February 19, 2017

प्रेरक

मनुष्य की उदासी
 मनुष्य गहरी निराशा के क्षणों में अकेला बैठा था. तब सभी जीव-जंतु उसके निकट आए और उससे बोले:-
- तुम्हें इस प्रकार दु:खी देखकर हमें अच्छा नहीं लग रहा। तुम्हें हमसे जो भी चाहिए तुम माँ लो और हम तुम्हें वह देंगे।
मनुष्य ने कहा, मैं चाहता हूँ कि मेरी दृष्टि पैनी हो जाए.
गिद्ध ने उत्तर दिया, मैं तुम्हें अपनी दृष्टि देता हूँ।
मनुष्य ने कहा, मैं शक्तिशाली बनना चाहता हूँ।
जगुआर ने कहा, तुम मेरे जैसे शक्तिशाली बनोगे।
फिर मनुष्य ने कहा, मैं पृथ्वी के रहस्यों को जानना चाहता हूं.
सर्प ने कहा, मैं तुम्हें उनके बारे में बताऊँगा।
इस प्रकार अन्य जीव-जन्तुओं ने भी मनुष्य को अपनी खूबियाँ और विलक्षणताएँ सौंप दीं। जब मनुष्य को उनसे सब कुछ मिल गया तो वह अपने रास्ते चला गया।
जीव-जन्तुओं के समूह में उपस्थित उल्लू ने सभी से कहा, अब जबकि मनुष्य इतना कुछ जान गया है, वह बहुत सारे कामों को करने में सक्षम होगा। इस विचार से मैं भयभीत हूँ।
हिरण ने कहा, मनुष्य को जो कुछ भी चाहिए, वह उसे मिल तो गया! अब वह कभी उदास नहीं होगा।
उल्लू ने उत्तर दिया, नहीं। मैंने मनुष्य के भीतर एक अथाह विवर देखा है। उसकी नित-नई इच्छाओं की पूर्ति कोई नहीं कर सकेगा। वह फिर उदास होगा और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए निकलेगा। वह सबसे कुछ-न-कुछ लेता जाएगा, और एक दिन यह पृथ्वी ही कह देगी, 'मैं पूरी रिक्त हो चुकी हूँ, मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है।
(मेल गिब्सन द्वारा वर्ष 2006 में निर्मित व निर्देशित अमेरिकन एपिक एडवेंचर फिल्म एपोकेलिप्टो से) हिन्दी ज़ेन से

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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