January 31, 2012

94 की उम्र में भी फुल टाइम जॉब

एडा होस्टलर ब्रिटेन की सबसे बुजुर्ग कामकाजी महिला हैं। वे आज भी 94 साल की उम्र में फुल टाइम काम कर रही हैं। परदादी बन चुकीं एडा की पिछले साल कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। फिर भी उन्होंने सप्ताह में 45 घंटे काम करना जारी रखा। उनके इस हौसले से सभी परिवार वाले और उनके दोस्त हैरान हैं।
एडा पोर्ट्समाउथ स्थित एक स्टोरीटाइम नर्सरी में एडमिनिस्ट्रेटर हैं। यह नर्सरी उनकी 63 वर्षीया बेटी जैनेट ने 19 साल पहले शुरू की थी। वे हफ्ते में पांच दिन सुबह आठ से शाम छह बजे तक काम करती हैं और फिलहाल उनका रिटायर होने का कोई इरादा नहीं है।
सप्ताहांत में होने वाली छुट्टियों से उन्हें झुंझलाहट होती है, क्योंकि उन्हें रोजाना काम की आदत पड़ चुकी है।
एडा ने कभी सोचा नहीं था कि वे इतनी उम्र तक काम कर सकेंगी। वे अपने दिमाग को सक्रिय और युवा महसूस करने के लिए सभी जतन करती हैं। फिर भी अपनी इस सफलता का श्रेय वे बच्चों को देती हैं। उन्हें बच्चों से बेहद प्यार है और उनका साथ उन्हें अच्छा लगता है।
एडा का जन्म इटली के नेपल्स में हुआ था। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उनकी पीटर होस्टलर से मुलाकात हुई और 1945 में 26 वर्ष की उम्र में उन्होंने शादी की थी।


एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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