August 25, 2010

रंग- बिरंगी दुनिया

सबसे बुजुर्ग नवविवाहित जोड़ा... 
अभी तो मैं जवान हूं...
कहते है प्यार की कोई उम्र नहीं होती इसी बात को साबित किया है हेनरी और वेलरी ने। ब्रिटेन की हेनरी केर की उम्र 97 साल है और वेलरी ब्रेकोवित्ज 87 साल की हैं। इन दोनों की उम्र पर मत जाइए क्योंकि इनके दिल अब भी जवां हैं। जी हां यह जोड़ा ब्रिटेन में शादी करने वालों में सबसे बुजुर्ग नवविवाहित जोड़ा है।
यह दोनों जवान जोड़ा दोनों लंदन में बुज़ुर्गों के लिए बने एक आवासीय परिसर में रहते हैं जहां उनकी पहली मुलाकात हुई थी। हेनरी को वेलरी से पहली नजर में ही प्यार हो गया लेकिन इस प्यार को उन्हें शादी में बदलने के लिए चार साल तक इंतजार करना पड़ा। उत्तरी लंदन के गोल्डर्स ग्रीन में दोनों ने यहूदी रीति- रिवाज से शादी की।
दोनों के बीच प्यार का सिलसिला तब शुरू हुआ जब हेनरी की कविताएं सुनने वालों के दल में वेलेरी शामिल हुईं। दोनों के कुछ साझा दोस्त थे जो दक्षिण अफ्रीका के उनके प्रवास के समय में बने थे। वेलेरी जोहानसबर्ग में पढ़ाती थीं और हेनरी सिनेमा के लिए वहां काम करते थे। हेनरी ने बताया कि वेलेरी से प्यार का इजहार उन्होंने चाय की प्याली की चुस्कियों के दौरान किया था लेकिन शादी के लिए हां करने में वेनेरी ने काफी समय भी लिया। दोनों पहले से शादीशुदा रह चुके हैं। वेलेरी की 70 साल पहले और हेनरी की 60 साल पहले शादी हुई थी। इस समय दोनों के बच्चे अमेरिका में रहते हैं।
यह तो हुई ब्रिटेन की बात पर हमारे देश में भी पिछले दिनों इसी तरह एक शादी हो चुकी है। खुरई सागर मध्यप्रदेश में 76 वर्षीय लल्ली अहिरवार और 65 वर्षीय भागबाई ने अक्षय तृतीया के दिन वैदिक रीति-रिवाज शादी करके यही साबित किया कि प्रेम में उम्र बाधक नहीं होती। इन दोनों के भी पूर्व जीवन साथी की मृत्यु हो चुकी है।
लल्ली और भागबाई की प्रेम कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। भागबाई मजदूरी करती हैं और वह लल्ली के गांव रजवास में काम के सिलसिले में गई थी वहीं दोनों की मुलाकात हुई और फिर मुहब्बत की गाड़ी चल पड़ी। नाति-नातिन वाले ये दोनों बुजुर्ग साथ रहना चाहते थे, मगर उनकी यह इच्छा उनके ही बच्चों को नागवार गुजरी। परिवार का सहयोग न मिलने के कारण दोनों की यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही थी। लेकिन इनका प्यार देखकर कुछ समाजसेवी आगे आए, उन्होंने दोनों बुजुर्गों का घर बसाने का निर्णय लिया और अक्षय तृतीया के दिन उनकी शादी करा दी। दोनों अब शादी के बाद खुश हैं।

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एक बच्चे की जिम्मेदारी आप भी लें

अभिनव प्रयास- माटी समाज सेवी संस्था, जागरुकता अभियान के क्षेत्र में काम करती रही है। इसी कड़ी में गत कई वर्षों से यह संस्था बस्तर के जरुरतमंद बच्चों की शिक्षा के लिए धन एकत्रित करने का अभिनव प्रयास कर रही है। बस्तर कोण्डागाँव जिले के कुम्हारपारा ग्राम में बरसों से आदिवासियों के बीच काम रही 'साथी समाज सेवी संस्था' द्वारा संचालित स्कूल 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' में ऐसे आदिवासी बच्चों को शिक्षा दी जाती है जिनके माता-पिता उन्हें पढ़ाने में असमर्थ होते हैं। इस स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ परंपरागत कारीगरी की नि:शुल्क शिक्षा भी दी जाती है। प्रति वर्ष एक बच्चे की शिक्षा में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च आता है। शिक्षा सबको मिले इस विचार से सहमत अनेक जागरुक सदस्य पिछले कई सालों से माटी समाज सेवी संस्था के माध्यम से 'साथी राऊंड टेबल गुरूकुल' के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेते आ रहे हैं। प्रसन्नता की बात है कि नये साल से एक और सदस्य हमारे परिवार में शामिल हो गए हैं- रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' नई दिल्ली, नोएडा से। पिछले कई वर्षों से अनुदान देने वाले अन्य सदस्यों के नाम हैं- प्रियंका-गगन सयाल, मेनचेस्टर (यू.के.), डॉ. प्रतिमा-अशोक चंद्राकर रायपुर, सुमन-शिवकुमार परगनिहा, रायपुर, अरुणा-नरेन्द्र तिवारी रायपुर, डॉ. रत्ना वर्मा रायपुर, राजेश चंद्रवंशी, रायपुर (पिता श्री अनुज चंद्रवंशी की स्मृति में), क्षितिज चंद्रवंशी, बैंगलोर (पिता श्री राकेश चंद्रवंशी की स्मृति में)। इस प्रयास में यदि आप भी शामिल होना चाहते हैं तो आपका तहे दिल से स्वागत है। आपके इस अल्प सहयोग से एक बच्चा शिक्षित होकर राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल तो होगा ही साथ ही देश के विकास में भागीदार भी बनेगा। तो आइए देश को शिक्षित बनाने में एक कदम हम भी बढ़ाएँ। सम्पर्क- माटी समाज सेवी संस्था, रायपुर (छ. ग.) 492 004, मोबा. 94255 24044, Email- drvermar@gmail.com

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