November 20, 2009

मुझे है अनुभव

- जीवन यदु
अब तक कुछ भी लिखा ना तुमने, मेरा मन मुझसे कहता है,
मन का कहा मैं सुन लेता हूं, मुझे है अनुभव सच सुनने का।

कण -कण को मैं रहा जोड़ता, जीवन की उपलब्धि मानकर,
जुड़ते- जुड़ते कभी बना वह, एक इमारत अलग बात है।

जब भी शब्दों को गूंथा है, अनुभव के धागे में साथी,
लोगों ने कह दिया बनी है, सही इबारत अलग बात है।

अलग बात यह भी, विस्फोटक रूप धरा है, कभी कणों ने,
मैं कणाद तो नहीं हूं, लेकिन मुझे है अनुभव कण चुनने का।

कभी जरूरत पड़ी सूर्य को, कहां मांगता आग फिरेगा,
इसीलिए बस जला रखी है, शब्दों की भट्ठी सीने में।

कविता करने यदि बैठा तो, एक महाभारत लिखूंगा,
पर मुझको खटना पड़ता है, कविता को मर- मर जीने में।

जीवन से कुछ समय चुराकर, अगर कभी कुछ बुनने बैठा,
कुछ ना कुछ बुन लिया हमेशा, मुझे है अनुभव कुछ बुनने का।

बहुत जरूरी लगता मुझको, उन लोगों की बाते सुनना,
कथा- उपन्यासों में जिनको, अब तक नहीं प्रवेश मिला है।

कोशिश करता हूं पढऩे की, उनका मानस- ग्रंथ खोलकर,
आजादी के बाद भी जिनको, अब तक नहीं स्वदेश मिला है।

आत्मीयता से भरकर मैं,  सुन लेता हूं उनकी बातें,
फिर गुनता हूं उन बातों को, मुझे है अनुभव यूं  बुनने का।

1 Comment:

Anonymous said...

मुझ्को जीना पड्ता है कविता को मर-मर जीने में..बहुत अच्छी पंक्तियां!

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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