुकी कोशिकाओं को हटा देता है, जिससे उनकी पड़ोसी कोशिकाएँ सामान्य तरह से कार्य करने लगती हैं।

समग्र बुढ़ापे को पलटना, यानी उम्र बढ़ाने का मामला थोड़ा पेचीदा है। बुढ़ापे का अंतिम पड़ाव है- मृत्यु। किसी भी उपचार का अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं को ऐसे पड़ाव या बिंदु की ज़रूरत होती है जिन पर वे उपचार की सफलता या विफलता तय कर सकें; लेकिन शोधकर्ता किसी व्यक्ति की मृत्यु का समय नहीं माप सकते, क्योंकि यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि उपचार से कोई कितना जीया और बिना उपचार के कितना जीता। बड़ी आबादी पर अध्ययन करके ही जाना जा सकेगा कि क्या अपनाए गए उपचार ने वास्तव में मृत्यु को टाला। कुछ संभव सेनोलिटिक उपचारों को 2026 के आसपास एफडीए से मंज़ूरी मिलने की संभावना है। (स्रोत फीचर्स)  ■


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छत्तीसगढ़
के आदिवासी क्षेत्र बस्तर के कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा गाँव में ‘साथी समाज सेवी संस्था’ लगभग 40 वर्षों से आदिवासी जन- जीवन के संरक्षण -संवर्धन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए निरंतर काम कर रही है। साथी एक गैर-सरकारी संगठन है जो बस्तर के कमजोर समुदाय के साथ काम करके उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने में मदद करता है। संस्था ने सामुदायिक सशक्तिकरण के लिए शिक्षा को आवश्यक उपकरण मानते हुए कई कार्यक्रम और परियोजनाएँ आरंभ किए हैं, क्योंकि संस्था का मानना है कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है जो वहाँ के लोगों को अपनी जमीन, स्थानीय संस्कृति और आजीविका के साथ जोड़े रखती है । इसी कड़ी में संस्था द्वारा आदिवासी बच्चों को समाज और देश की मुख्य धारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सन 2004 में कुम्हारपारा में एक मिडिल स्कूल की स्थापना की गई ।

 ‘साथी राउंड टेबल गुरूकुल’ नाम से संचालित इस स्कूल में विगत 25 वर्षों से हजारों बच्चे शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और कर रहे हैं। यह स्कूल अपने उद्देश्य में सफलता हासिल करे और यहाँ पढ़ने वाले बच्चे एक सफल नागरिक बनकर निकले, इसके लिए आवश्यक है स्कूल में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो, जो बगैर आर्थिक सहयोग से संभव नहीं है।  इसके लिए देशभर से लोगों ने अपने हाथ आगे बढ़ाए हैं और इस स्कूल को कई बार मुसीबत से बचाया है। 

 पिछले कई वर्षों से  नियमित आर्थिक सहयोग  देने वाले सम्माननीय सदस्यों के नाम हैं-  श्रीमती प्रियंका-गगन सयाल- लंदन मैनचेस्टर। श्रीमती सुमन परगनिहा- रायपुर। डॉ. प्रतिमा- अशोक चंद्राकर- रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा- रायपुर श्रीमती अरुणा तिवारी रायपुर। श्री राजेश चंद्रवंशी- रायपुर, क्षितिज चंद्रवंशी- रायपुर, आयुश चंद्रवंशी- रायपुर। अक्षत वर्मा- रायपुर। 

कोरोना काल में आई मुसीबत के समय से मासिक पत्रिका उदंती के अनके रचनाकारों ने तुरंत अपना अमूल्य सहयोग देकर विद्यालय को त्वतरित सहायता पँहुचाई थी और तब से लेकर आज तक अपनी सहायता पहुँचा रहें हैं, उन सम्माननीय सदस्यों के नाम हैं - श्री रामेश्वर काम्बोज हिमांशु, श्री विजय जोशी, श्रीमती सुषमा गुप्ता, श्री शिवजी श्रीवास्तव,  श्री सुकेश कुमार साहनी, श्रीमती सुदर्शन रत्नाकर,  श्रीमती कमला निखुर्पा।

संस्था आप सभी के सहयोग के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद और आभार व्यक्त करती है। 

इस पत्र के माध्यम से मैं अन्य से भी सहयोग की अपील करती हूँ। ताकि बस्तर के बच्चों को बेहतर सुविधा और शिक्षा दिलाने में आप भी सहभागी बन सकें। इस संदर्भ में यदि आप कुछ भी जानकारी चाहते हैं तो  कृपया नीचे दिए गए इस ईमेल आईडी में सम्पर्क कर सकते हैं - email- drvermar@gmail.com