May 25, 2010

विदेशों में सुरक्षित नहीं हैं भारत की बेटियां

- मनोज राठौर

विदेशों में अधिकांश एनआरआई पति अपनी नवविवाहित पत्नी को छोड़कर भाग जाते हैं। उनके इंतजार में इन महिलाओं की आंख का पानी सूख जाता है, लेकिन जाने वाला लौट कर नहीं आता। वह दूसरी नांव में सवार होकर समुद्र की लहरों का मजा लेता है।
विदेश में रहने वाली भारतीय बेटियों की सुरक्षा के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक अच्छी पहल की है। अब एनआरआई (अप्रवासी भारतीय) सेल के माध्यम से विदेशी पतियों की काली करतूतें सामने आएंगी। हालांकि व्यापक इंतजाम करने के बाद भी प्रताडऩा की शिकायतें आना बंद नहीं हुए हैं। आंकड़ें बताते हैं कि एनआरआई पतियों के जुल्मों की शिकार महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा गठित की गई इस सेल का काम विवाह के बाद एनआरआई पतियों द्वारा छोड़ दी गईं, उनके जुल्म या धोखाधड़ी की शिकार महिलाओं की मदद करना है। अब आयोग का यह सेल शिकायत प्राप्त होने पर ऐसी महिलाओं की सहायता करेगा।
27 अगस्त 2009 को एनआरआई सेल ने अपना काम करना शुरू कर दिया है। छह माह की अवधी में सेल के पास वैवाहिक अनबन जैसी 177 शिकायतें आ चुकी थीं यानी औसतन रोजाना एक शिकायत। सबसे अधिक शिकायत 130 अमेरिका, 44 ब्रिटेन और 37 कनाडा से मिलीं हैं। यह सेल का आंकड़ा है। मगर वास्तविक स्थिति कुछ और ही है। हर मामले की शिकायत सेल में आए, यह संभव नहीं है। जागरूकता के अभाव में और भय के कारण महिलाएं शिकायत करने से कतराती हैं।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने केंद्र सरकार से एनआरआई मामलों पर एक विधेयक लाने की मांग की है। इस विधेयक में वैवाहिक अनबन, पत्नियों के लिए गुजारा भत्ता, बच्चों की अभिरक्षा, वैवाहिक संपत्ति के निपटारे पर कानून शामिल है। आयोग ने ऐसी शादियों के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने की भी अनुशंसा की है। साथ ही सरकार से अपील की है कि वह दूसरे देशों की सरकारों को प्रवासी शादी संबंधी अंतरराष्ट्रीय कानून को असरकारक ढंग से लागू करने की बात कहे। राष्ट्रीय महिला आयोग का मुख्य जोर इस बिंदु पर है कि किसी एनआरआई से शादी की स्थिति में विवाह का पंजीकरण महिला को उसके पति द्वारा छोड़े जाने की स्थिति में कानूनी रूप से मददगार होगा। विवाह पंजीकरण सभी विकसित देशों में अनिवार्य है और अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलनों में भी इस पर सहमति बन चुकी है।
वैसे अभी तक विधेयक पारित नहीं हुआ है। मतलब साफ है कि आयोग के चिंतन करने मात्र से समस्या का हल नहीं निकल जाता। ज्यादातर मामलों में छली गई विवाहित महिलाओं के पास मुकदमा लडऩे के लिए संसाधन नहीं होते, ताकि अपराधी को उसके गलत कार्यों की सजा मिल सके।
अपने देश में अकेले पंजाब प्रांत से ही कई हजार ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें उनके एनआरआई पतियों ने त्याग दिया है। सवाल यह है कि इस दुखद हालात के बावजूद भारतीय लड़किया एनआरआई से शादिया क्यों कर रही हैं? जबकि विदेशों में एनआरआई पति अपनी नवविवाहित पत्नी को छोड़कर भाग जाते हैं। उनके इंतजार में पत्नी की आंख का पानी सूख जाता है, लेकिन जाने वाला फिर लौट कर नहीं आता।

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