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Dec 25, 2010

दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर खतरनाक हो सकता है

दो घंटे से ज्यादा कंप्यूटर खतरनाक हो सकता है
दिन भर में दो घंटे से ज्यादा वक्त कंप्यूटर गेम्स खेलने या टीवी देखने में बिताने वाले बच्चे गंभीर मानसिक बीमारी के शिकार हो सकते हैं। दूसरे कामों में दिखाई गई सक्रियता भी उन्हें इस खतरे से नहीं बचा सकती। तो माता- पिता सचेत हो जाईए।
में हुए एक रिसर्च में ये बातें सामने आई हैं। ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के छात्रों ने 10 से 11 साल की उम्र वाले 1000 बच्चों पर रिसर्च करने के बाद इस सच्चाई का पता लगाया है। रिसर्च के लिए चुने गए बच्चों को सात दिनों तक एक सवालों की लिस्ट में आंकड़े भरने को कहा गया। इन सवालों में पूछा गया था कि कितने समय तक उन्होंने टीवी या कंप्यूटर देखा। इसके साथ ही उनसे उनकी मानसिक दशा के बारे में भी सवाल किए गए। बच्चों से उनकी भावनात्मक और व्यावहारिक दिक्कतों के साथ ही संगी साथियों के साथ संबंध निभाने में आने वाली दिक्कतों के बारे में भी पूछा गया। इस दौरान एक मशीन के जरिए उनकी शारीरिक सक्रियता को भी मापा गया।
रिसर्च के बाद जो नतीजे आए उनसे पता चला कि जिन बच्चों ने दो घंटे से ज्यादा वक्त टीवी या कंप्यूटर के साथ बिताया उनमें से 60 फीसदी से ज्यादा बच्चों को मनोवैज्ञानिक दिक्कतें पेश आ रही हैं। टीवी के सामने दो घंटे से कम वक्त बिताने वाले बच्चों में ये दिक्कतें नहीं थीं।
रिसर्च करने वाले डॉक्टर एंगी पागे ने बताया, 'हम जानते हैं कि शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता शरीर और मन दोनों के लिए अच्छी होती है लेकिन इस बात के पक्के संकेत हैं कि ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहने के कारण नकारात्मक असर हो रहा है। इस बात के कोई प्रमाण नहीं कि अगर शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता खूब ज्यादा हो तो स्क्रीन के साथ थोड़ी ज्यादा देर तक चिपका रहा जा सकता है।' हां रिसर्च करने वाले छात्रों ने ये जरूर देखा कि शारीरिक मेहनत नहीं करने वाले छात्रों में मनोवैज्ञानिक दिक्कतें और बढ़ जाती हैं अगर वो स्क्रीन के साथ ज्यादा समय बिता रहे हों। इसके मुकाबले पढऩे या होमवर्क करने में वक्त बिताने वाले छात्रों में किसी तरह की मनोवैज्ञानिक दिक्कतों के पैदा होने के कोई संकेत नहीं मिले।

