March 24, 2018

माहिया

हम संग मुस्काएँगे! 
- डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

कितनी बरसात हुई
वीर शहीदों से
सपने में बात हुई। 1

बोला इक मत रोना
दिल के ज़ख्मों को
आँसू से मत धोना। 2

थोड़ा समझा देना
संदेशा मेरा
घर तक पहुँचा देना। 3

माँ! सुत था अलबेला
वैरी की गोली
छाती पर हँस झेला। 4

बाबा कब हारे हैं
ये मेरे साथी
सब पुत्र तुम्हारे हैं। 5

गुड़िया से कहना है
तू मजबूर नहीं
वीरे की बहना है। 6

कहना ना हरजाई
लिपट तिरंगे में
जब घर लौटे भाई। 7

हाँ फ़र्ज़ निभाया है
माटी का हमने
बस क़र्ज़ चुकाया है। 8

कह देना प्यारी से
राह तके मेरी
इकटक सुकुमारी से। 9

क्या पूछो कैसी है
वो मेरी चाहत
फूलों के जैसी है। 10

हाथों भर हो चूड़ा
सिन्दूरी बिंदी
महके गजरा जूड़ा। 11

वादा ना निभ पाया
कहकर भी मिलने
मैं लौट नहीं आया। 12

थोड़ी मजबूरी थी
सीमा की रक्षा
भी बहुत ज़रूरी थी। 13

विनती है, सुन लेना
साँसों की डोरी
ख़ुशियों को चुन लेना। 14

है उम्र अभी छोटी
मुश्किल है सहना
जग की नज़रें खोटी। 15

काँटो पर मत चलना
जीवन की भट्टी
यूँ ठीक नहीं जलना। 16

होनी से खुद लड़कर
चुन लेना साथी
कोई आगे बढ़कर। 17

तड़पी,फिर बोल गई
मन की सब पीड़ा
रो-रो कर खोल गई। 18

कैसे कायर माना
क्यों, मनमीत कहो
मुझको ना पहचाना। 19

पूरी तैयारी है
तेरा क़र्ज़ चुका
अब मेरी बारी है ।20

पीछे तो आना था
नन्हे को लेकिन
फ़ौलाद बनाना था। 21

मैं वचन निभाऊँगी
माँ-बाबा मेरे
हर सुख पहुँचाऊँगी। 22

बहना का ज़िक्र करो
ख़ूब सजे डोली
उसकी मत फ़िक्र करो। 23

पक्की है नींव बड़ी
सुन लेना, प्यारी
सरहद पर आन लड़ी। 24

जब लाल बड़ा होगा
बन दीवार अटल
सरहद पे खड़ा होगा। 25

वो पल भी आएँगे
नभ के तारों में
हम संग मुस्काएँगे। 26

सुनकर मन डोल गया
जय उन वीरों की
सारा जग बोल गया। 27

सम्पर्क: एच-604प्रमुख हिल्स, छरवाडा रोड, वापी, जिला- वलसाडगुजरात, Mo. 9824321053,  

1 Comment:

ज्योति-कलश said...

मेरी भावनाओं को यहाँ स्थान देने के लिए हृदय से आभार आदरणीया रत्ना जी 🙏

एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

-0-

लेखकों सेः उदंती.com एक सामाजिक- सांस्कृतिक वेब पत्रिका है। पत्रिका में सम- सामयिक लेखों के साथ पर्यावरण, पर्यटन, लोक संस्कृति, ऐतिहासिक- सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लेखों और साहित्य की विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, व्यंग्य, लघुकथाएँ, कविता, गीत, ग़ज़ल, यात्रा, संस्मरण आदि का भी समावेश किया गया है। आपकी मौलिक, अप्रकाशित रचनाओं का स्वागत है। रचनाएँ कृपया Email-udanti.com@gmail.com पर प्रेषित करें।

उदंती.com तकनीकि सहयोग - संजीव तिवारी

टैम्‍पलैट - आशीष