August 25, 2012

सेहतः उम्र से पंजा लड़ाइए ग्रीन टी पीजिए

 यदि आप ग्रीन टी पीने के शौकीन हैं तो बढ़ती उम्र और बीमारियों की ओर से निश्चित हो जाइए। नियमित रूप से ग्रीन टी पीने वाले लोग ग्रीन टी नहीं पीने वाले लोगों की तुलना में अधिक चुस्त और रोग मुक्त रहते हैं।
ग्रीन टी में मौजूद एंटी ऑक्सिडेंट रसायन उन कोशिकाओं को नष्ट होने से रोकते हैं, जो बीमारियों को रोकने में मददगार होती हैं। शोधकर्ताओं को ग्रीन टी के प्रभावों की जांच के दौरान हाई कोलेस्ट्रॉल और कैंसर जैसी बीमारियों के बारे में मिश्रित परिणाम मिले।
अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित नई रिपोर्ट में ग्रीन टी के फायदों के बारे में लिखा गया है। लेकिन इस चाय के फायदे कैसे और क्या हो रहे हैं इस बारे में और व्यापक रिसर्च किया जाएगा।
जापान की टोहोकू यूनिवर्सिटी के मेडिसिन विभाग के यासुटके टोमाटा और उनके साथियों ने 65 वर्ष और उससे अधिक के 14,000 ऐसे लोगों पर अध्ययन किया जो ग्रीन टी पीते हैं। उन्होंने पाया कि ऐसे लोगों को नहाना, कपड़े पहनना जैसे रोजमर्रा के कामों में कम परेशानियों का सामना करना पड़ा। रिसर्च में यह भी पता चला कि हर दिन एक कप ग्रीन टी पीने वालों की तुलना में पांच कप ग्रीन टी पीने वाले ज्यादा चुस्त
रहते हैं।
टोमाटो और उनके सहयोगियों ने रिपोर्ट में लिखा है कि ग्रीन टी की खपत आंशिक शारीरिक अक्षमता को दूर करने वाले तत्वों से सीधे तौर पर जुड़ी है। लेकिन रिसर्च में यह साबित नहीं हो रहा था कि क्या सिर्फ ग्रीन टी की वजह से ही लोगों की क्षमता में इजाफा होता है। यह भी देखा गया है कि ग्रीन टी पसंद करने वाले लोग अपने खान पान के प्रति भी सजग रहते हैं। मछली, सब्जी और फल को खाने में शामिल करने के साथ ही ऐसे लोगों में धूम्रपान का प्रतिशत भी कम रहता है। वे हार्ट अटैक के भी कम शिकार होते हैं और मानसिक रूप से भी तीक्ष्ण होते हैं। ये समाज और परिवार में भी अधिक सक्रिय रहते हैं।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि कैसे ग्रीन टी शारीरिक अक्षमता को दूर करने में सहायक होती है। टोमाटा और उनकी टीम ने यह भी पाया कि ग्रीन टी से उम्रदराज महिलाओं के पैरों की मांसपेशियां भी मजबूत रहती हैं। ग्रीन टी और इसमें मौजूद तत्वों को कुछ हद तक सुरक्षित माना जाता है। इसमें शामिल कैफीन और विटामिन रक्त का थक्का जमाने में भी सहायक हैं।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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