April 08, 2015

पर्यावरण विशेषः गाँधी जी का संदेश

विलासिता की राह छोडऩी होगी
पिछले दो दशकों के दौरान यह तो स्पष्ट हो गया है कि जलवायु बदलाव का संकट अत्यंत गंभीर है परंतु इसे रोकने की असरदार कार्यवाही अभी नहीं हो सकी है। हाल में उपलब्ध हुए आंकड़े यही इंगित करते हैं कि दुनिया ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन को समय पर निर्धारित मात्रा में कम करने के लक्ष्यों से अभी बहुत दूर है।
यह एक अजीब स्थिति है कि किसी समस्या की गंभीरता को तो उच्चतम स्तर पर स्वीकार कर लिया जाए, पर उससे जूझने के उपाय फिर भी पीछे रह जाएं। धनी देशों, विकासशील देशों व अन्य गुटों के बीच चल रहे अंतहीन विवादों के बीच कहीं यह न हो कि धरती को बचाने के सबसे बुनियादी कार्य में ही बहुत देर हो जाए। यदि समाधान की ओर पूरी निष्ठा से बढऩा है तो कुछ बुनियादी मुद्दों पर सहमति बनानी ही होगी। पहली बात तो यह है कि जलवायु बदलाव का संकट इतना बढ़ चुका है कि अब ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में धनी व विकासशील सभी देशों को अधिकतम संभव योगदान देना होगा।
दूसरी महत्वपूर्ण सहमति यह हो जानी चाहिए कि इस क्षेत्र में सबसे बड़ी जिम्मेदारी धनी व औद्योगिक देशों की है। उन्हें उत्सर्जन के अधिक बड़े लक्ष्य स्वीकार करने होंगे व साथ ही विश्व स्तर पर इस संकट के समाधान के लिए अधिक धन भी उपलब्ध करवाना होगा। आखिर यह एक निर्विवाद तथ्य है कि इस सकंट को इतना गंभीर बनाने में सबसे बड़ी ऐतिहासिक जिम्मेदारी इन्हीं धनी देशों की ही है जबकि इन देशों में विश्व की मात्र 20 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। पर दुख की बात है कि ये देश इस जिम्मेदारी से पीछे हटते रहे हैं और अब जिस तरह के आर्थिक संकट से वे स्वयं गुजर रहे हैं उसमें उनके द्वारा यह जिम्मेदारी संभालने की संभावना और कम हो गई है। तो फिर आगे का रास्ता कहां है?
यह सादगी और समता की राह अपनाने में है जो महात्मा गांधी का एक मूल संदेश रहा है। विश्व स्तर पर तथा विशेषकर धनी देशों में सरकारी व गैर-सरकारी स्तर पर यह संदेश फैलाना होगा कि सादगी के सिद्धांत को अपनाकर व अंतहीन विलासिता की राह को छोड़कर ही पर्यावरण की रक्षा में बुनियादी सफलता मिल सकती है। यदि इसके साथ सामाजिक समरसता और सेवा भावना का प्रसार हो तो समाज में विलासिता कम करते हुए भी खुशहाली बढ़ सकती हैं और बढ़ती संख्या में लोग इस प्रयास से जुड़ सकते हैं। जहां एक ओर सबसे गरीब और अभावग्रस्त लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं जुटाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर सबसे धनी देशों व वर्गों की विलासिता में कमी लाना भी आवश्यक है। इसी तरह खतरनाक हथियारों के उत्पादन में भी भारी कटौती करना जरूरी है। विलासिता और अंतहीन उपभोग पर अंकुश लगाने से वे तनाव भी अपने आप कम होंगे जो युद्ध व अधिक हथियार उत्पादन की ओर ले जाते हैं।
विश्व स्तर पर बहुत बुनियादी फैसले करने होंगे जो हमें सादगी और समता की ओर ले जाएं क्योंकि सादगी और समता के सिद्धांत अपनाकर ही धरती के पर्यावरण की रक्षा करने के साथ- साथ गरीबी और अभाव भी दूर किए जा सकते हैं। (स्रोत)

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से कारीगर आदिवासियों के बीच काम रही “साथी समाज सेवी संस्था” द्वारा संचालित स्कूल “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपए तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक लोग पिछले कई सालों से माटी संस्था के माध्यम से “साथी राऊंड टेबल गुरूकुल” के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। पिछले कई वर्षों से माटी समाज सेवी संस्था उक्त स्कूल के लगभग 15 से 20 बच्चों के लिए शिक्षा शुल्क एकत्रित कर रही है। अनुदान देने वालों में शामिल हैं- प्रियंका-गगन सयाल, लंदन मैनचेस्टर, डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, तरुण खिचरिया, दुर्ग (पत्नी श्रीमती कुमुदिनी खिचरिया की स्मृति में), श्री राजेश चंद्रवंशी (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, पी. एस. राठौर- अहमदाबाद। इस मुहिम में नए युवा सदस्य जुड़ें हैं- आयुश चंद्रवंशी रायपुर, जिन्होंने अपने पहले वेतन से एक बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठायी है, जो स्वागतेय पहल है। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, पंडरी, रायपुर (छग) 492 004, मोबा.94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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