एक शाम, भ्रष्टाचारियों के नाम

एक शाम, भ्रष्टाचारियों के नाम
- संजय कुमार चौरसिया
अवार्ड, नाम सुनकर ही ऐसे लगता है, जैसे हमने कोई बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली हो! जैसे हमारी मेहनत सफल हो गयी हो। इन्सान की उम्र निकल जाती है एक खिताब हासिल करने में। वह भी कड़ी मेहनत करके, अपने लिए, देश हित के लिए, देश के मान- सम्मान के लिए, आम जनता की खुशी के लिए, गरीबों की भलाई के लिए, और भी ऐसे कई क्षेत्र हैं जो अवार्ड के लायक हैं! हम हमेशा से अच्छे लोगों को अवार्ड देते रहे और आगे भी देते रहेंगे, क्योंकि अवार्ड विजेता कड़ी मेहनत कर कीर्तिमान रच पाता है। हम सलाम करते हैं देश के समस्त छोटे- बड़े अवार्ड विजेताओं को। आशा करते हैं वे और भी बड़े- बड़े खिताब हासिल करेंगे!
आजकल हमारे देश में एक चीज बहुत सुनने में आ रही है और वो है अवार्ड, तेंदुलकर को भारत रत्न मिलना चाहिए, आमिर खान को ऑस्कर, धोनी को आईसीसी, अमिताभ को सदी के महानायक का, सोनिया गांधी को 'बेस्ट लीडर ऑफ इंडिया' का। ...और भी हैं इस देश में जो अवार्ड के हकदार हैं, जिन्हें आज तक अवार्ड नहीं मिला! आज भी इस देश में बहुत से गुणी- अवगुणी, नायक- खलनायक, खिलाड़ी- अनाड़ी, चोर- पुलिस, मंत्री- संत्री, साधू- सन्यासी और आला अधिकारी बचे हुए हैं, जो न जाने कितने तरह के अवार्डों से आज तक वंचित है, आज हम सभी को मिलकरइनके द्वारा अपने- अपने क्षेत्रों में हासिल की गयी महान उपलब्धियों के लिए नये- नये खिताबों से नवाजा जाना चाहिए! फिर चाहे इन्होंने देश की गरिमा को ताक पर रखकर, देश का सिर शर्म से झुकाकर, बड़े- बड़े घोटाले कर, आम जनता के साथ धोखा कर, गरीबों का खून चूसकर, भूखों का निवाला छीनकर, बच्चों का बचपन, युवा पीढ़ी का भविष्य गर्त में धकेलकर कर, मान- मर्यादाएं, सभ्यता- संस्कार, इंसानियत बेचकर और सारे बुरे काम करके अपने क्षेत्रों में महान उपलब्धियां ही क्यों न हासिल की हों! आज हमारा देश हर अच्छे छोटे-बड़े काम में सफलता हासिल कर रहा है! आज तक हमने सिर्फ अच्छे लोगों को ही पुरस्कृत किया है! किन्तु अब समय अच्छे लोगों का नहीं है, अब वक्त आ गया है उन लोगों को भी अवार्ड देने का जो आज देश का नाम विश्व पटल पर रोशन कर रहे हैं, फिर चाहे हम भ्रष्टाचार में और एक पायदान आगे बढ़ते चले जा रहे हों, बेईमानी, घूसखोरी, बेरोजगारी, हर तरह के छोटे- बड़े घोटाले कर देश का नाम रोशन कर रहे हों!
तो अब समय आ गया है एक शाम आयोजित कर इन बड़े- बड़े भ्रष्टाचारियों को अवार्ड देने का! अवार्ड देने की शुरुआत करेंगे देश के एक बड़े घोटाले 'राष्ट्रमंडल खेल' के सबसे बड़े खिलाड़ी से जिसने देश की इज्जत पहले ही डुबो दी। हम शुक्रिया अदा करते हैं देश के सच्चे खिलाडिय़ों का जिन्होंने हमारी इज्जत (असली अवार्ड जीतकर) बचा ली! भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अवार्ड इनको दिया जाना चाहिए! भ्रष्टाचार का दूसरा अवार्ड कारगिल सैनिकों के परिवारों के लिए बनाये गए 'आदर्श हाऊसिंग सोसायटी' में घपला करने वालों को जो देश की रक्षा करने वाले सैनिकों का मान- सम्मान भी न कर सके। तीसरा अवार्ड उन भ्रष्टाचारियों के नाम जो देश की 'पवित्र गाय' या 'हॉलीकाउ' अदालतों में बैठे हुए भ्रष्ट जज और वकीलों को, जो वहां बैठकर आम जनता का भरोसा तोड़ रहे हैं और भ्रष्टाचार फैला रहे हैं। देश के उन तमाम मंत्रियों- संतरियों, पुलिस- डॉक्टर, इंजीनियर, साधू- सन्यासी और बहुत से ऐसे लोगों के नाम जो झूठ- फरेब, बेईमानी- घूसखोरी और घोटाले आदि करके आज देश के कई सर्वोच्च पदों पर आसीन हैं! और जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। हम सब देशवासियों को मिलकर इन भ्रष्टाचारियों को पुरष्कृत करना चाहिए, क्योंकि एक सफल व्यक्ति को जितनी कड़ी मेहनत अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए करनी पड़ती है, उससे कहीं ज्यादा मेहनत इन भ्रष्टाचारियों को घोटाले करने में लगती है! इन भ्रष्टाचारियों को भी बहुत कुछ सहना- सुनना पड़ता हैं बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है तब कहीं जाकर सफल और पूर्णरूप से पक्के भ्रष्टाचारी बन पाते हैं! अब हम सबको इनकी मेहनत के लिए इनका मान- सम्मान करना जरूरी है!
आप सब से 'गुजारिश' है, अब हम सब मिलकर एक शाम आयोजित करें, इन भ्रष्टाचारियों को अवार्ड देकर पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए! तब जाकर उनपर भ्रष्टाचारी होने की पक्की मुहर लगेगी और वे असली भ्रष्टाचारी कहलायेंगे!
आप कौन का अवार्ड लेना चाहते हैं? यह आप सभी को सोचना है... तो सोचिये... अवश्य सोचिये।
धन्यवाद ।
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जीवन की आपाधापी को बहुत करीब से देखने और महसूस करने वाले संजय कुमार चौरसिया को उनके एक अजीज मित्र ने लिखने के लिए प्रेरित किया! वे शिवपुरी मध्य- प्रदेश के रहने वाले हंै। पिछले 13 वर्षों से शेयर मार्केट से जुड़े हुए हैं। sanjaykuamr.blogspot.com में कविता और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक राजनीतिक विसंगतियों को बेबाकी के साथ अभिव्यक्त करते हैं।
पता: c/o कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड,
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ताली बजाकर सेहत बनाएंँ

