May 22, 2013

कविता

अस्तित्व को तलाशती

शैफाली गुप्ता


कपड़ों की तह में
फुल्कों की नरमाई में
ढूंढ़ती खुद को वो।
                        कभी कपड़ों की धुलाई में,
                        कभी सब्जी के नमक में,
                        कभी खीर की मिठास में,
                        कभी रायते की मिर्च में
                        जीवन अपना 'सजातीवो।
कभी घर को निखारने में,
कभी घरवालों को संवारने में,
कभी किताबों को जमाने में,
कभी लिहाफ को चढ़ाने में
नियम अपना 'पातीवो।
                        कभी शब्दों के जाल में,
                        कभी पन्नों के थाल में,
                        कभी कलम की स्याही में,
                        कभी रचना के भेदों में
                        अस्तित्व अपना 'तलाशतीवो।

लेखक के बारे में:  अपने भीतर काव्य कला को अपने पिताजी की देन मानने वाली शैफाली के लिए कविता लिखना, समय बिताने का नहीं वरन जीवन जीने का खूबसूरत तरीका है। अपने ब्लॉग ड्रीम्स पर 5 सालों से सक्रिय। कविता रचने के साथ साथ काव्य पाठ में भी रुचि। रेडियो प्लेबेक इंडिया के 'शब्दों में चाक परकार्यक्रम में विभिन्न कवियों की कवितायेँ अपनी आवाज में मुखर करती हैं। 'बोलती कहानियाँकार्यक्रम के अंतर्गत प्रसिद्ध कहानियों का वाचन। हाल ही में सुधा ओम ढीगरा की प्रसिद्ध कहानियाँ तथा श्री रामेश्वर कम्बोज 'हिमांशुव  सुकेश साहनी की लघुकथाओं का वाचन लघुकथा डॉट कॉम व रेडियो सबरंग के लिए के लिए किया।  वर्तमान में कैलिफोर्निया में, प्रौढ़-शिक्षा में सलंग्न गैर-सरकारी संस्था में अंग्रेजी अध्यापन एवं सॉफ्टवेयर/शिक्षा प्रचार में सक्रिय। संपर्क: कैलिफोर्निया, यूएसए
Email- shaifaligupta80@gmail.com, guptashaifali.blogspot.com

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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