February 10, 2015

लघु कथाएँः के. पी. सक्सेना 'दूसरे'


निरुत्तर
बैठक मंत्री महोदय के बंगले पर चल रही थी। विषय था- सिगरेट के पैकेट में वैधानिक चेतावनी किस रुप में दी जाय कि संदेश तो चला जाय पर वीभत्स भी न लगे। कुछ लोगों का यह भी कहना था कि अगर रेखांकन डरावना न होगा तो प्रभावशाली भी नहीं होगा।
लोग मतैक्य नहीं हो पा रहे थे क्योंकि सभी बुद्धिमान थे। तभी मंत्री जी का 10 वर्षीय पुत्र सिगरेट की बात सुनकर वहां से निकलते- निकलते ठिठक गया। वह धीरे से मंत्री जा के पास पहुंच कर बड़े लाड़ से बोला- पापा हमारी क्लास में भी सर ने धूम्रपान निषेध दिवस पर एक चित्र बनाकर लाने को कहा है। पर पापा सिगरेट क्या सचमुच बहुत बुरी होती है?
बालक की मासूमियत पर बैठे लोग मुस्कुरा उठे। हां बेटा। ये तो पीने वाले के साथ- साथ उनके आस- पास जो रहता है उसे भी नुकसान करती है। मंत्री जी ने अबोध बालक की न केवल जिज्ञासा शांत की अपितु उसका ज्ञान भी बढ़ाया।
पापा तो फिर आप सीधे सिगरेट बनाना क्यों नहीं बंद करा देते। नादान पुत्र के प्रश्न पर बुद्धिमान पिता निरुत्तर होकर रह गए।

बोकरा भा
जब करीम मियां उसे मंडी से लेकर आए तो उसकी कद- काठी देखकर घर के सभी लोगों ने उसे शेरू नाम दे दिया। बाड़े की खूंटी में बांधे जाते ही उसे अपने अंजाम का आभास हो गया। एक क्रूर सत्य को अपनी नियति मानकर अब वह केवल यह मनाने लगा कि जिब्ह होउं तो कम से कम किसी नेक दिन। तभी उसे बकरीद का ख्याल आया - अगले माह ही तो है शायद। इससे और अच्छा दिन क्या होगा।
इतना सोचते ही उसके मन से मौत का भय एकदम काफूर हो गया। अब उसने अपना सारा ध्यान शरीर बनाने में लगाना शुरू कर दिया। करीम मियां वैसे भी उसकी खुराक का खूब ध्यान रखते- शायद अच्छे दाम के लालच में। उसे भी पता था कि ऐसे अवसरों पर लोगों की पसंद ही मायने रखती है- कीमत तो वे अक्सर हैसियत से अधिक दे डालते हैं।
ऐसे ही एक सुबह जब वह करीम के बेटे के साथ सींग लड़ा रहा था अचानक जब करीम मियां अखबार पढऩा छोड़ सीधे भीतर की ओर भागे तो उसका माथा ठनका। निश्चित ही अखबार में कोई खास खबर है यह सोचकर वह उसे सूंघ ही रहा था कि जनानखाने से करीम मियां की आवाज सुनायी दी-
सुनती हो - चुनाव का ऐलान हो गया- बकरीद से पहले होंगे। अब शेरू पहले ही निकल लेगा- 'बोकरा भात' के लिए। तू जरा उसकी खुराक पर ध्यान दे। जितनी चर्बी बढ़ेगी उतना दाम चढ़ेगा और हमें बकरीद का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
करीम मियां बाहर आकर उसकी गर्दन सहलाने लगे और वह दीवार पर सींग रगड़ते हुए सोच रहा था- कल से बीमार पड़ जाऊं तो कैसा रहेगा।

सम्पर्क- श्री शांतिनाथ नगर, टाटीबंध, रायपुर (छत्तीसगढ़) 492099,
मो. 09584025175, Email: kashipsaxsena@yahoo.co.in

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लेखकों से अनुरोध...

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माटी समाज सेवी संस्था का अभिनव प्रयास
एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें...
माटी समाज सेवी संस्था, समाज के विभिन्न जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। पिछले वर्षों में संस्था ने समाज से जुड़े विभिन्न विषयों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, प्रदूषण आदि क्षेत्रों में काम करते हुए जागरुकता लाने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है।
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