ताली बजाकर सेहत बनाएँ
भजन गाते या गाना गाते समय ताली बजाना न सिर्फ अपकी रुचि को दर्शाता है बल्कि यह एक्यूप्रेशर का भी काम करता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रतिदिन नियमित रूप से कम से कम 1 या 2 मिनट ताली बजाई जाए तो फिर किसी प्रकार के व्यायाम करने की जरूरत नहीं है। लगातार ताली बजाने से मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति की वृद्घि होती है। और व्यक्ति जल्द बीमारी के चपेट में नहीं आता।
एक्यूप्रेशर चिकित्सा के जानकार लोगों का कहना है कि हाथ की हथेलियों में शरीर के सभी आन्तरिक उत्सर्जन संस्थानों के बिन्दू होते हैं व ताली बजाने से जब इन बिन्दुओं पर बार- बार दबाव पड़ता है तो सभी आन्तरिक संस्थान ऊर्जा पाकर अपना काम सुचारू रूप से करते हैं जिससे शरीर स्वस्थ और निरोग बनता है।
यही नहीं ताली बजाने से शरीर की अतिरिक्त वसा कम होती है। इससे मोटापा कम होता है और विकार नष्ट होते हैं। शरीर की सारी क्रियाओं का संतुलन बना रहता है। साथ ही मन प्रसन्न रहता है। तो फिर देर किस बात की है आज से ही शुरू कर दीजिए ताली बजाना, क्योंकि न इसके लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे और न ही अतिरिक्त मेहनत। हां यदि आपको अनायास कहीं ताली बजाते देख कोई मुस्कुराता हुआ निकले तो आप भी मुस्कुरा दीजिए और यदि ऐसा करने का कारण पूछे तो मुफ्त की सलाह भी दे दीजिए, क्योंकि इसमें भी आपको कुछ खर्च नहीं करना है।
-पिकासो के रोचक संस्मरण
सिग्नेचर
पिकासो ने एक बार अपने फ्रांस वाले भवन में महोगनी की एक आलमारी बनवाने के लिए एक कारपेंटर को बुलाया।
कारपेंटर को आलमारी का वांछित डिजाईन समझाने के लिए पिकासो ने कागज पर आलमारी के आकार और रूप का एक स्केच बनाकर कारपेंटर को दिया।
पिकासो ने कारपेंटर से पूछा 'इसपर कितना खर्च आएगा?'
कारपेंटर ने कहा 'कुछ नहीं। आप बस स्केच पर अपने सिग्नेचर कर दीजिये।'
(www.hindizen.com से )

