September 26, 2013

खिले कमल


खिले कमल

- डॉ. रमाकान्त श्रीवास्तव
गंगा की धारा-
चाँदनी रात में ज्यो
बहता पारा।
गाँव की गली
नीमों की छाँह तले
मुझे टेरती।
गाँव मुझको
मैं खोजता गाँव को
दोनों खो गए।
ओ मेरे गाँव
माटी की गोद तेरी
याद आती है।
नारी का मन
दहशत का धुआँ
सिर्फ़ घुटन।
वृक्ष कटे हैं
धरती निर्वसना
स्वप्न मिटे हैं।
चाँदनी छाई
प्रेम-पाती-सी भाई
तुम न आईं।
गई पिकी
प्रतीक्षारत पुन:
आम्र-शाखाएँ।
गए शिकारी
खोज रही हिरनी
निज हिरना।
१०
कोई रोया है
चाँदनी रात भर
ओस के आँसू।
११
महुआ खड़ा
बिछा श्वेत चादर
किसे जोहता!
१२
खुल गए हैं
'पी कहाँज् -कहकर
पृष्ठ पिछले।
१३
मरु-जीवन
सावन को तरसे
आकुल मन।
१४
चाँदनी-स्नात
विजन में डोलता
मन्द सुवास।
१५
नहीं बुझाता
झरना निज तृषा
झरता जाता।
१६
फूल खिलते
जब धरा हँसती
फूल बनती।
१७
वर्षा की साँझ
बजाते शहनाई
छिपे झींगुर ।
१८
खिले कमल
जलाशय ने खोले
सहस्र नेत्र ।
१९
रात ताल में
आसमान उतरा
तारों सहित।
२०
देता आवाज़
गाँव का आँगन वो
उलझे कहाँ !
२१
पिकी न आती
पता ही न चलता-
आया वसन्त।
२२
यह सुगन्ध
जो बसी है फूलों में
आदि गन्ध है।
२३
बीते वे दिन
बीत गईं हैं राते
बची हैं यादें।
२४
जूड़े में फूल
कैसे गूँथे श्रमिका
ढोती है ईंटें।
२५
ग्रीष्म -तपन
फूला, धरे अंगार
पलाश-वन।

सम्पर्क: एल ६ / ९६, सेक्टर एल, अलीगंज , लखनऊ-२२६०२४,
मो. ९६२८२४०२६३

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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