March 10, 2013

हाइकु


तेरे आने की आहट
-तुहिना रंजन
1.
रेत पे लिखे
कोई नाम हमारा
सदा के लिए।
 2
दिलों के बीच
दूरियों को मिटाता
एक गुलाब।
 3
बूढ़ा पीपल
रो पड़ा देखकर
टूटते रिश्ते।   
 4
अँधेरी रात
जलता एक दिया
न हो निराश। 
4
अम्बर- धरा
मिलें क्षितिज पर
फिर भी जुदा।
6
नीले नभ में
रंगबिरंगी पतंगें
दिल लुभाएँ।
7
आकाश -तले
धरती झूम उठे
घन बरसे।
8
रो पड़ा नभ
देखी उसने जब
सूखी धरती।
9
नील कंठ -सी 
करती विष पान
मृदा है क्लांत।
10
श्वास- नि:श्वास
अब हुआ दुश्वार
दूषित प्राण ।
11
कोलाहल  में
डूबता हर स्वर
खोया संगीत।
12
मीन व्याकुल
आपदा पड़ी भारी 
जल है म्लान।
13
हरी चुनरी
तार-तार हो गई
लुटा संसार।
14
चाँदनी सोई
अमावस की रात
जागते तारे।
15
दिन गुज़रा
साँझ तक रुका था
रात न मिली।   
16
दिल गुस्ताख़
देख उन्हें ख्यालों में
मचल पड़ा।
17
मनमोहना
मिलन तुझ संग
होगा दोबारा?
18
तेरे आने की
आहट सुनने को
जी बेकरार।
 19
स्वप्न से सजा
आँचल लहराए ,
वो याद आए।
20
कुछ  यूँ हुई
यादों की बरसात
भीग उठी  मैं।
21
नैन सजल
बादल बरसते
भीजे धरती।
22
ममतामयी
उमड़ रहा स्नेह
नैनों की भाषा।
23
बोलती आँखें
दिल के सारे भेद
प्रेम नि:शब्द।
24
अपूर्ण स्वप्न
छटपटाती आँखें
पिंजरबद्ध।

संपर्कः C-4 Sector 6, Rourkela 769002 ,Odisha, tuhinaranjan@gmail.com

1 Comment:

प्रियंका गुप्ता said...

सुन्दर हाइकू है...बहुत अच्छे लगे...बधाई...|

प्रियंका गुप्ता

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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