सागर सा गहरा



सागर सा गहरा
उदंती के माध्यम से पाठकों तक जो जानकारी पंहुचती है वह दुर्लभ है। रोटी खाते ही शेरू बन गया अछूत आज की जातिवादी और सड़ी- गली वर्ण व्यवस्था वाली सोच का तालिबानी और कुरूप चेहरा है। प्रेमवन तो अनुकरणीय है, पर लुटेरा प्रशासन उसमें भी बाधा ही बनता है। नारे दीवारों की शोभा बनकर रह जाते हैं। मुक्तिबोध की कहानी पढऩे का अवसर मिला केवल उदंती के कारण। सभी के लिए कुछ न कुछ सागर -सा गहरा है, इस उदंती के गागर में। अनावश्यक सामग्री है ही नहीं। आपको इतना परिमार्जित अंक निकालने के लिए बधाई।
- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
rdkamboj@gmail.com
आज के साहित्यकार ?
उदंती का ताजा अंक मिला। साज- सज्जा बहुत आकर्षक है सदैव की तरह। विचार सामग्री भी रोचक और विविधतापूर्ण है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में उभरते सवालों तथा कालजयी रचनाओं को साहित्य के माध्यम से बखूबी संजोकर रख रही हैं। आपके इस प्रयास की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। वैसे तो आज साहित्यकार खेमे में बंटे हुए हैं, आत्ममुग्धता का भाव ओढ़े हुए सामाजिक चिंतन से विमुख अथवा उधारी की सोच से ग्रस्त दिखते हैं। इस दृष्टि से उदंती का कार्य मार्गदर्शी है, प्रेरणास्पद है।
-ब्रिजेन्द्र श्रीवास्तव, ग्वालियर, मो. 09425360243
brijshrivastava@rediffmail.com
अच्छी पहल
हिंदी सिनेमा के बारे में तो हर जगह पढऩे को मिल जाता है, पर क्षेत्रीय सिनेमा पर मैटर ढूंढऩा मुश्किल हो जाता है। उदंती की अच्छी पहल के लिए बधाई।
- नव्यवेश नवराही, जालंधर, navrahi@gmail.com
प्रशंसनीय कार्य
रॉक गार्डन की तर्ज पर रश्मि सुंदरानी द्वारा दुर्ग में कबाड़ का जो उपयोग किया गया है वह प्रशंसनीय है। उनसे प्रेरणा लेते हुए कबाड़ का यदि इसी तरह शहर के सौन्दर्य वृद्धि में उपयोग कर लिया जाए तो सरकार और शहरवासियों दोनों की समस्याओं का समाधान होगा। इसी तरह दीनानाथ द्वारा की गई पहल भी सराहनीय है। अगर निजी तौर पर व्यक्ति ऐसे उदाहरण पेश करता रहे तो पर्यावरण को बनाए रखने में आसानी होगी।
- पूजा शुक्ला, रायपुर (छ.ग.)
मार्गदर्शी दीपकों की दिव्य ज्योति
उदंती के अक्टूबर अंक में अनकही के लिए बधाई देना चाहता हूं - मूल्यहीनता के इस युग में आप की खोज- मूल्य रक्षा की है। आज हमारे समाज का दुर्भाग्य है कि मीडिया इन महानताओं को महत्व नहीं दे रहा है। ये घटनाएं यदि औरों के लिए उदाहारण बन सके तो अंधेरे के खिलाफ ये रोशनी के दिए आशा जागते हैं ।
- सुरेश यादव, नई दिल्ली
sureshyadav55@gmail.com
जाग्रत समाज के बूते ही इस तरह की सामाजिक समस्याएं दूर हो पाएंगी।
-लोकेन्द्र सिंह राजपूत, ग्वालियर म.प्र.
www.apnapanchoo.blogspot.com
ओय ओय.... गिर गया
उदंती के अक्टूबर अंक में प्रमोद ताम्बट का सटीक व्यंग्य मानो कह रहा है ... ओय ओय ... सुरेश कलमाड़ी गिर गया और अब तो सचमुच गिर गया है, बच नहीं पाया है। सभी रचनाएं बेहतरीन, ताजातरीन, सार्थक अंक।
- अविनाश वाचस्पति, नई दिल्ली मो.09868166586
avinashvachaspati@gmail.com
छत्तीसगढ़ में रेजीमेंट
डॉ. परदेशीराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ में रेजीमेंट बनाए जाने को लेकर जो सवाल उठाए हैं उस विषय को गंभीरता से लेते हुए विचार किया जाना चाहिए। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद ने अब सारी हदें पार कर ली है।
- राजेश साहू, राजनांदगांव (छ.ग.)

रंग -बिरंगी दुनिया

तीन अरब में नीलाम हुआ गुलाबी हीरा
दुनिया की सबसे खूबसूरत चीजों में से एक गुलाबी हीरा गत माह करीब 3 अरब रुपए में नीलाम हुआ। ब्रिटेन के मशहूर नीलामी घर सॉदबी ने इसका सौदा कराया। किसी एक हीरे के लिए चुकाई गई यह अब तक की सबसे बड़ी रकम है। इस गुलाबी हीरे के लिए लंदन के जाने- माने जौहरी लॉरेंस ग्रैफ ने 46 मिलियन अमेरिकी डॉलर देकर इसे खरीदा। ग्रैफ ने तुरंत ही इस हीरे को नाम दिया 'द ग्रैफ पिंक।'
सॉदबी ने इस नीलामी से पहले 24.78 कैरेट के इस दुर्लभ हीरे की कीमत करीब 1 अरब 20 करोड़ रुपये से 1 अरब 70 करोड़ रुपए के बीच आंकी थी। लेकिन खरीदारों के बीच लगी होड़ ने इसकी कीमत दोगुनी से भी ज्यादा कर दी और यह करीब 3 अरब रुपए में बिका। यूरोप और मध्यपूर्व में सॉदबी के अंतरराष्ट्रीय ज्वैलरी विभाग के चेयरमैन डेविड बेनेट ने इस हीरे को सबसे शुद्ध हीरों में से एक करार दिया है। सॉदबी की नीलामी में आए करीब 500 लोगों की आंखों में चमक भर देने वाले इस हीरे की तरह के दुनिया में बस दो फीसदी हीरे ही मौजूद हैं। बाजार में यह आखिरी बार 60 साल पहले तब आया था जब अमेरिका के जौहरी हैरी विंस्टन ने अपने निजी खजाने से निकाल कर इसे बेच दिया था। तब से यह फिर निजी खजाने में ही दबा हुआ था।
लंबाई ने दिलाई प्रसिद्धि
अमेरिका में कैलिफॉर्निया के वायेन और लॉरी हॉलक्विस्ट ने 7 साल पहले शादी की तो उन्हें नहीं पता था कि उनकी लंबाई का यह मिलन उन्हें दुनिया भर में मशहूर कर देगा। इस जोड़े को गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया के सबसे लंबे जीवित पति- पत्नी के खिताब से नवाजा है।
कैलिफोर्निया के स्टॉक्टन में रहने वाले हॉलक्विस्ट पति- पत्नी की कुल लंबाई 13 फुट 4 इंच यानी 407.4 सेंटीमीटर है। पति की लंबाई है छह फुट 10 इंच और पत्नी की छह फुट 5.95 इंच। टेलीफोन कंपनी में काम करने वाले 57 साल के वायेन ने अपनी लंबाई को लेकर मजाक में कहा, 'ऊपर से देखने पर सारा नजारा ही अलग हो जाता है। हम एक दूसरे को भारी भीड़ में भी खोज सकते हैं।'
वायेन और लॉरी 2003 में एक चर्च सिंगल्स क्लब में मिले थे। वे पिछले 7 साल से एक साथ रह रहे हैं लेकिन इसी साल उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड्स से संपर्क किया। शुरू में वे थोड़ा झिझक रहे थे। उन्होंने किसी वेबसाइट पर पढ़ा कि पिछली बार 7 फुट से लंबे दो लोगों ने शादी 19वीं सदी में की थी। फिर उन्हें ध्यान आया कि वे लोग सबसे लंबे जीवित पति- पत्नी के रूप में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। और इस तरह वे मशहूर हो गए।
सूरज की रोशनी पर भी लगेगी फीस !
क्या उगते या ढलते सूरज को देख कर आपके मन में कभी उस पर अपना अधिकार जमाने का ख्याल आया है! जी हां स्पेन के गैलिसिया शहर में रहने वाली 49 वर्षीय एंजिल्स ड्यूरन ने सूर्य को अपनी निजी संपत्ति बताकर इसकी रोशनी का इस्तेमाल करने वालों पर फीस लगाने का दावा किया है।
ड्यूरन ने सूर्य को आधिकारिक तौर पर अपनी संपत्ति बताया है। उन्होंने सितंबर में सूर्य का स्थानीय नोटरी कार्यालय में अपने नाम पंजीयन भी कराया है। ऐसा उन्होंने अमेरिका के एक शख्स से प्रभावित होकर किया है। अमेरिका का यह शख्स चंद्रमा और कई ग्रह अपने नाम करा चुका है।
नोटरी कार्यालय के दस्तावेज में लिखा गया है कि मिस ड्यूरन को सूर्य की मालकिन घोषित किया जाता है। अब वह सूर्य की रोशनी इस्तेमाल करने वालों पर फीस लगाने की तैयारी में है। इसका आधा भाग वह स्पेनिश सरकार को देने के साथ 20 फीसदी देश के पेंशन फंड में जमा करेंगी। इसके अलावा दस प्रतिशत शोध कार्यों और दस प्रतिशत दुनिया की भुखमरी कम करने और बाकी दस प्रतिशत को खुद रखेंगी।
दुनिया के सभी देशों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय सौदा होता है, जिसके तहत कोई भी देश किसी ग्रह या तारे पर अपना मालिकाना हक नहीं जमा सकता। मगर यह सौदा किसी व्यक्ति विशेष पर लागू नहीं होता। इसी का फायदा उठाते हुए एंजिल्स ड्यूरन ने सूर्य पर कब्जा कर लिया है।